शेखपुरा: आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका का एक दिवसीय धरना, कहा- 3000 में दम नहीं, 18000 से कम नहीं

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शेखपुरा(ललन कुमार): जिले के आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका ने सेविका-सहायिका कर्मचारी  यूनियन के बैनर तले अपने विभिन्न मांगों को लेकर जिला समाहरणालय के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया. धरना का नेतृत्व जिला आंगनबाड़ी यूनियन के अध्यक्ष कमला सिन्हा ने किया. मौके पर श्रीमती सिन्हा ने कहा कि सेविकाओं को जो मानदेय दिया जा रहा है. वह न्यूनतम मजदूरी से भी कम है. सरकारी काम भी सेविका से चूस कर लिया जाता है.

कभी सेविका को बीएलओ में लगा दिया जाता है. कभी सेविका को अहले सुबह रोको-टोको अभियान में लगा दिया जाता है. एक तो सरकार काम भी लेती है लेकिन मजदूरी भी कम देती है. इसलिए उन्होंने ने कहा 3000 रु में दम नहीं 18000रु से कम नहीं.

मंहगाई के जमाने में सरकार मात्र 3000 रु मानदेय के तौर प्रतिमाह देती है. इस महंगाई के जमाने में 3000 रु से न तो परिवार चलेगा और न ही बच्चों की पढ़ाई लिखाई होगी. उन्होंने कहा इतना ही नहीं कई महीनों से  तो सरकार मानदेय भी नहीं दे रही है. ओडीएफ में  रोको-टोको अभियान में उन्हें जब देर शाम में लगाया जाता है तो उन्हें रात्रि में घर वापस जाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा वाहन भी उपलध नहीं कराया जाता है. जरा सोंच सकते हैं रात्रि में रोको-टोको अभियान में लगाते है तो उसकी सुरक्षा को लेकर कितना रिस्क है.

केवल अभियान में लगाने से नहीं होता है. उसे पूर्ण सुरक्षा भी तो दिया जाना चाहिए. कभी कभी तो सेविका को रोको-टोको अभियान के दौरान खुले में शौच  को जा रही महिलाओं से झंझट भी हो जाती है. शौच को जाती महिलाएं विरोध भी करती हैं. कहती है कि उसके घर में शौचालय नहीं है तो क्या करें, कहां जाएं. आपके घर में चले जाएं. कर्मचारी घुस में रुपया मांगता है तब शौचालय बनेगा. उसके पास घुस देने के लिए रु नहीं है. इसलिए वह खुले में शौच को जाती है.

वहीँ कमला ने कहा कि उनकी मांगें है- सरकार सेविका सहायिका को सरकारी कर्मी घोषित करें. सरकारी कर्मी नहीं घोषित करने पर 18000 रु मानदेय के रूप में दे. सेवानिवृति के बाद पेंशन दें, समेत अन्य मांगे शामिल है. इस मौके पर संघ के सचिव सुनीता कुमारी, सेविका हीरा कुमारी, मीरा कुमारी, इंद्रा कुमारी समेत दर्जनों सेविकाएं शामिल थीं.

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