सुनो पटना वालों ! चले हो स्मार्ट बनने, पर ऐंठन-कानून तोड़ने की आदत भी स्पेन सुधारेगा क्या ?

लाइव सिटीज, पटना : मधुरेश बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट हैं. दैनिक भास्कर, पटना के ब्यूरो चीफ हैं. स्मार्ट शहर बनने जा रहे पटना के बारे में आज मधुरेश ने बहुत कुछ लिखा है. गौर करने की बातें हैं. बिना और कुछ जाने, आगे आप पढ़िए मधुरेश के आलेख को –

‘आदमी और उसकी सभ्यता के इतिहास के बहुत बड़े हिस्से को छेंकने वाले महान साम्राज्यों/राजवंशों की राजधानी, पाटलिपुत्र (अभी का पटना), 21 वीं सदी के 18 दिसम्बर से स्मार्ट बनने जा रहा है.



यानी, 2 दिन बाद, हमारे स्मार्टनेस के दिन शुरु हो जाएंगे. पटना को स्मार्ट बनाने के लिए स्पेन की कंपनी बुलाई गई है.

बाप रे, कंपनी ने कहीं अपने हिसाब से स्मार्ट बना दिया तो? तो क्या पटना, स्पेन हो जाएगा? पटना की पब्लिक, स्पेन वाले स्मार्टनेस का लोड ले पाएगी? कुछ साल पहले पटना, पेरिस बन रहा था. बनते-बनते रह गया.

इस बहस में पड़े बिना कि पटना के स्मार्टनेस का मसला, क्या विकास के “रिवर्स गियर” की गवाही है, यह जानना ज्यादा जरुरी है कि अभी का पटना और यहां के लोग कैसे हैं?

दो खास सवाल भी हैं. एक, संसाधन या सुंदरता के स्तर पर सिर्फ शहर स्मार्ट होगा या यहां के लोग भी? दूसरा, वाकई यहां के लोग स्मार्ट होने की ललक/कामना रखते हैं?

patna-junction
प्रतीकात्मक फोटो

यहां के लोगों ने तो अपनी सिर की सुरक्षा भी पुलिस के जिम्मे की हुई है. लोग, डंडा की जोर पर हेलमेट पहनते हैं. ट्रैफिक पोस्ट पर रेड सिग्नल की बिल्कुल परवाह नहीं करते. वश चले, तो घर के बेडरूम से बाथरूम में कार या बाइक से ही जाएं.

यह पटनिया लोगों का सिर्फ ट्रैफिक सेंस से सरोकार रखने वाले कुछ “गुण” हैं. ऐंठ, खून में. कानून तोड़ना, आदत में. ‘हम जहां खड़े होते हैं लाइन वहीं से शुरु होती है’ का मनोभाव. कहीं भी फारिग हो जाना, गुटखा-पान की पीक, धुएं के छल्ले …, बाप रे कितना गिनाएं!

चलिये, स्पेन वाली कंपनी सबकुछ देखेगी ही.

मैं भी अपने शहर के साथ स्मार्ट होना चाहता हूं. अब तक क्यों नहीं हुआ, इसके कारणों में नहीं जाना चाहता. व्यर्थ में सबकी, सिस्टम की बदनामी होगी.

लेकिन, यह आशंका जरुर है कि स्पेन की कंपनी द्वारा स्मार्ट बना देने के बाद, स्मार्टनेस को संभाले रखने का जिम्मा इन्हीं लोगों, इसी सिस्टम के पास होगा. ये संभाल पाएंगे?

ये तो मच्छर तक नहीं मार पाते. शहर से कूड़ा-कचरा कैसे हटे, इसका लायक तरीका, वर्षों से तय नहीं कर पाएं हैं. खुद इनको भी याद नहीं होगा कि इन्होंने कूड़ा हटाने के कितने तरीकों को अब तक ईजाद किया, इसे खुलेआम किया और हवा में उड़ा दिया? ये मेन होल का ढक्कन नहीं लगा पाते. मुहल्लों से बारिश के पानी को निकाल नहीं पाते. फ्लाईओवर पर जलजमाव हो जाता है.

क्या, स्पेन वाली कंपनी इनको भी स्मार्ट बनायेगी?

बहरहाल, इस पृष्ठभूमि में अपना प्राचीन पाटलिपुत्र, उसकी सुंदरता, उसका स्मार्टनेस?

करते रहिए शोध कि इसका डीपीआर, किस कंपनी ने बनाया था?

सही में हम “पर शासन” (प्रशासन) को बखूबी जीने लगे हैं. “स्व शासन” को घोंट गए.’

17 से पटना को ‘स्मार्ट’ बनाने का शुरू हो जाएगा काम, बिस्कोमान के 5वें तल्ले पर होगा ऑफिस
अब पटना को स्मार्ट बनाएगा स्पेन, इस कंपनी को मिली है जिम्मेवारी