ऑटो चालक मिंटू ने पत्नी की बात मान ली होती तो उसके साथ 11 लोगों की बच जाती जान

समस्तीपुर/सरायरंजन : सरायरंजन थाने के जितवारपुर कुम्हिरा निवासी मिंटू चौधरी की पत्नी रुपम  रविवार को अपने पति से यह आरजू मिन्नत करती रही कि आज वह ऑटो चलाने न जाए. लेकिन उसका पति अपनी पत्नी की बात की अनदेखी करते हुये अपने ऑटो को अन्य दिनों की भांति भाड़े पर चलाने के लिये निकल पड़ा. इसी को कहते है होनी. अगर पत्नी की बात मिंटू मान लिया होता तो उसके साथ ग्यारह लोगों की जान नहीं जाती.

सदमा में लोग

मिंटू के घर से निकलने के समय भी उसकी पत्नी रूपम यह कहती रही कि पता नहीं किसी अनहोनी की घटना से वह डर गयी है. लेकिन वह पत्नी को डांटते हुये अपने ऑटो लेकर पैसा कमाने निकल पड़ा. नियति को तो कुछ और ही मंजूर था. मिंटू की पत्नी को जब यह सूचना मिली की ट्रक से टकराने के कारण उसके पति समेत कुल ग्यारह लोग मौत के मुंह में चले गये हैं तो वह दहाड़ मारकर रोने लगी.

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मिंटू के 9 साल के पुत्र बिट्टू व 7 साल की बेटी रिया भी पिता की मौत की सूचना से अचंभित होकर मां को रोते देख दोनों रोने लगे. आज दिन भर मिंटू के घर पर सांत्वना देने वाले लोगों की भीड़ लगी रही. बच्चों की पथरायी आंखें आज भी अपने पापा को तलाश कर रही हैं. इनकी सिसकियों का अहसास लोगों को होने के साथ-साथ इन सबों का भविष्य भी अंधेरा होने लगा है.

मिंटू पहले दूसरे का ऑटो चलाकर परिवार का भरण पोषण करता था. मगर बेहतर जिंदगी का सपना व घर के लोंगों ने उसे महाजन से कर्ज लेकर छह माह पूर्व ऑटो खरीदवा दिया. इस कर्ज की राशि भी अभी तक वह नहीं चुका पाया था. इसी बीच वह दुर्घटना का शिकार हो गया.

97 वर्षीय पिता लक्ष्मी चौधरी व 90 वर्षीय मां कमली चौधरी को बेटे का कंधा नसीब न हो सका. वहीं रुपम अपने पति के खोने के गम में कल से ही बेसुध पड़ी है. होश आते ही उसकी चीत्कार से लोग भी सिहर उठते हैं. मिंटू के 9 वर्षीय पुत्र बिट्टु ने सोमवार को अपने पिता को मुखाग्नि दी.

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कैंसर पीड़ित नंदोसी को देखने गयी थी पार्वती
इधर, इस घटना में मौत के शिकार हुये मुसरीघरारी थाना के लाटवसेपुरा के वार्ड संख्या 7 निवासी भुट्टू साह की पत्नी पार्वती देवी रविवार की सुबह कैंसर से पीड़ित इलाज करा रहे अपने नंदोसी को देखने समस्तीपुर गयी हुई थी. मगर रात में उसकी लाश घर पहुंची. नंदोसी कैंसर से पीड़ित है. पार्वती देवी 10 दिनों के बाद अपने नये घर का घरवास करना था. मगर इसकी ख्वाहिश अधूरी रह गयी. पार्वती देवी के घर में पति भुट्टू साह व दो पुत्र संजय व अजय व पुत्री रंजू और संजू मां के आने का इंतजार करती रह गयी. घर नहीं पहुंचने पर जब खोजबीन की तो उसे दुर्घटना की जानकारी मिली. गांव में ही रहकर पति, बेटे के साथ खेती बारी कर परिवार को भरण पोषण होता थी. दाह संस्कार के लिये पार्वती देवी को सिमरिया ले जाया गया है. पार्वती के पति भुट्टू साह व उसके बच्चों की चीख सुनकर आसपास के लोगों की भी आंखे नम हो जा रही थी. गांव में इस घटना को लेकर मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. मौके पर स्थानीय मुखिया रंजीत महतो ने मृतक के परिजन से मिलकर शोक संवेदना प्रकट की है.

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बीमार नाती का इलाज कराने गयी थी समस्तीपुर विमल
इधर, सरायरंजन थाना के हरसिंगपुर टारा निवासी राम भरोस राय की पत्नी विमल देवी अपने 4 माह के नाती अर्थ का इलाज कराने 3 दिन पूर्व समस्तीपुर गयी थी. सर्दी, जुकाम से पीड़ित बच्चे के साथ उसकी मां संगीता देवी भी साथ थी. रविवार को तबियत ठीक होने के बाद ससुराल अंगारघाट जाने की जगह संगीता अपनी मां विमल देवी के साथ अपने पीहर जाकर परिजनों से एक बार भेंट करना चाहती थी. मगर इसका सपना अधूरा ही रह गया. घटना में एक साथ तीन लोगों की मौत से परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं. विमल देवी के 85 वर्षीय ससुर बिंदेश्वरी राय बताते हैं कि उनकी देखभाल पतोहू विमल देवी करती थी. शरीर से लाचार होने के कारण पतोहू ही उसका सहारा थी. यह कहकर वे फफक-फफक कर रो पड़ती हैं. विमल देवी को दो पुत्र पप्पू (20) रविरंजन (12) समेेत 5 पांच पुत्री जिसमें सबसे बड़ी संगीता देवी थी. पति रामाशीष राय गांव में ही रहकर खेती बारी का काम करता है.

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