Woodland का जूता पहन बाबा रामदेव बैठे गंगा किनारे इंस्टाग्राम पर डाली तस्वीर, हुए ट्रोल

लाइव सिटीज डेस्क : मेरा मन स्वदेशी, मेरा तन स्वदेशी, मर जाऊं तो भी मेरा होवे कफन स्वदेशी…ऐसा ही बाबा रामदेव हर वक्त कहते रहते हैं. लेकिन इस बार उन्हें अपने ही कथन पर लोगों ने खूब जम कर ट्रोल किया है. दरअसलस, बाबा रामदेव आजकल इंस्टाग्राम अकाउंट पर खूब एक्टिव रहते हैं. अपनी कई सारी तस्वीरें वो वहां पोस्ट करते रहते हैं. ऐसे में उन्होंने एक फोटो अपलोड की फिर उसको हटा कर नई तस्वीर भी डाली. लेकिन ट्रोलर्स थमे नहीं.

बाबा रामदेव के नाम से दो ही शब्द ध्यान आते हैं. एक योग. दूसरा स्वदेशी. दरअसल, रामदेव हर वक्त स्वदेशी का नाम जपते रहते हैं. विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में की जा रही लूट का जिक्र करते रहते हैं. वो कहते हैं विदेशी कंपनियों के द्वारा की जा रही लूट को रोकें. स्वदेशी अपनाएं. बाबा की स्वदेशी मुहिम दिन भर विज्ञापनों में दिखती है. ऊपर जो लिखा है, वो पतंजलि उत्पादों के विज्ञापन की एक मशहूर टैगलाइन है. बाबा अक्सर टीवी स्क्रीन पर ये बोलते नजर आते हैं.

उनकी इस अपील को भारतीयों ने हाथो-हाथ लिया. पतंजलि और उसके सामान बेस्ट सेलर बन गए. लाखों लोगों के घर में फिनाइल से लेकर पेस्ट तक, पापड़ से लेकर चावल-दाल और आटा तक पतंजलि का आता है. बाबा की बात इतनी ज्यादा असर कर गई कि लोग स्वदेशी (मतलब पतंजलि) के लिए भावुक हो गए.

लेकिन इस बार उन्होंने एक गलती कर बैठी और वो ये कि उन्होंने 7 मार्च को पहले गंगा किनारे बैठे हुए एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर डाली. फिर उस तस्वीर को हटाकर एक खास हिस्सा क्रॉप कर दिया और फिर से उसे पोस्ट कर दिया. भगवा कपड़े पहने फोटो के कैप्शन में लिखा था- मां गंगा के तट पर. इस फोटो में बाबा के पैरों में एक जूता दिख रहा था. इस फोटो की जगह बाबा ने फिर एक दूसरी तस्वीर डाली. नई तस्वीर में कुछ नया नहीं था. वो ही पुरानी तस्वीर थी. अंतर बस ये था कि इस बार फोटो को क्रॉप करके वो जूते वाला हिस्सा हटा दिया गया था. मगर इस नई फोटो में भी बाबा के दूसरे पैर में वो ही जूता पड़ा हुआ था. भूरे रंग वाला. और क्रॉप करके दाहिने पैर का जूता भले हटा दिया गया हो, मगर जूते का लेस दूसरी फोटो में भी दिख रहा था.

जिस तस्वीर को हटाया गया, उस पर लोगों ने लिखा कि ये वुडलैंड का लोगो है. हालांकि लोगो को जूम करके देखो, तो एकदम साफ-साफ नहीं दिखता. ब्रैंड का लोगो धुंधला सा दिखता है. फिर याद आया कि बाबा ने क्रॉप करके फोटो का ये हिस्सा हटाया. ऐसा क्यों किया उन्होंने? शायद उन जूतों की वजह से ही फोटो को क्रॉप किया गया. तो क्या बाबा उस लोगो को छुपाना चाहते थे? लगता तो ये ही है.

क्योंकि पहली और दूसरी फोटो में बस इतना ही अंतर है. बाबा रामदेव की ये अतिरिक्त कोशिश थोड़ी अटपटी लगती है. लोगों ने कॉमेंट सेक्शन में आकर बाबा की खूब आलोचना की. लगता है पहले वाली तस्वीर पर भी ऐसी ही प्रतिक्रिया आई होगी.

बाबा पहले भी जूतों में नजर आ चुके हैं. वैसे इंस्टाग्राम पर उनकी कई तस्वीरें हैं, जिसमें वो फुटबॉल खेलते हुए नजर आते हैं. तब भी उनके पांव में वो भूरे रंग का जूता है. फर्क बस इतना है कि उन तस्वीरों में जूते पर कोई लोगो नजर नहीं आता. क्योंकि तस्वीर सामने से ली गई है. कुछ दूर से. शायद इसीलिए तब फोटो क्रॉप नहीं की गई.

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