समस्तीपुर : अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत दुकान हटने के साथ ही बस भी रही हैं दुकानें

समस्तीपुर : शहरवासियों को जाम की समस्या से मुक्त कराने के पहले चरण में प्रशासन द्वारा पिछले दो दिनों से चलाया जा रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान लगता है इस बार भी टांय-टांय फिस्स हो कर रह जाएगा. प्रशासन का मानना है कि शहर में जाम की समस्या का सबसे मुख्य कारण सड़कों पर किया गया अतिक्रमण है. इसको लेकर गत 19 फरवरी से ही प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी पूरे लाव लश्कर के साथ सड़कों से अतिक्रमण हटाने का काम कर रहे हैं. लेकिन आश्चर्य की बात है कि सड़कों पर लगी जिन दुकानों को हटा दिया जाता है, कुछ घंटों के बाद पुनः वहीं पर फिर से दुकानें सज जाती हैं.

प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने से पूर्व यह भी आदेश जारी किया था कि हटाये गये स्थल पर अगर पुनः दुकान लगा दी जाती है तो दुकानदार को अर्थिक दंड के अलावा जेल की भी हवा खानी पड़ सकती है. लेकिन इस आदेश का कोई भी अनुपालन नहीं होता दिख रहा है. इस स्थिति को लेकर लगता है कि पुनः इस बार भी अतिक्रमण हटाओ अभियान की संभवतः औपचारिकता ही की जा रही है.

अतिक्रमण हटाओ अभियान

यहां यह बता दें कि जब तक शहर से अतिक्रमण नहीं हटेगा जाम की समस्या से शहर वासियों को कभी मुक्ति नहीं मिल सकती है. हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण स्थल से हटाये गये दुकानदार पुनः उसी स्थल पर दुकान लगाते हैं तो उनका सामान जब्त करके उन पर प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी. लेकिन पिछले दो दिनों से एक भी ऐसा मामला देखने को नहीं मिला है जिसमें किसी दुकानदार को आर्थिक दंड या उसके उपर प्राथमिकी की गयी हो.

शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत अबतक बंगाली टोला, बहादुरपुर, स्टेशन रोड, ताजपुर रोड व गोला रोड समेत आसपास की सड़कों पर यह अभियान चलाया गया. अभियान के दौरान सड़क किनारे अस्थायी दुकानों, ठेले, गुमटी व सड़क पर ही बढ़ाकर लगायी गई दुकानों व उनके प्रचार बोर्ड, बैनर आदि को जेसीबी से तोड़कर हटा दिया गया. तोड़फोड़ किए गए सभी सामानों को जब्त कर नगर परिषद के ट्रैक्टर पर रख लिया गया. इस अभियान का नेतृत्व समस्तीपुर के एसडीओ अशोक कुमार मंडल कर रहे हैं.

उनके साथ सदर डीएसपी तनवीर हसन, नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी देवेन्द्र सुमन तथा नगर थाना के अध्यक्ष चतुर्वेदी सुधीर कुमार आदि भी रहा करते हैं. यहां यह बता दें कि पिछले सप्ताह जिला प्रशासन की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी. जिसमें शहर को अतिक्रमणमुक्त कराते हुये रोज लगने वाली जाम की समस्या से भी निजात दिलाने के लिये हर संभव कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया था. लेकिन पहले चरण में ही अतिक्रमणकारियों द्वारा जिस तरह का रूख अपनाया गया है उससे लगता है कि न तो अतिक्रमण हट पायेगा और न ही जाम की समस्या से लोगों को मुक्ति ही मिल पाएगी.