वट सावित्री व्रत 2019: इस दिन बन रहे हैं चार संयोग, घर-परिवार में रहेगी सुख-शांति

अमावस्या तिथि दो जून को शाम 4:39 बजे से शुरू होकर तीन जून को दिन में 3: 31 तक रहेगी

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत 3 जून को है. अमावस्या तिथि दो जून को शाम 4:39 बजे से शुरू होकर तीन जून को दिन में 3: 31 तक रहेगी. महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं. सोमवार के दिन किसी भी महीने की अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है. यह विशेष रूप से पूर्वजों के तर्पण के लिए जानी जाती है. इस दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनि मंत्र का जप करना चाहिए.

इस दिन व्रत उपवास रखकर पीपल के पेड़ के चारों ओर 108 बार परिक्रमा हुए भगवान विष्णु तथा पीपल वृक्ष को पूजा समर्पित करनी चाहिए. यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है. 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती हैं. प्रदक्षिणा करते समय 108 फल पृथक रखे जाते है. बाद में वे भगवान का भजन करने वाले ब्राह्मणों या ब्राह्मणियों में वितरित कर दिये जाते है. ऐसा करने से संतान चिरंजीवी होती है.

सोमवती अमावस्या के दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है. इसके पश्च्यात, अपनी क्षमता के अनुसार दान किया जाता है. सोमवती अमावस्या के दिन स्नान और किए गए दान का विशेष महत्त्व है. इस दिन मौन (चुप) रहना बहुत उपयोगी है. देव ऋषि व्यास जी के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहना और स्नान और दान करना हजार गायों को दान करने के समान फल देने वाला होता है.

सोमवती अमावस्या को हजारों श्रद्धालु भक्त हरिद्वार में माँ गंगा में डुबकी लगाकर स्नान करते है. इस दिन कुरुक्षेत्र के ब्रह्मा सरोवर में डुबकी लगाने से व्यक्ति का मंगल होता हैं. यह व्रत अनुष्ठान अतुलनीय फल प्रदान करें वाला है. सूर्योदय से सूर्यास्त तक, श्रद्धालुओं की भीड़ को पवित्र गंगा में स्नान करती है गंगा तट पर पवित्र गंगा आरती की गूंज सभी दिशाओं में फैलती है. इन धार्मिक कार्यों को करने से व्यक्ति की सभी कामनाएं पूरी होती हैं.

सोमवती अमावस्या व्रत कथा :  सोमवती अमावस्या के उपवास के दिन महिलाओं को व्रत की कहानी सुननी चाहिए.  सोमवती अमावस्या व्रत कथा एक धनुवार जिसके सात बेटे और एक बेटी थी की कथा है. उसने अपने सभी बेटों की शादी कर दी लेकिन, बेटी की अभी तक शादी नहीं हुई थी. एक भिक्षु उनके घर पर रोज आते थे और भिक्षा मांगते थे और बदले में, उन्हें आशीर्वाद देते थे. वह उसकी बहूओ को खुश विवाहित जीवन का आशीर्वाद देता था लेकिन उसने घर की बेटी को शादी का आशीर्वाद कभी नहीं दिया. एक बार बेटी ने अपनी मां को यह बात बताई.

अगले दिन उदास माँ ने इस बारे में भिक्षु से पूछा. साधू ने कोई जवाब नहीं दिया और चले गए. यह देखकर, माँ चिंतित हुई और माता ने पंडित को बुलाकर अपनी बेटी की कुंडली दिखाई.  उन्होंने कहा कि लड़की का भाग्य विधवा बनना लिखा है. माँ ने परेशान होकर उपाय पूछा. उसने कहा कि लड़की को सिंघल द्वीप जाना है, जहां एक धोबिन रहती है और लड़की को उस महिला से सिंदूर लेकर अपने माथे पर लगाना हैं तथा साथ में सोमवती अमावस्या का उपवास रखते हुए,अशुभ योग को हटाया जा सकता है.

यह सुनकर, मां ने अपने बेटो से बेटी के साथ जाने का अनुरोध किया. केवल सबसे छोटा बेटा जाने के लिए तैयार हुआ और घर से निकलकर दोनों समुंदर के किनारे पर पहुंच गए. उन्होंने सोचा कि यह कैसे पार करना है. वे एक पेड़ के नीचे बैठे गए जिस पर एक गिद्ध का घोंसला था. जब भी महिला गिद्ध ने बच्चे को जन्म दिया, एक सांप उसे खाने के लिए इस्तेमाल किया.

एक दिन, जब गिद्ध और उसकी पत्नी बाहर थे तो साँप आया और गिद्ध के बच्चे चिल्लाने लगे. तभी पेड़ के नीचे बैठी साहूकार की बेटी ने अपने साहस के साथ सांप को मार डाला. जब गिद्ध और उसकी पत्नी लौटे, तो वे अपने बच्चों को जीवित देखकर बहुत खुश हुए और लड़की को धोबिन के घर जाने के लिए मदद की. लड़की ने कई महीनों तक चुपचाप धोबिन महिला की चुपके से सेवा की. लड़की की सेवा से महिला प्रसन्न हुई और लड़की के माथे पर सिंदूर लगाया.

फिर, लड़की धोबिन महिला के घर को बिना पानी पिए छोड़ गई तथा रास्ते में उसने एक पीपल के पेड़ के चारों ओर घूमकर परिक्रमा की और पानी पिया. उसने पीपल के पेड़ की पूजा की और सोमवती अमावस्याका उपवास रखा. इस प्रकार उसके अशुभ योग हट गए और वह भाग्यशाली बन गयी. सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्य ग्रहण के बराबर कही गयी हैं. इनमें किया गया स्नान, दान, जप व श्राद्ध अक्षय होता है.

ज्योतिषीय विश्लेषक- डॉ श्रीपति त्रिपाठी, ज्योतिर्विद

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*