क्यों होती है विद्यार्थियों को ईयरबैक वाली स्थिति, एक ज्योतिषीय आकलन…

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लाइव सिटीज डेस्क : आज का युग विज्ञान युग, कंप्यूटर युग ऐसे कई नामों से जाना जाता है. 21वीं सदी की ओर बढ़ने वाले इस युग को भी नाम दिया जाए उसमें इंसान की तरक्की नजर आती है. शिक्षा के रास्ते पर चलकर ही तरक्की हो पाई है हम सब जानते हैं. लेकिन हर इंसान की शिक्षा सरलता से पूरी हो यह जरूरी नहीं.

कुछ बुद्धिवादी या भाग्यशाली लोग शिक्षा की कई मंजिलें सरलता से पार कर लेते हैं लेकिन कुछ कम नसीब वाले लोग शिक्षा की पहली सीढ़ी पर ही लुढ़क जाते हैं. हर किसी को नसीब अलग अलग होता है. कई उच्च शिक्षा प्राप्त मां-बाप जिद पकड़ लेते हैं कि उनके बच्चे भी उच्च शिक्षा प्राप्त हो. वह बचपन में ही बच्चा बड़ा होकर क्या करेगा या तय कर लेते हैं कि डॉक्टर बनना है या इंजीनियर.

आजकल शिक्षा जगत में चल रही प्रतियोगिता के मध्य नजर पढ़ने के लिए मां बाप बच्चे के पीछे पड़ जाते हैं. इस स्कूल के साथ ट्यूशन लगा देते हैं और इन सब उलझन में बच्चों से उनका बचपन छिन जाता है. बच्चे की बुद्धि की पहुंच कहां तक है इसके बारे में काफी कम मां बाप सोचते हैं. ज्योतिष के अनुसार चतुर्थ स्थान से शिक्षा के बारे में देखा जाता है जबकि उच्च शिक्षा पंचम स्थान से देखा जाता है.

ज्योतिष के अनुसार शिक्षा के लिए चतुर्थ पंचम नवम और लाभ इन भावों को देखा जाता है. यदि चतुर्थ भाव का उपनक्षत्र स्वामी चतुर्थ नवम या ग्यारह में से किसी भी एक स्थान का कार्यैश हो तो जातक ठीक तरह से शिक्षा पूर्ण कर लेता है. चतुर्थ का उपनक्षत्र स्वामी नवम का कार्यैश हो तो जातक की उच्च शिक्षा पूरी होती है अर्थात महादशा स्वामी चतुर्थ नवम एवं 11वीं में से किसी स्थान का कार्यैश होना भी अतिआवश्यक है.

यदि वह तृतीय पंचम और नवम स्थानों का कार्यैश है तो शिक्षा में रूकावट आना, शिक्षा खंडित होना, इस तरह की समस्याएं आती है. ऐसे समय में उच्च शिक्षा की जिद छोड़कर अन्य मार्गो की तरफ बढ़ना आवश्यक होता है. चतुर्थ का उपनक्षत्र स्वामी अगर दशम स्थान का कार्येश हो तो व्यवसायिक प्रशिक्षण लेना ठीक होता है.

आजकल विद्यार्थियों एवं माता पिता की यह जानने की इच्छा रहती है कि शिक्षा का स्तर कैसा होगा. शिक्षा लेने में कब-कब कठिनाई आ सकती है, कौन सी शाखा में शिक्षा ली जाए, क्या परीक्षा में पास होगा, क्या मनचाहे स्कूल कॉलेज या पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश मिलेगा, क्या विदेश में शिक्षा पाने का योग है तो इन सब बातों की हम चर्चा ज्योतिष के द्वारा करेंगे.

यदि चतुर्थ भाव का उपनक्षत्र स्वामी बुद्ध अथवा गुरु हो या बुद्ध अथवा गुरु के नक्षत्र में हो और चतुर्थ नवम या ग्यारह में से किसी भाव का कार्यैश सूतक सामान्यता शिक्षा का स्तर अच्छा होता है. चतुर्थ नवम ग्यारहवीं भाव का कार्यैश  ग्रहों की महादशा अंतर्दशा में जातक शिक्षा में उज्ज्वल यश प्राप्त करता है. शिक्षा लेने में कब कठिनाई आ सकती है.

यदि चतुर्थ भाव का उपनक्षत्र स्वामी तृतीय पंचम अष्टम या 12वीं में से किसी भाव का कायैश हो और शिक्षा काल में तृतीय पंचम अष्टम या 12वीं इन भावो की महादशा स्वामी कार्यैश हो तब शिक्षा में रुकावट आती है. बहुत से लोगों का यह प्रश्न है, कौन सी शिक्षा ली जाए? इसके लिए ज्योतिष में ये नियम है कि चतुर्थ भाव के उपनक्षत्र स्वामी का विवेचन करना चाहिए. चतुर्थ भाव उपनक्षत्र स्वामी कौन सी राशि तथा भाव में है या देखकर सही फलादेश किया जा सकता है.

अब प्रश्न आता है कि क्या मैं परीक्षा में पास हो जाऊंगा. इसका आकलन प्रश्न कुंडली के चतुर्थ भाव का उपनक्षत्र स्वामी यदि चतुर्थ और लाभ भाव से जुड़ा हो तो परीक्षा में सफलता मिलती है. चतुर्थ भाव का उपनक्षत्र स्वामी वक्री हो और परीक्षा के रिजल्ट के पूर्व वह मार्गी होता है तो जातक परीक्षा में पास होगा लेकिन व्यक्ति का ग्रह मार्गी होने से पहले यदि रिजल्ट आती है तो जातक के फेल होने की संभावना होती है.

चतुर्थ का उपनक्षत्र स्वामी वक्री ग्रह के नक्षत्र में हो तो जातक निश्चित रुप से फेल होता है. कई बार ज्योतिष में देखा गया है यदि द्वितीय भाव और अष्टम भाव पीड़ित हो अथवा द्वितीय भाव अथवा अष्टम भाव में शनि राहु शनि चंद्र शनि केतु का योग हो तो पढ़ाई में अच्छे होते हुए भी आकस्मिक कारणों से व्यक्ति को ईयर बैक की संभावना बनती है.

ज्योतिषाचार्य प्रशांत कुमार संपर्क सूत्र: 8100778339                ई—मेल:[email protected]

यदि गोचर में भी गुरु शनि एवं राहु की विपरीत स्थिति हो तो ईयर बैक की संभावना काफी बढ़ जाती है.

कृष्णमूर्ति ज्योतिष में भी ये नियम है. कई बार यह सवाल आता है कि क्या मैं स्पर्धात्मक परीक्षा में सफल हो पाऊंगा तो ज्योतिष के अनुसार जो परीक्षा स्पर्धात्मक हो अर्थात सबसे अधिक अंक पाने वाला पास हो उसके लिए नियम है कि छठे का उपनक्षत्र स्वामी मार्गी ग्रह के नक्षत्र में हो और छठे दशम और लाभ भाव में से किसी भाव का कार्यैश हो तो कंपटीशन में सफलता मिलती है अर्थात चतुर्थ का उपनक्षत्र स्वामी यदि तृतीय पंचम एवं अष्टम भाव का कार्यैश हो तो शिक्षा में निश्चित रूप से बाधा आती है अर्थात जब दशा स्वामी तृतीय अथवा पंचम इन भाव का कार्यैश हो तब तृतीय पंचम एवं अष्टम भावो के कायैश ग्रहों की दशा अंतर्दशा में रुकावट आती है.

इस वजह से यदि तृतीय पंचम और अष्टम स्थानों का स्वामी दोस्त ग्रहों से जुड़ा हो तो उस वक्त यदि इसकी अंतर्दशा दशा चल रही हो तो निश्चित रुप से किसी ज्योतिषी से मिलकर इन भावो में बैठे दूषित ग्रहों की दान पूजा या जप करवानी चाहिए.