मात्र ढाई डिसमिल जमीन के कारण गयी ज्वैलर की जान  

शिवहर: मात्र ढाई डिसमिल जमीन के कारण स्वर्ण व्यवसायी को जान गंवानी पड़ी. जानकारी के अनुसार रानी राम अनुग्रह देवी पति राजा गिरीश नंदन सिंह ने नाजायज तरीके से जमीन बेचने से धर्मेंद्र सोनी की हत्या होने की बात सामने आ रही है.
राजा गिरीश नंदन सिंह की 1964 में मृत्यु होने के बाद 1965 में मुजफ्फरपुर न्यायालय  ने आदेश दिया था कि किसी भी जमीन की बिक्री रानी राम अनुग्रह देवी नहीं करेंगी. वह सिर्फ राज परिवार के जमीन की देखभाल करेंगी. जमीन के दावेदार उनके पुत्र बालिग होने पर होंगे. रानी के 3 पुत्र उग्रेश नंदन सिंह 1975 में बालिग हुए, गोविंद नंदन सिंह 1979 में बालिग हुए और मोहन नंदन सिंह 1982 में बालिग हुए. जबकि रानी गुपचुप तरीके से नाजायज रूप से मोहन नंदन सिंह के नाम की जमीन खाता नं,  -131, खेसरा 5151 ढाई डिसमिल जमीन को 1975 में ही तरियानी थाना क्षेत्र के जगदीशपुर कोठिया निवासी रघुनाथ सिंह के नाम–2 धुर तथा उनकी पत्नी शिबती देवी के नाम 2 धुर तथा महेश प्रसाद सिंह के नाम 5 धुर जमीन कुल 9 धुर जमीन यानी ढाई डिसमिल जमीन की बिक्री कर दी थी.
जब मोहन नंदन सिंह 1982 में बालिग हुए तो अपने हिस्से की जमीन को 1990 में विश्वनाथ सोनी के नाम रजिस्ट्री कर बेच दिया था. इसके बाद पहले वाले जमीन मालिक ने मालिकाना हक पाने को लेकर न्यायालय की शरण ली.
वर्ष 1996 के बाद से कई बार जमीन की डिग्री सोनी परिवार के पक्ष में आया तो क्षुब्ध व हताश होकर जमीन पाने के चक्कर में यह खूनी खेल खेला गया. वैसे आगे पुलिस की जांच से पता चलेगा कि दोषी कौन है. बहरहाल, जमीन तो ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है परंतु धर्मेंद्र सोनी को अपनी जान गंवानी पड़ी. पुलिस इस मामले की तहकीकात में जुट गयी है.

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