शेखपुरा में शहरी जलापूर्ति योजना फ्लॉप, डीएम के निर्देशों को इंजीनियर ने नकारा

शेखपुरा (ललन कुमार): बिहार के शेखपुरा में शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल निर्बाध रूप से मिलता रहे इसके लिए तत्कालीन सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 28 करोड़ रुपये की सरकारी राशि से शहरी जलापूर्ति योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में 6 जलमीनार बनवाए. शहरवासियों को बड़ी उम्मीद जगी थी कि उन्हें अब पेयजल इन्हीं जलमीनारों से 24 घंटे मिलता रहेगा. पानी के लिए लोगों को अब इधर—उधर भटकना नहीं पड़ेगा. इस आशा से अधिकांश लोग अपने अपने घरों में नलों का कनेक्शन भी ले लिए. लेकिन वैसा नहीं हो पाया. जगह—जगह नल स्टैंड पोस्ट भी बना दिये गए कि जो लोग नल कनेक्शन नहीं ले सकेंगे, वे इस स्टैंड पोस्ट से पानी ले सकेंगे.
शहर में अनियमित रूप से जलापूर्ति होने के कारण यह योजना जिले में फ्लाप साबित हो रही है. शहर वासियों को सुबह-शाम नियमित रूप से नलों में पानी नहीं आने से आक्रोश बढ़ता दिख रहा है. खासकर अहियापुर, लालबाग, चकदिवान, बुधौली समेत अन्य मोहल्ले के लोंगो ने बताया कि सर्किट हाउस पंप हाउस से उनके मोहल्ले के नलों में पेयजल की आपूर्ति की जाती है. इस पंप हाउस से 2008 से अबतक सही से पानी नहीं मिला है. यदि किसी दिन पानी 10-20 मिनट तक सुबह में आ गया तो शाम में पानी उन नल स्टैंडों में आएगा या नहीं यह कह पाना मुश्किल है. पानी कभी—कभार नल स्टैंडों में यदि आ भी जाता है तो फोर्स की कमी के चलते घर में मौजूद नलों में पानी नहीं पहुंच पाता है. मोहल्लेवासियों में कई लोंगों ने बताया कि नल स्टैंडों में पानी नहीं आने पर सड़क जाम कर आंदोलन भी किया गया. अधिकारियों से शिकायत की तो 2-4 दिन के लिए नल स्टैंडों में कुछ देर के लिए पानी एपलब्ध करा दिया गया फिर वही हाल.
sheikhpura
अनियमित जलापूर्ति से फिर से जारी जारी रहती है. इस संबंध में डीएम दिनेश कुमार द्वारा कई बार समीक्षा बैठक में शहर वासियों को सुबह शाम 2 घंटे निर्बाध रूप से नल स्टैंडों में पानी देने का निर्देश पीएचईडी के एक्सक्यूटिव को दिया गया, लेकिन डीएम के निर्देशों को पीएचईडी एक्सक्यूटिव द्वारा बस एक या दो दिन ही पालन किया गया. लेकिन, फिर उसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाता रहा है. ऐसे हालात में शहरवासियों को 28 करोड़ रुपये की इस शहरी जलापूर्ति योजना से 24 घंटे निर्बाध रूप से पानी मिल पाना दिन में सपने देखने जैसा लग रहा है.
इस बाबत पीएचईडी के एक्सक्यूटिव से पूछे जाने पर बताया गया कि अब नलों में पानी नहीं पर नगर परिषद के कार्यपालक से बात कर इसकी शिकायत की जाय जबकि डीएम ने उन्हें निर्देश दिया है कि तकनीकी सहयोग पीएचईडी द्वारा दिया जाएगा और वित्तीय सहयोग नगर परिषद का रहेगा. अब देखना यह है कि शहर वासियों को इस योजना से पानी मिल पाएगा या नहीं. इसके लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों पर सरकार क्या कार्रवाई कर पाती है, यह भी गौर करने वाली बात होगी.

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