तरियानी छपरा के शहीदों की मजारों पर अब लगेगा हर वर्ष मेला

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शिवहर : “ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी याद करो कुर्बानी. प्राय: सभी राष्ट्रीय त्योहार पर गाये जाने वाले या राष्ट्रीय गीत तरियानी छपरा के शहीदों के लिए यादगार साबित हो रहा है. 30 अगस्त 1942 इतिहास के पन्ने में दर्ज है, एक ऐसी तारीख जिसने सन 1942 में न केवल अंग्रेजी हुकूमत की नीव हिला दी थी. अंग्रेजो ने शिवहर जिला के तरियानी छपरा गांव में धावा बोलकर देश को आजादी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए एक सभा कर रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर ठीक उसी तरह गोलियां बरसाई जैसे पंजाब के जलियांवाला बाग में गोलियां चलाई गई थी.

 

अंग्रेजो की गोली से 10 जिले के सपूतों को मौके पर जान चली गई कई घायल हुए. तरियानी छपरा के ही बलदेव साह, सुखन लोहार, बंसी तत्मा, परशत साह, सुंदर महरा, प्रभु साह, जय मंगल सिंह, सुखदेव सिंह, भूषण सिंह एवं नवजात सिंह शहीद हो गए. लेकिन इससे पहले वीर सपूतों ने अंग्रेजो को नींव हिला दी थी. उस समय भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था तो इस इलाके में भी आंदोलन चरम पर था. शिवहर जिला उस वक्त सीतामढ़ी के साथ मुजफ्फरपुर जिला था 30 अगस्त 1942 की आजादी की सपना संजोए जिले के छपरा के जाबांज सपूतों ने बेलसंड थाना व अंग्रेजों की कोठी पर हमला बोलकर भारी संख्या में बंदूके लूट ली थी.

तकरीबन 50 की संख्या में पहुंचे आंदोलनकारियों ने बेलसंड तरियानी के बीच बागमती नदी पर अवस्थित मारड पूल को भी उड़ा दिया था. क्रांतिकारियों  मे धनेश्वर झा, ठाकुर प्रसाद सिंह, पवन धारी प्रसाद, बलदेव शाह, सुखन लोहार, जय मंगल सिंह, सुखदेव सिंह, भूपेंद्र सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने हमला कर भाग निकले थे. सभी लोग तरियानी छपरा में अंग्रेजो के खिलाफ रणनीति तय कर रहे थे.

इसी बीच अंग्रेज सिपाहियों ने हमला कर 10 सपूतों को जान ले ली.आज भी तरियानी छपरा गांव में बांध के किनारे उन महान देश शहीदों की स्मारक है. जिला पदाधिकारी राजकुमार व पुलिस अधीक्षक प्रकाश नाथ मिश्रा के सहयोगात्मक पहल से शहीद स्थल का कायाकल्प हो रहा है. यह स्मारक तरियानी छपरा वासियों के लिए जो ना केवल युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है. बल्कि गुलामी की दासता से देश को मुक्ति दिलाने के लिए दी गई कुर्बानियों को याद दिलाता रहेगा.

वैसे 1942 में सीतामढ़ी शिवहर सुर्खियों में रहा था. इस दौरान कुल 213 सपूत गिरफ्तार हुए जिसमें 180 को जेल में बंद कर दिया गया था. 4 फिंरगीं की मौत के घाट उतारे गए थे. 12 सपूतों को इसकी कीमत प्राणों की आहुति देकर चुकानी पड़ी थी.

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बुधवार को समाजसेवी मुकेश सिंह मुखिया श्याम बाबू सिंह पूर्व मुखिया अखिलेश कुमार सिंह, कैप्टन कौशलेंद्र कुमार सिंह उर्फ चुनचुन सिंह, अमित कुमार सिंह, मुन्ना मलेटरी, प्रमुख मुन्नीदेवी, पंचायत समिति वैकुंठ कुमार सिंह, मधुरेंद्र कुमार सिंह सहित दर्जनों समाजसेवी ने शहीद स्थल पर जाकर पुष्प अर्पित कर सदा सुमन अर्पित किए हैं.तरियानी के वीर शहीदों को यादगार साबित करने को लेकर जिला पदाधिकारी राजकुमार पुलिस अधीक्षक प्रकाश नाथ मिश्रा के अथक प्रयास से पिछले साल उक्त शहीद स्थल पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, विधायक सुनीता सिंह चौहान, विधायक प्रतिनिधि राणा रणधीर सिंह चौहान सहित कई गणमान्य  शहीद स्थल पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहीद स्मारक का कायाकल्प की है.

 

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