शेखपूरा: बिहार सरकार के खुले में शौच मुक्त का खुला पोल, सिर्फ कागज़ तक ही सिमट कर रह गया अभियान

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शेखपुरा (ललन कुमार): बिहार सरकार के खुले में शौच मुक्ति अभियान का शेखपुरा जिला के कटारी गांव निवासी एक सामाजिक कार्यकर्ता उमेश प्रसाद सिंह ने पोल खोल कर रख दिया है. सामाजिक कार्यकर्ता उमेश ने कहा कि शेखपुरा में खुले में शौच मुक्ति अभियान केवल कागज पर चल रहा है.

इस अभियान के तहत सरकार के सरकारी राशि को केवल लूटा जा रहा हैं. हर घर में शौचालय बना या नहीं इसकी घर घर जांच किये बिना ही गांव व पंचायत को सरकारी पदाधिकारी खुले में शौच मुक्त घोषित करते फिर रहे हैं. ये सरकारी पदाधिकारी व कर्मी खुले में शौच मुक्ति अभियान के नाम पर सरकार को चुना लगा रहे है. उन्होंने कहा घटकुसुम्भा प्रखंड के गगौर पंचायत सरकारी स्तर पर खुले में शौच मुक्त घोषित हो चुका है.

खुले में शौच मुक्त हो जाने का मतलब है कि वहां हर घर में शौचालय बन गया है. अब खुले में शौच कोई नहीं जाएगा. लेकिन ठीक इसका उल्टा है. शौचालय हर घर में बना नहीं और खुले में शौच जाने से रोकिएगा और टोकिएगा तो जनता तो विद्रोह करेगी ही.

उन्होंने कहा कि कल सोमवार को वे अहले सुबह बाइक से   बड़हिया से अपने गांव कटारी आ रहे थे.  तभी वे  5 बजे सुबह गगौर गांव पहुंचने पर देखा कि 15 -20 आदमी जो गरीब परिवार से दिखा वे लोटा लेकर खुले में सड़क के किनारे शौच कर रहे हैं. उनके शौच स्थल  से कुछ दूरी पर वे खड़े होकर कुछ देर रुक गए. एक दो आदमी जब शौच कर लौट रहे थे तो उन्होंने उससे पूछा कि उसका गांव तो खुले में शौच मुक्त हो चुका है तो बाहर में शौच जाने की क्या जरूरत है. शौच कर लौटने वाले व्यक्ति ने सामाजिक कार्यकर्ता से कहा कि शौचालय बनावे लगी 2000 रु मांगो हखिन हम कहां से देवै इसिलए उनकर शौचालय नै बनले.

वहीं सरकारी सूत्रों ने शेखपुरा ब्लॉक में  खुले में शौच मुक्ति अभियान के तहत चले रोको टोको अभियान में पोल खोलते हुए कहा कि तीन दिन रात्रि विश्राम में रोको टोको में तीन लाख खर्चा किया गया. यह अभियान 6 नम्बर से तीन दिन तक चला था. उन्हें निर्देश दिया गया था रात्रि में यह काम करना है और दिन में अपना ऑफिस का काम करना है.

सूत्रों ने कहा कि इस अभियान में सरकार को अच्छे से चुना लगया जा रहा है. वहीं गगौर पंचायत के मुखिया से ओडीएफ के बारे प्रतिक्रिया जाननी चाही तो मोबाइल सम्पर्क नहीं हो पाने से उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई.

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