मिड डे मिल पर हेडमास्टर का बड़ा खुलासा, कुछ यूं लगाया जा रहा है सरकार को चूना

शेखपुरा: बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे मिल योजना में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है. खुलासा हेडमास्टरों ने ही किया है. उनकी मानें तो सरकार को हर महीने एमडीएम के जरिये करोड़ों रूपये का चूना लगाया जा रहा है. इस बाबत भोजडीह मध्य विद्यालय में कार्यरत हेडमास्टर अशोक कुमार ने कहा कि मिड डे मिल के लिए सरकार जो चावल आपूर्ति करती है उसकी दर 32.32 रुपये प्रति किलो है लेकिन स्कूलों में वास्तव में जो चावल आपूर्ति की जा रही है वह बेहद घटिया है और बाजार में 15-16 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध है.
इस तरह से बिहार में सरकार द्वारा जितनी चावल की आपूर्ति की जाती है, बाजार दर से अगर उसकी कीमत निकाली जाए और एफसीआई से जो चावल की आपूर्ति की जा रही है बाजार दर से अगर उसका वास्तविक हिसाब निकाला जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि चावल सप्लायर कंपनी द्वारा सरकार को हर महीने करोड़ों रूपये का चूना लगाया जा रहा है. एचएम अशोक कुमार ने कहा कि एमडीएम में जब रिकवरी होती है तो पदाधिकारी 32.32 रुपये की दर से रिकवरी करते हैं. बस इस आंकड़े पर ही अगर गौर किया जाए तो पता चल जाएगा कि एमडीएम में घटिया गुणवत्ता वाले चावल को सप्लाय कर सप्लायर्स कितना घपला कर रहे हैं. इतना ही नहीं कभी—कभी तो ऐसे चावल की सप्लाय कर दी जाती है कि एमडीएम बनाना भी मुश्किल होता है. यदि ऐसे चावल से एमडीएम नहीं बनाई जाए तो जिला प्रशासन का उन पर खौफ पसरा रहता है. वहीं इस मामले में एमडीएम के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि जिले के 477 स्कूलों में एमडीएम संचालित है. हर महीने 477 स्कूलों में एमडीएम संचालन के लिए 1200-1300 क्विंटल चावल की आपूर्ति की जाती है.
सरकारी रेट पर जब रिकवरी की जाती है तो 32.32 रुपये प्रति किलो की दर से हिसाब होता है लेकिन जब एफसीआई को भुगतान किया जाता है तो उसका रेट 5.70 रुपए प्रति किलो के हिसाब से होता है. इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता-सह-समता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि मिड डे मिल में सरकारी चावल का रेट 32.32 रुपये प्रति किलो है तो 32.32 रूपये प्रति किलो वाला चावल ही सरकारी स्कूलों में मिलना चाहिए. लेकिन ऐसा होता नहीं है. स्कूलों में बच्चों को खिलाने वाला चावल एफसीआई का चावल होता है जो बाजार में 10 -15 रूपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध है. यह प्राय: सड़ा व कीड़ा लगा चावल होता है जिसे जानवर भी खाने से हिचकें. उसे स्कूल में पढ़ने वाले हमारे बच्चों को खिलाया जा रहा है जो हमारे देश के भविष्य हैं. देश में चावल आपूर्ति के नाम पर लाखों—करोड़ों रूपये का घोटाला हो रहा है. सरकार को इसकी अवश्य जांच करानी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए.

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