जंजीरों में जकड़ी मानवता, अपने पागलपन के चलते कैद होकर जीने को विवश हैं रामबाबू

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समस्तीपुर(पदमाकर सिंह लाला): बिहार के समस्तीपुर से मानवीय संवेदना को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है. ये तस्वीर सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं पर न केवल सवाल उठा रही है बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी कठघरे में खड़ा कर रही है. जिले के सदर प्रखंड के निरपुर गांव के रामबाबू पिछले 10 सालों से जंजीर में कैद होकर जिंदगी जीने को विवश हैं. रामबाबू कापर ने कोई अपराध नहीं किया है लेकिन वक्त और कुदरत की मार ने इसे मानसिक रोगी बना दिया.

बता दें कि परिवार वाले अपनी तरफ से इलाज में सब कुछ लूटा दिए लेकिन ये ठीक नहीं हुआ. आर्थिक तंगी के कारण अब तो रामबाबू का इलाज और दवा भी बंद हो गया. रामबाबू की मां का कहना है कि पहले वो गांव में ही रहकर मजदूरी करता था. शादी के बाद फरीदाबाद चला गया. जहां वह खेती-बाड़ी का काम करता था. 10 साल पहले लौट कर आया, तो उसका व्यवहार बदलने लगा. पहले तो हम लोगों ने उसे हल्के में लिया. बाद में वो हिंसक होने लगा.

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हालांकि परिवार के लोग बताते हैं कि जंजीर खोल देने पर रामबाबू लोगों को परेशान करता है और उनके साथ मारपीट करता है. इसलिए इसे जंजीर में बांध दिया गया है. परिवार का कहना है कि रामबाबू के इलाज में सारी जमीन बिक गई. परिवार चलना भी अब मुश्किल हो रहा है. परिवार के लोग चाहते हैं कि सरकार और समाज मदद को आगे आएं ताकि परिवार की खुशियां वापस लौट सके. निरपुर गांव के ग्रामीण भी रामबाबू के इस हालत को लेकर काफी चिंतित हैं और सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं.

वहीं इस मामले पर जिला परिषद अध्यक्ष प्रेमलता से सवाल करने पर उन्होंने खुद निरपुर गांव जाकर पीड़ित परिवार से मिलने और इलाज की व्यवस्था के लिए सिविल सर्जन और स्वास्थ्य मंत्री से बातकर हर तरह के सहयोग करने का आश्वासन दिया है.

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