सोशल : महंगा पेट्रोल, सफाई पेश कर रही बीजेपी सरकार

लाइव सिटीज डेस्क : बीते कुछ वक्त में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के चलते केंद्र सरकार को आलोचना झेलनी पड़ रही है. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सत्तारूढ़ बीजेपी पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर इन दिनों कुछ तथ्यों को रखकर सफाई पेश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग सरकार पर पेट्रोल की कीमतों को काबू न करने को लेकर तंज कस रहे हैं. इसमें पुराने ट्वीट्स, जिनमें यूपीए-2 के दौर में पेट्रोल की कीमतों में हुए इजाफे पर तंज कसा था.

धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल की बढ़ी कीमतों को लेकर कई ट्वीट्स किए. प्रधान ने लिखा, ”जापान, स्विटज़रलैंड, सिंगापुर, यूके, जर्मनी, फ्रांस समेत 68 देशों में भारत के मुकाबले पेट्रोल की कीमत ज़्यादा है.”

विरेंद्र विक्रम सिंह ने लिखा, ”सर, मैं बीजेपी का जबर समर्थक हूं लेकिन प्लीज इस तरह से तुलना न कीजिए. इस तरह से तुलना करने से बेहतर है आप चुप रहें.”

संदीप लिखते हैं, ”ये सही नहीं है कि आप विकसित देशों से तुलना करें. ये देश तो यूपीए के वक्त में भी थे, तब आपने क्यों आपत्ति जताई थी.”

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प्रख्यात जर्नलिस्ट रविश कुमार ने भी पेट्रोल के बढ़ते दाम का अर्थशास्त्र निकाला है. उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा है-

पेट्रोल का भाव 83.32 रुपये प्रति लीटर ?

महाराष्ट्र के सोलापुर में 15 सितंबर हाई स्पीड पेट्रोल का भाव 83 रुपये 32 पैसे प्रति लीटर था? कुछ के मुताबिक एचपी के पेट्रोल पंप पर सादा पेट्रोल 80 रुपये 10 पैसे प्रति लीटर है। किसी पं ुपये 27 पैसे प्रति लीटर है। यहाँ 14 सितंबर को इंडियन आयल का रेट 80 रुपये 51 पैसे प्रति लीटर था। महाराष्ट्र के परभणी में 15 सितंबर को सादा पेट्रोल का रेट 81 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर हो गया। 11 सिंतबर को महाराष्ट्र के 12 शहरों में पेट्रोल का रेट 80 रुपये प्रति लीटर से अधिक था। जबकि हम सब मुंबई के 79 रुपये 48 पैसे प्रति लीटर के रेट को ही अधिकतम मान रहे थे।

इंडियन आयल कारपोरेशन, एचपीसीएल, भारत पेट्रोलियम की वेबसाइट पर महानगरों और राजधानियों का रेट तो है मगर सारे पंपों, सारे ज़िलों और कस्बों का रेट नहीं है। इस कारण जब मीडिया में पेट्रोल के रेट की चर्चा हुई तो लगा कि सिर्फ महानगरों की समस्या है। जबकि ऐसा नहीं है। अखिलभारतीय पेट्रोल पंप संघ के अजय बंसल ने बताया कि देश भर में डीज़ल की बिक्री में दस प्रतिशत और पेट्रोल की बिक्री में 4 प्रतिशत की कमी आ गई है। दिल्ली में पेट्रोली की बिक्री में दस प्रतिशत की कमी आई है। दिल्ली के सीएनजी स्टेशनों में भीड़ अचानक सी बढ़ गई है।

पुलिस केस, आयकर विभाग और सीबीआई के डर से कांग्रेस के नेताओं से नहीं हो रहा है तो क्या बीजेपी से ही गुज़ारिश की जा सकती है कि वे 2013 की तरह पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर प्रदर्शन करें। हम उन्हें ही विपक्ष समझ कर सिनेमा देख लेंगे। मार्च 2013 में पेट्रोल का भाव 70 रुपये प्रति लीटर चला गया था। 1 सितंबर 2013 को दिल्ली में पेट्रोल का भाव 74 रुपये 10 पैसे प्रति लीटर चला गया था। उस समय कोलकाता में 81 रुपये 57 पैसे प्रति लीटर के भाव से पेट्रोल बिका था।

अगस्त 2013 में कच्चे तेल का दाम 108.45 डॉलर प्रति बैरल था। इस कारण पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे थे। इस वक्त अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल का दाम 54.56 डॉलर प्रति बैरल है। उस वक्त के हिसाब से आधे से भी कम है लेकिन पेट्रोल के दाम सितंबर से भी ज़्यादा। इस अर्थशास्त्र को नहीं समझाने वाले कोई है जो इधर उधर का बात बता कर जनता को कंफ्यूज़ कर सके। तलाश है फिर से ऐसे योग्य अर्थशास्त्री की।

नोट- क्या आप अपने अपने शहरों के पेट्रोल के दाम लिख सकते हैं, याद से न लिखें, ठीक ठीक पता हो तभी लिखें । हमने भी सोलापुर के रेट में सुधार किया है। प्रश्नवाचक लगाया है।

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