सब्जी विक्रेताओं ने डीएम के फरमान को अंगूठा दिखाया, फिर जमे सड़क पर

सासाराम (राजेश कुमार) : राजनीतिक सरपरस्ती भी अजीब चीज है. लोगों की समस्याओं पर भारी पड़ रही वोट की चाहत. सड़क पर पैदल चलने के रास्ते तलाशने पड़ते है पर ठेला, खोमचा, फाड़ी बिछा कर मुख्य सड़क पर सब्जी बेचने की मौन इजाजत मिल ही गयी. मिले भी क्यों नहीं, कुछ ख़ास तबकों के अधिपत्य के सामने प्रशासन को भी नतमस्तक होना पड़ता है. हालांकि राज्य में हुये सत्ता परिवर्तन से फिर एक बार रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम के लोगों में परेशानियों से निजात मिलने की आस जग गयी है.

सासाराम के पोस्ट ऑफिस चौराहा, रौजा रोड, कचहरी, धर्मशाला रोड शहर की धमनी माने जाते है. शाम में बाजार करना हो या फिर तफरी के लिए निकलने वालों को अक्सर सड़कों पर ठेला के जाम के नाम से सिहरन पैदा होने लगता है. हर रोज की जाम में अक्सर फंसते छोटे बड़े अधिकारियों के कान पर चार महीने पूर्व जू रेंगा था. कई बैठकें कर शहर में सब्जी वालों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर करगहर मोड़ के पास रेलवे पुल के नीचे अच्छी जगह उपलब्ध कराई गयी.

तमाम ठेला वालों का सर्वे कराकर उन्हें वहा जगह सुनिश्चित किया गया. सख्ती अपना कर उन्हें सड़कों से उस जगह पर लाया गया. पर उन्हें वह स्थान जचा नहीं. बराबर कोशिश में रहे कि सडकों पर ही जमे रहे. इसके लिए उन्होंने स्थानीय प्रतिनिधियों का दरवाजा खटखटाया. डीएम के सामने जब उनकी भी दाल नहीं गली तो उन्होंने पटना वाले अपने आका के पास गुहार लगाई.

बताया यहाँ का प्रशासन तो हमारा वोट ही बिगाड़ देगा. आका को बात जंची और तत्काल फ़ोन कर प्रशासन की ऐसी की तैसी कर दी. लाचार प्रशासन करे तो क्या. तब है कि प्रशासन के निचले स्तर के लोगों को फिर से अपना व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि का मौक़ा मिल गया. वसूली होती रही, जाम लगते रहे, शहरवासी त्रस्त होते रहे.

अब जब राज्य में सत्ता बदली है तो लोगों में फिर आस जगी है. शहर का सामाजिक चेहरा और वकील दीपक श्रीवास्तव कहते है, अब नये शासन में प्रशासनिक हस्तक्षेप की संभावनाए कम दिखती है. जाहिर है डीएम एसपी विवेक से निर्णय लिया करेंगे. लोगों की समस्यायों का हल निकालेंगे.

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