अनौपचारिक शिक्षा के कर्मियों का समायोजन किया जाना है, निदेशालय में नाम भेजने के लिए देने पड़ रहे हैं 40 हजार रूपये

शेखपुरा: पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर अनौपचारिक शिक्षा व विशेष शिक्षा कर्मियों का शिक्षा विभाग के चतुर्थवर्गीय श्रेणी में किए जा रहे समायोजन की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. शेखपुरा में 113 अनौपचारिक शिक्षा के कर्मियों में अभी तक मात्र 41 अनौपचारिक कर्मियों की सूची और फोल्डर जन शिक्षा निदेशालय को भेजा गया है जबकि अन्य लोगों का समायोजन नहीं किया जा सका है.
समायोजन से वंचित हुए अनौपचारिक कर्मियों में वीरेंद्र प्रसाद, रामाधीन ठाकुर, सत्येंद्र कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि उनलोंगों ने सीडब्ल्यूजेसी 1993/16 पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया था जिसपर पटना हाईकोर्ट ने सरकार को अनौपचारिक शिक्षा के कर्मियों को समायोजन करने का निर्देश दिया है लेकिन शेखपुरा जिला में समायोजन करने में बड़े पैमाने पर अनियमितता हो रही है. सूची में नाम व फोल्डर भेजने के एवज में डीपीओ द्वारा 40-40 हजार रुपये की राशि की अवैध वसूली की जा रही है. जो जमा कर रहा है या कर दिया है उसका नाम व फोल्डर निदेशालय भेजकर समायोजन कर लिया गया है. जो इस राशि का अवैध भुगतान करने में अक्षम रहे उनका न तो सूची में नाम भेजा गया है और न ही उनका फोल्डर भेजा गया है.
अभ्यर्थियों से फोल्डर को 4 सेटों में जमा कराया गया था. जमा फोल्डर में भी दोहन के लिए छेड़छाड़ किया गया है. अनौपचारिक शिक्षाकर्मी रामाधीन ठाकुर ने आरोप लगाते हुए कहा कि डीपीओ के बहनोई शेखपुरा के गगौर गांव के ही रहने वाले हैं उनके द्वारा ही अनौपचारिक कर्मियों से अवैध वसूली करवाई गई है. उन्होंने कहा कि जन शिक्षा निदेशक पटना द्वारा गठित कमिटि ने शेखपुरा से 113 में मात्र 41 लोगों की सूची ही भेजी है. उसमें भी जहां- तहां से नाम की सूची भेजी गयी है. साफ जाहिर है कि जिसने भी चढ़ावा चढ़ाया उसका पहले समायोजन कर लिया गया और जिसने चढ़ावा  नहीं चढाया उसे यूं ही छोड़ दिया गया. बड़े पैमाने पर समायोजन में गड़बड़ी की जा रही है. वहीं इस मामले में डीईओ मो. तकिउद्दीन और डीपीओ से फोन सम्पर्क किये जाने पर संपर्क नहीं हो पाने से उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*