बिकाऊ नगर पार्षदों के नहीं मिल रहे खरीददार

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सासाराम (राजेश कुमार) : पूर्व में अक्सर देखा जाता रहा है कि नगर पर्षद चुनाव के नतीजे आने के बाद निर्वाचित नगर पार्षदों के खरीदारों के बीच होड़ सी मच जाती थी. उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हुआ करते थे. पर इस बार ऐसा क्या हुआ जो पार्षदों की झोली भरने वाले चेयरमैन पद के उम्मीदवार का टोटा दिख रहा है. गुरुवार की शाम शहर से थोड़ी दूर स्थित बागीचा रिसोर्ट में भोज के बहाने जुटाए गए दो दर्जन नगर पार्षदों के मन की बात जानने के प्रयास हुए.

बिकने को तैयार कुछ पार्षदों को तब झटका लगा जब भोज के आयोजक ने उनके समक्ष यक्ष प्रश्न रख दिया कि पिछली बार पैसे खर्च कर नगर प्रमुख बनने वाले महीनो से जेल में है. इस बार पैसे लगाएं तो क्या गारंटी है कि इन्वेस्टमेंट निकाल लेंगे. देख नहीं रहे वो फिर जीत गया है. इन्वेस्टमेंट निकालने की कोशिश रिस्की है. हां 10- 20 तक की बात हो तो दाव लगाया जा सकता है. इस बात से 5 लाख का सपना संजोये बेचारे जनता के प्रतिनिधियों को भोज में मानो कंकड़ ही पड गया हो.

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पिछले चार टर्म से सासाराम नगर पर्षद के चेयरमैन (मुख्य पार्षद) के हुए चुनाव में बनी परिपाटी के अनुसार 40 पार्षदों वाले नगर पर्षद का शहंशाह बनने के लिए कम से कम 70 हजार से लेकर एक करोड़ का दाव लगाना पड़ा है. पिछले टर्म में शहर को चकाचौंध करने के लिए बनायी गयी योजना में ब्यापक तौर पर हुए घोटाले के उजागर होने पर कुर्सी तो गयी ही, निगरानी का केस भी दर्ज हुआ. महिला चेयरमैन समेत तीन पार्षद अभी तक जेल में चक्की पीस रहे है. जेल से कब छूटेंगे, इसकी दूर दूर तक संभावना नहीं दिख रही.

घोटाले के आरोपी पार्षदों में से एक को छोड़ कर अधिकांश पार्षदों को चुनाव में जनता ने धुल चटा दिया. बेचारे ना घर के रहे ना घाट के. घोटाले को उजागर करने वाले वार्ड न 34 से तत्कालीन पार्षद अतेन्द्र सिंह ने इस बार घोटाले के आरोपियों के तमाम प्रयास के बावजूद अपनी पत्नी सुकांति देवी को चुनाव जीता लिया. जाहिर है घोटाला कर के इन्वेस्टमेंट निकालने वाले पर अतेन्द्र का भूत सर चढ़ कर बोल रहा है.

इस बार हुए चुनाव के सामने आये नतीजों की खासियत है कि ज्यादातर मतदाताओं ने सोच समझ कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. जनता को अब लगने लगा है कि उनके पार्षद इमानदार रहे. अँधेरे में डूबे शहर में प्रकाश फैले. नाली गली ठीक रहे. समय से झाडू लगे, कचरे उठे. ऐसे में वे अपने अपने पार्षदों पर इमानदारी से स्वच्छ छवि वाले चेयरमैन चुनने का अपने पार्षदों पर दबाव बनाए हुए है.   

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