शेखपुरा : खुले में शौच जाने वालों पर रहेगी समिति की नजर, कार्यशाला लगा दिया गया निर्देश

घर- घर में शौचालय निर्माण होने के बावजूद खुले में शौच जाने वालों को अपनी इस आदत को बदलना होगा

लाइव सिटीज, शेखपुरा(नीतीश कुमार) : घर- घर में शौचालय निर्माण होने के बावजूद खुले में शौच जाने वालों को अपनी इस आदत को बदलना होगा. खुले में शौच जाने पर अब पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है. ऐसे लोगों पर समिति का पहरा रहेगा. समिति के लोग खुले में शौच जाने वाले महिला-पुरुषों को जागरूक करेंगे. इसके लिए गांवों में पूर्व से गठित निगरानी समितियों का पुनर्गठन कर उन्हें क्रियाशील बनाया जा रहा है.

इसके लिए शुक्रवार को शेखपुरा जिले के घाटकुसुम्भा प्रखंड परिसर में लोहिया स्वच्छता अभियान एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौचमुक्त एवं कचरा प्रबंधन के लिए स्थायित्व बनाए रखने के लिए घाटकुसुम्भा प्रखंड के सभी पंचायत प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों का एक कार्यशाला आयोजित किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता बीडीओ मिथलेश कुमार ने की. कार्यशाला में सरकार की महत्वपूर्ण एवं जनहित में चलाए जा रहे लोहिया स्वच्छता अभियान को धरातल पर सफल बनाने की जरुरतों पर जोर दिया गया.

कार्यशाला में पहुंचे अधिकारियों ने लोगों का कहा कि स्वस्थ समाज एवं स्वच्छ वातावरण का निर्माण हेतु आस पड़ोस की सफाई, खुले में शौच ना करने, शौच के लिए शौचालय का नियमित उपयोग करने, घरों में शौचालय का निर्माण करवाने, पानी को छानकर एवं गर्म कर पीने, खाने की चीजों एवं पानी को हमेशा ढककर रखने की सलाह दी है.

9 हजार शौचालयों का हुआ है निर्माण

बताया जाता है कि लोहिया स्वच्छता अभियान एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत पूरे प्रखंड में करीब 9 हजार शौचालय का निर्माण कराया गया है. शौचालयों का निर्माण कराने के साथ ही लोगों को इसका उपयोग करने और खुले में शौच नहीं जाने के लिए प्रेरित भी किया जाता रहा है. लोगों के व्यवहार परिवर्तन को ले कई तरह के कार्यक्रम भी हुए हैं. इसके बाद भी लोगों का खुले में शौच जाना जारी है.

एक साल पूर्व ओडीएफ घोषित हुआ है प्रखंड बता दें कि 31 जूलाई 2018 को जिला को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया है. प्रखंड को ओडीएफ घोषित हुए लगभग एक साल होने को है, लेकिन जमीनी सच्चाई इसके विपरीत है. धरातल पर आज भी प्रखंड पूर्णरूपेण ओडीएफ नहीं हो पाया है. शौचालय निर्माण होने के बाद भी काफी लोग उसका उपयोग करने के बजाय खुले में ही शौच जा रहे हैं.

लोगों का कहना है कि घर-घर में शौचालय का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं की जा सकी है. खासकर अभी गर्मी में हर जगह जल संकट व्याप्त है. लोग मुश्किल से प्यास बुझाने के लिए पानी का जुगाड़ कर पा रहे हैं. ऐसी स्थिति में पानी के बिना शौचालय का उपयोग भला कैसे किया जा सकता है. गांवों में जब तक पानी की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक शौचालय का उपयोग करना संभव नहीं है.

समितियों को मिलेगी जागरूक करने की जिम्मेवारी. स्वच्छ भारत मिशन के प्रखंड समन्वयक सुर्यमणी कुमार ने बताया कि गांवों में पूर्व में ही निगरानी समिति का गठन किया गया था, लेकिन वे शिथिल हो गई हैं. इस कारण समितियों का पुनर्गठन कराया जा रहा है. इस समिति का काम लोगों को व्यवहार परिवर्तन और शौचालय का उपयोग करने के लिए जागरूक करना है.

साथ ही कचरा प्रबंधन सहित स्वच्छता से संबंधित अन्य कार्यों में भी इन समितियों को अहम भूमिका निभानी है. इस मौके पर जिला समन्वयक विनय कुमार झा, जिला कचरा प्रबंधन सुशोभन राय, पिरामल फाउंडेशन के अधिकारी, प्रभारी पंचायती राज पदाधिकारी, बीएसएस रामप्रवेश कुमार के अलावा सेविका सहायिका समेत कई कर्मी उपस्थित थे.

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