हिंसा की शिकार हुई मासूम सरस्वती को इंसाफ नहीं मिला, भारत में अमेरिकी कोर्ट ने कर दिया फैसला

मासूम हत्या मामले में दत्तक पिता को अमेरिकी कोर्ट ने दी उम्र कैद की सजा,मदर टेरेसा अनाथ आश्रम से 2016 में लिया था बच्ची को गोद

लाइव सिटीज, नालंदा(संतोष कुमार) : अमेरिका के हॉस्टन शहर में रह रहे केरल निवासी वेस्ले मैथ्यूज और उनकी पत्नी सीनी ने नालंदा के मदर टेरेसा अनाथ आश्रम से 13 जुलाई 2016 को सरस्वती नामक बच्ची को गोद लिया था. 07 अक्टूबर 2017 को दत्तक पिता ने दूध नहीं पीने के कारण बच्ची को घर से निकाल दिया था.

इसके बाद 24 अक्टूबर को बच्ची की लाश मिली बाद में बच्ची का क्षत-विक्षत लाश मिला था इस मामले को लेकर  भारत में काफी हो हंगामा शुरू हुआ था. खासकर नालंदा में गोद देने के तौर तरीके पर प्रश्न उठाया गया था. नालंदा के तत्कालीन जिलाधिकारी डॉक्टर त्यागराजन ने गोद देने के मामले की जांच शुरू करवाई थी. इस जांच रिपोर्ट का क्या हुआ किसी को पता नहीं.

गोद देने के दौरान उपस्थित तत्कालीन नालंदा के एसपी कुमार अशीष ने चुप्पी साध ली थी अमेरिकी कोर्ट ने सरस्वती के हत्या के मामले में इंसाफ कर दिया अमेरिकी मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार बुधवार को भारतवासी  वेस्ले मैथ्यूज को बच्ची के हत्या का दोषी करार देते हुए, उन्हें डलास कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. 30 साल सजा काटने के बाद भी उन्हें पैरोल मिल सकती है.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह जानलेवा हिंसा 

अमेरिकी मीडिया के अनुसार पुलिस के मुताबिक, वेस्ले ने 7 अक्टूबर 2017 की रात को दूध नहीं पीने की वजह से सरस्वती को घर से निकाल दिया था. 15 दिन बाद बच्ची की लाश डलास के उपनगर रिचर्ड्सन में एक पुलिया के नीचे मिली थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह जानलेवा हिंसा बताई गई. डलास काउंटी कोर्ट में मामला दर्ज किया गया था.

आरोपी ने बदला था बयान

39 साल के वेस्ले ने पुलिस के सामने अपना बयान भी बदला था. उसने कहा था कि वह बच्ची को जबरन दूध पिला रहा था, तभी उसकी दम घुटने से मौत हो गई. इसके बाद वह काफी डर गया और उसने बच्ची के शव को एक बैग में रखकर घर के पास पुलिया पर फेंक दिया था. इस बयान पर कोर्ट ने कहा था कि मैथ्यूज झूठ बोल रहा है. दूध पीते समय दम घुटने से मौत नामुमकिन है. सरस्वती का शव मिलने के बाद वेस्ले और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया था. बाद में उसकी पत्नी के खिलाफ कोई सबूत न मिलने पर रिहा कर दिया गया. उनकी एक सगी बेटी भी है. बच्ची के शव को कीड़ों ने खा लिया था.

अनाथालय के तत्कालीन अध्यक्ष ने कहा मिले फांसी 

अनाथालय के तत्कालीन अध्यक्ष अमीत पासवान ने बताया कि आरोपी को सजा देने के लिए अमेरिकी सरकार बधाई के पात्र है. ऐसे लोगों को उम्र कैद नहीं, फांसी की सजा मिलनी चाहिए. एक सगी बेटी के होते हुए एनआरआई ने नौकरानी बनाने के लिए अनाथ सरस्वती को गोद लिया था.

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