भारत का इकलौता ऐसा विश्वविद्यालय जो कृषि-व्यवसाय में एमबीए की डिग्री करता है प्रदान

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क:  बिहार के समस्तीपूर जिला के पूसा स्थित डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भारत का इकलौता ऐसा विश्वविद्यालय है जो कृषि-व्यवसाय में एमबीए की डिग्री प्रदान करता है. राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त यह विश्वविद्यालय जिला मुख्यालय से 21 किलोमीटर की दूरी पर पूसा बाजार के निकट स्थित है.  देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज पूसा विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में शामिल हुए.

इसके बाद से इस विश्वविद्यालय को लेकर काफी चर्चाएं शुरु हो गई हैं. यह भारत के 26 कृषि विश्वविद्यालयों में से एक है. 2014 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय हुआ और 2016 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा भी प्राप्त हो गया. इस विश्वविद्यालय में पांच संकाय हैं. इसमें कृषि, पशुचिकित्सा, कृषि इंजीनियरी, मूलभूत विज्ञान तथा मानविकी एवं गृह विज्ञान शामिल है.

इस विश्वविद्यालय में 6 पूर्व-स्नातक पाठ्यक्रम, 33 परा-स्नातक कार्यक्रम और 18 पीएचडी कार्यक्रम संचालित होता है. इस विश्वविद्यालय के बारे में यह कहा जाता है कि भारत का यह इकलौता ऐसा विश्वविद्यालय है जो कृषि-व्यवसाय में एमबीए की डिग्री प्रदान करता है. इसके अलावा कृषि महाविद्यालय, मत्सय महाविद्यालय और दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय भी हैं.

इस विश्वविद्यालय की कृषि विश्वविद्यालयों की श्रेणी में अपनी एक अलग पहचान है. 2016 में इसके कुलपति डॉ. आर सी श्रीवास्तव ने कहा था कि अब यहां से देश को अच्छे वैज्ञानिक और शिक्षक मिलेंगे. उन्होंने इसके नाम भी बदले जाने पर खुशी जताई थी. इससे पहले इस विश्वविद्यालय का नाम सिर्फ राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय था. लेकिन केंद्र सरकार ने अब इसका नाम बदलकर डॉ. राजेंद्र केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय कर दिया है.

इस विश्वविद्यालय को ब्रिटिश काल में 1903 में स्थापित किया गया था. मूल रूप से यह संस्थान ‘इम्पीरियल कृषि अनुसंधान संस्थान’ के नाम से जाना जाता था. 1934 में बिहार में भयकंर भूकंप आया था. जिससे इस संस्थान के मुख्य भवनों को काफी क्षति हुई थी. बाद में इस संस्थान को नई दिल्ली ट्रांस्फर कर दिया गया और इसे ‘पूसा कैंपस’ कहा जाने लगा.

बाकी शेष बची हुई सामानों को समस्तीपुर के पूसा में स्थानांतरित कर दिया गया. 1970 में भारत सरकार ने इसका नाम बदलकर राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय कर दिया. इसके बाद भारत सरकार ने इस विश्वविद्यालय के लिए राज्यसभा से विश्वविद्यालय को दर्जा देने संबंधी बिल पास कराकर केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया.