भाई की सलामती को बहनों ने कूटा गोधन

घरों से खदेड़े गए “दलिदर”

आँखों की कालिख से दीर्घायु की गारंटी

सासाराम:  लक्ष्मी की पूजा कर घरो में समृद्धि की कामना करने वालों द्वारा दिवाली के एक दिन बाद ही घरों से दलिदर (दरिद्र) खदेड़ने की अरसों से चली आ रही परंपरा का आज भी निर्वाह हो रहा है. मंगलवार सुबह शहर हो या गाँव, अधिकांश घरो से पुराने सूप-खाचोली को हंसुये से पीटने की आवाज सुनाई पड़ने लगी.

बाद में टोला मुहल्ले के घरों के बच्चों की टोली ने पिटे गए सूप-खाचोली को अग्नि के हवाले कर आराम से उसकी तपनी किया. वही हंसुये को आग में रख कर कालिख बनाया और घर लाकर हर किसी के आँख में लगाया. मान्यता है कि हंसुये की कालिख से लोगों के दीर्घायु होने की गारंटी मिलती है. आज ही भैया दूज और गोवर्धन पूजा की परंपरा सदियों पुरानी परंपरा के तहत जिले में यह त्योहार हर्षौल्लास के साथ मनाया गया. ऐसी मान्यता है की इस दिन यमराज की बहन यमुना जी ने अपने यहां यमराज को तिलक करके भोजन कराया था इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है.

आज के दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगा उसकी लम्बी उम्र की कामना करती हैं. शहर की युवतियों ने गोबर से बने गोधन महाराज को लाठी से कूट कर अपने भाइयों को चना और गुड़ का प्रसाद खिलाया.  तमाम परम्पराएं भारतीय सभ्यता और संस्कृति के वाहक रहे है. जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत की समृद्धत़ा झलकती है. आज के दिन गोवर्धन पूजा की
परंपरा भी सदियों पुरानी रही है. द्वापर युग से इस पर्व को मनाने की प्रथा रही है. भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोकुलवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी अँगुलियों पर उठाकर समस्त मानव जगत का कल्याण किया था. जिसे लेकर यदुवंशी समाज और गाय-भैंस पालने वाला वर्ग इस त्योहार को विशेष उत्साह के साथ मनाता है. इस तरह के त्योहार जहां एक ओर सामाजिक समरसता को दर्शाते हैं वहीं दूसरी ओर इनसे आपसी भाईचारा और प्रेम का सन्देश भी मिलता है. क्यूंकि गोवर्धन पूजा हो या चित्रगुप्त पूजा या फिर गोधन कुटाई और दलिदर खेदाई, ये सारे कार्यक्रम सामूहिक ही मनाये जाते हैं.

ssm2

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*