90 घाटों पर बसा विश्व का इकलौता और दुनिया का सबसे प्राचीन शहर है बनारस, महादेव ने बसाया था इसे

लाइव सिटीज डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मीरजापुर में विंध्य की धरा पर पहुंचते ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों का परंपरागत ढंग से स्वागत किया गया. उसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रेंच प्रेसिडेंट इमैनुअल मैक्रों आज काशी पहुंचे. साढ़े पांच घंटे के प्रोग्राम में मैक्रों गंगा घाटों की भी सैर करेंगे. ये वो घाट हैं, जिन्हें मोक्ष प्राप्ति का केंद्र कहा जाता है. वाराणसी एक ऐसा शहर है, जहां मौत का जश्न मनाया जाता है. लगभग 3000 साल पुराने इस नगर को स्वयं शिव भगवान का घर माना जाता है.

दुनिया का सबसे प्राचीन शहर – बनारस

वाराणसी वर्ल्ड का 15वां और एशिया का पहला सबसे प्राचीन शहर है. धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक वाराणसी को लगभग 5 हजार साल पहले खुद शिव भगवान ने बसाया था. हालांकि, मॉडर्न स्कॉलर्स इस शहर को 3000 साल पुराना बताते हैं. अमेरिकन ऑथर मार्क ट्वेन ने लिखा था कि बनारस इतिहास से भी पुराना है. वे इसे दुनिया का पहला शहर मानते थे.

वाराणसी में पहली बार आबादी 1800 BC से बसना शुरू हुई थी. इस आधार पर यह एशिया का पहला और वर्ल्ड का 15वां सबसे प्राचीन शहर है. पहले नंबर पर फलिस्तीन का जेरिको शहर आता है, जो कि 9000 BC में बसा था.

वाराणसी से जुड़े 10 अमेजिंग फैक्ट्स

7 किमी लंबा 90 घाटों पर बसा विश्व का इकलौता शहर है बनारस.

गंगा सिर्फ यहीं उत्तरवाहिनी है. भागीरथ बिना काशी आए शूलटंकेश्वर निकल गए. गंगा के आग्रह पर उनको रथ पूरब से उत्तर की ओर मोड़ना पड़ा था. गंगा ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया, तब आगे बढ़ी.

सृष्टि निर्माण से पहले ब्रह्मा काशी आए और यज्ञ किया. जिस घाट पर यज्ञ किया, वह आज दशाश्वमेध घाट के नाम से जाना जाता है.

मणिकर्णिका घाट पर चक्र पुष्करणी कुंड, गंगा अवतरण से भी प्राचीन है. इसे भगवान विष्णु ने अपने चक्र से बनाया था.

काशी विश्वनाथ एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जहां गंगा स्वयं धरती शिवजी के पास हैं.

वर्ल्ड का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां विदेशी भी अपने परिजनों की डेडबॉडी दाहसंस्कार के लिए लाते हैं.

पूर्वजों के मुक्ति के लिए लोग बनारस के जंगमबाड़ी मठ में शिवलिंग दान करते हैं. विश्व में ऐसा और कहीं नहीं होता.

तुलसी मानस मंदिर एकमात्र मंदिर है, जहां श्रीरामचरित मानस के सातों कांड संगमरमर के पत्थरों पर अंकित हैं और उनकी झाकियां मौजूद हैं.

31 दिनों की रामलीला केवल वाराणसी के राम नगर में ही होती है. रावण वध के तुरंत बाद मुखौटा उतार भगवान राम का वंदन कर सीधे अपने गांव चला जाता है.

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