सासाराम: डाक्टरों के विरुद्ध शिकायत पर MCI का आदेश, तीन के प्रैक्टिस पर एक साल का बैन

सासाराम, राजेश कुमार : मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया के एक हालिया फैसले से डाक्टरों की मनमानी पर रोक लगने की आस जगी है. धरती के भगवान माने जाने वाले कुछ डाक्टरों के अमानुषिक किस्से आये दिन सुर्ख़ियों में रहने के बावजूद उन पर लगाम कसने के आम आवाम को कोई जरिया नजर नहीं आता था. पर रोहतास जिले के जोन्ही गाँव के एक शख्स के हौसले को सलाम करना होगा जिसने लम्बी लड़ाई लड़कर अपने पेशे के साथ खिलवाड़ करने वाले इन दूसरे भगवान का लबादा ओढ़े सासाराम के तीन डाक्टरों को उनकी करनी का फल दिला दिया. मेडिकल काउंसिल ऑफ़ बिहार के निर्णय के विरुद्ध मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया में अपील दायर कर एक वर्ष के लिए उनके लाइसेंस को निलंबित कराने में सफलता हासिल की.

मिली जानकारी के अनुसार 10 सितम्बर 2014 को सासाराम सदर अस्पताल में जोन्ही गाँव के विवेक नामक बच्चे के हुए पोस्टमार्टम की जारी रिपोर्ट से इस विवाद की शुरुआत हुयी. सदर अस्पताल में पदस्थापित तत्कालीन मेडिकल ऑफिसर डा अशोक कुमार गुप्ता, डा बी के पुष्कर व डा श्रीभगवान् सिंह की टीम ने पोस्टमार्टम किया था. रिपोर्ट में घूस लेकर ओवरराइटिंग व उसे गलत करार देते हुए मृतक के चाचा सुरेन्द्र सिंह ने न्यायालय से लेकर पुलिस प्रशासन तक डक्टरों के विरुद्ध शिकायत की. पर उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिला. तब जाकर उन्होंने मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया को अपनी शिकायत भेजी. एमसीआई ने उस पर संज्ञान लेते हुए उसे जांच के लिए अपनी बिहार शाखा के सुपुर्द कर दिया.

काउंसिल के स्टेट यूनिट ने अपनी जांच में डाक्टरों को क्लीन चिट देते हुए मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया को अपनी रिपोर्ट सौप दी. जिसकी जानकारी सुरेन्द्र सिंह को दी गयी. सुरेन्द्र सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और स्टेट यूनिट की जांच के विरुद्ध मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया में अपील दायर कर दी. लगभग दो वर्षो तक लम्वित अपील पर मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया की एथिक्स कमिटी ने कई बैठकें कर विचार किया. अंत में 25 अप्रैल 2018 को मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने अपना निर्णय दिया. निर्णय में मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने माना है कि ऐसे डाक्टरों के चलते काउन्सिल की साख गिर रही है. उनके कृत्य निंदनीय हैं. इस लिए डा अशोक कुमार गुप्ता, डा बी के पुष्कर व डा श्रीभगवान् सिंह को एमसीआई द्वारा दिए गए लाइसेंस अगले एक वर्ष तक निलंबित किये जाते हैं.

उक्त आदेश से शिकायतकर्ता सुरेन्द्र सिंह को अवगत कराया गया है. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि उन्हें विश्वास हो गया कि देर सबेर न्याय मिलता है. तब है कि उसके लिए लोगों को थोडा धैर्य रखना पड़ता है. उन्होंने लोगों को सलाह दी कि डॉक्टर की मनमानी के विरुद्ध एमसीआई में शिकायत किया जाना चाहिए.

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