महिलाओं की छोटी पहल से मिली बड़ी कामयाबी

शिवहरः आज घर की चारदीवारी लांघ कर महिलाएं समाज को अपने वजूद का एहसास करा रही हैं. अपने जज्बे से कर्मठ महिलाओं ने पुरुषों के एकाधिकार वाले क्षेत्रों में न केवल खुद को साबित किया है, बल्कि यह अहसास भी करवाया है कि किसी भी कार्य को अंजाम देने में वह पुरूषों से दो कदम आगे हैं. शिवहर जिले के तरियानी प्रखंड के कई दलित व पिछड़े बहुल गांव परिवारों की महिलाओं की सफलता की कहानी इसकी बानगी भर है. हमारे आसपास की ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने जिंदगी की झंझावतों से लोहा लेते हुए सिर्फ खुद के लिए राह मनाई है. बल्कि बड़ी खामोशी से अपने जैसे अन्य महिलाओं के लिए मददगार और प्रेरणा स्रोत बनी है. आज इन महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में जुटी ऐसे ही महिलाओं के अनूठे प्रयास की एक कड़ी शुरू कर रहे हैं.
कल तक घर की दहलीज तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज बदलते समय के साथ कदमताल कर रही हैं. सिर्फ शहर ही नहीं सुदूर गांव की महिलाएं भी अपने अथक परिश्रम व जज्बे के बदौलत कामयाबी की नई इबारत लिख रही है. यह महिलाएं सिर्फ अपने लिए ही नहीं अपनी जमात के विकास के लिए भी पहल कर रही हैं. इसमें उन्हें सफलता भी मिल रही है. पुरनहिया प्रखंड के उग्रवाद प्रभावित दोस्तियां गांव के एक छोटे से टोले की सुकांति ने भी ऐसी ही कोशिश की है.
सुकांति छठे तक पढ़ी लिखी हैं. पहले वह दिहाडी मजदूर का काम किया करती थीं. दिन भर मेहनत करने के बाद 50 रुपये  मिलते थे. इससे घर भी नहीं चल पाता था.  वर्ष 2012 में सुकांति ने अपने जैसे आठ दस महिलाओं को इकट्ठा किया और छोटी छोटी बचत कर अपना एक बैंक बनाया. जिसके माध्यम से बारी बारी से सब बकरियों की संख्या बढाने लगी. कुछ दिन बाद सभी महिलाओं ने कटैया बैंक से संपर्क किया. जहां इसकी बैंक बनाने समूह बनाने की सूचना पर बैंक मैनेजर ने खुश होते हुए समूह की महिलाओं को ढाई लाख रुपया का ऋण दे दिया. जिस पैसा से  गांव महिलाओं ने पशुपालन शुरू किया.
आज सुकांति के पास 30 बकरिया हैं.  हर माह 10 , 12 हजार रुपए कमा लेती हैं. गांव की अन्य महिलाओं को भी सुकांति ने प्रेरित किया. नतीजन महिलाओं ने जीविका समूह से जुड़ कर काम शुरु कर दिया है. आज ये गांव की महिलाएं बागमती नदी के किनारे लीज पर जमीन लेकर साग सब्जी की खेती करने के साथ साथ लोगों से करवा रही है. सभी महिलाओं के पास मोबाइल की सुविधा भी है. गांव में ही बच्चों को स्कूल में पढा रही हैं. महिलाएं नित्य दिन आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं.

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