शेखपुरा में हरोहड़ नदी गाद सफाई की असलियत का हुआ भंडाफोड़

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शेखपुरा (ललन कुमार) : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नदियों की गाद सफाई योजना के सपनों पर ग्रहण लगता दिख रहा है. बिहार सरकार की नदियों की गाद सफाई योजना में करोड़ो का चूना एजेंसी द्वारा लगाया जा रहा है. इसके असलियत की बानगी शेखपुरा जिला के घाटकुसुम्भा स्थित हरोहड़ नदी में हो रहे गाद सफाई को लेकर देखा जा सकता है. गाद सफाई में बड़े पैमाने पर नियमो की अनदेखी कर केवल नदियों के किनारे स्लोप पर स्थित घास को जेसीबी मशीन से छीलकर और उसकी मिट्टी को चारों तरफ किनारे पर फैलाकर खाना पूर्ति की जा रही है. जिससे घाटकुसुम्भा के ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है. ग्रामीणों में जदयू दलित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मनोज राम ने कहा कि घाटकुसुम्भा गांव स्थित हरोहड़ नदी की गाद सफाई के लिए जल संसाधन विभाग ने करोड़ों का ठीका एजेंसी को दे रखा है.

लेकिन जमीनी हकीकत कोई भी पदाधिकारी यहां आकर देख लें कि यहां किस प्रकार नदी में गाद की सफाई हो रही है. गाद सफाई के नाम पर जेसीबी मशीन से नदी के किनारे स्थित मिट्टी की कटाई कर केवल स्लोप बनाया जा रहा है. गाद सफाई के नाम पर केवल नदी के किनारे की मिट्टी को छीलकर खाना पूर्ति की जा रही है. सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है. वहीं कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिव शंकर महतो ने कहा कि हरोहड़ नदी में गाद सफाई के नाम पर केवल खाना पूर्ति हो रही है. सरकार की जो मंशा है वह यहां पूरा नहीं हो रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पीएम मोदी से मिलकर बक्सर से लेकर फरक्का तक गंगा की गाद सफाई की बात उठाते हैं ताकि गंगा की अविरल धारा बहती रहे.

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पीएम मोदी ने भी नीतीश जी को 10 जून से पहले इसकी जांच कर कार्रवाई का आश्वासन भी दिए है. उन्होंने कहा कि यदि इस तरह से केवल खानापूर्ति कर गाद सफाई हुई तो सरकार की मंशा पर ग्रहण लग जायेगा. इसलिये सरकर से उन्होंने मांग की है कि इस कार्य मे केवल खानापूर्ति करने वाले ठीकेदार पर कार्रवाई की जाये. वहीं इस मामले में कार्य इंचार्ज सोनू ने बताया कि हरोहड़ नदी में गाद निकासी का कार्य देहरी ऑन सोन की हॉल हॉक कम्पनी कार्य कर रही है. गाद निकालने का इसका कार्य एरिया 40 किमी का है.

उन्होंने कहा कि हरोहड़ नदी में पहले से सड़क निर्माण कम्पनी मिट्टी खुदाई कर वहां की मिट्टी को सड़क निर्माण में लगा रखा है. ऐसे हालात में जहां तहां स्थित मिट्टी का स्लोप ही बनाया जा रहा है. इधर गाद सफाई में लगे झारखंड निवासी जेसीबी चालक केदार यादव ने कहा कि 15 मीटर चौड़ा 1.5 मीटर गहरा सफाई करनी है. लेकिन पानी नदी में रहने के चलते मशीन वहां नहीं ले जाया जा सकता है. इसलिए वे केवल स्लोपिंग का कार्य कर रहे हैं. इस तरह से देखा जाये तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नदियों की गाद सफाई के लिए सपनों के जो पंख लगे है उसे एजेंसी द्वारा कतर दिया जा रहा है.

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