शहादत को सलामी देने उमड़ा जन सैलाब, हादसे में शहीद हुआ था चेनारी का लाल

sasaram

सासाराम, राजेश कुमार: देश की आन-बान-शान के रखवाले सैनिकों की शहादत की कीमत भले ही शासन-प्रशासन में बैठे लोग ना समझें. पर लोगों को इसका भान है. यह बात शनिवार को रोहतास जिले के चेनारी थानाक्षेत्र के रामगढ़ गांव में लाये गए सेना के शहीद जवान अमित कुमार के पार्थिव शरीर के आने पर दिखा. ऐसे मौके पर शोक में डूबे परिवार तथा ग्रामीणों की शासन प्रशासन से अपेक्षा रहती है कि उनका प्रतिनिधित्व रहे. कुछ ना भी करें तो शोक संतप्त परिवार को ढाढस भी.

ये शब्द थे शहीद के पिता सेवानिवृत मेजर गंगा दयाल सिंह के जिन्हें मलाल था कि इस मौके पर न तो कोई जनप्रतिनिधि ना ही डीएम-एसपी ही आये. हालांकि सासाराम के एसडीओ अमरेंद्र कुमार व स्थानीय थानेदार पहुंचे थे. वर्ष 2002 में सेना ज्वाइन किये अमित कुमार फिलवक्त 527 AC कलिंगपोंग में लांसनायक के पद पर थे. बहरहाल कर्तव्य के निर्वहन के दौरान सिलीगुड़ी में हुए एक हादसे (पत्थर के मलवे में दबने से) में दो दिन पूर्व मौत हो गयी थी. घर में उनकी पत्नी नीतू सिंह, 10-12 वर्षीय पुत्र अभिषेक व अनमोल के अलावे पिता गंगा दयाल सिंह, माता एवं दो भाई अजीत सिंह व रंजीत सिंह है. एक भाई नेवी से जुडकर देश की सीमाओं की रक्षा में जूटा हुआ है. एक तरह से यह पूरा परिवार ही सेना को समर्पित है. तभी तो उसके वृद्ध पिता कहते है, देश के लिए शहादत देना फक्र की बात है.

अमित के शहादत की सूचना मिलते गांव मातम में डूब गया था. रिश्तेदारों और आस पास के लोगों के आने जाने का तांता लगा हुआ था. हर किसी को शव के आने का इन्तजार था. कल ही बताया गया था कि शनिवार को किसी भी वक्त पहुंच सकता है. इसे ले सुबह से ही लोगों के गांव में पहुचने का सिलसिला जारी था. 10 बजते लगभग 10 हजार लोग पहुंच चुके थे. सदोखर के वृद्ध राम इकबाल सिंह कहते है, इस इलाके में शहीद के परिवार का एक स्थान है.

देश की सेवा में गए मेजर साहब (गंगा दयाल सिंह) जितना जीवंत व्यक्ति है उससे कही बढ़ कर अमित था. जब कभी भी छुट्टियों में घर आता था तो सदोखर जरूर आता था. उसके रग-रग में देश सेवा की भावना भरी थी.

ये कहते है, शासन प्रशासन की आज इस मौके पर दिखी उदासीनता से स्पष्ट हो गया कि यहाँ की व्यवस्था संवेदनहीन है. शहीद अमित कुमार अमर रहे. जब तक सूरज चाँद रहेगा, अमित तेरा नाम रहेगा के गगनभेदी नारों के बीच उनके बड़े बेटे ने चिता को मुखाग्नि दी.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*