आचार्य बालकृष्ण ने की गांजा को लीगल करने की मांग, सोशल मीडिया पर बिफर पड़े लोग

लाइव सिटीज डेस्क : सोशल मीडिया पर गांजा से जुड़ी एक खबर तेजी से वायरल हो रही है. पंतजलि के संस्थापक बाबा रामदेव और सीईओ बालकृष्ण ने भारत में गांजा को कानूनी रूप से वैध करने की मांग की है. वेब पॉर्टल IndiaToday की खबर को देखे तो आचार्य बालकृष्ण ने कहा की भारतीय में वर्षों से गांजा का औषधी के रूप में इस्तेमाल होता रहा है. गांजा से दिमागी बीमारियों में फायदा मिलता है. वहीं अगर गांजे से नशा ना चढ़े तो यह काम की चीज हो सकती है.

बालकृष्ण कहते हैं कि कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि गांजा मानव शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है. साथ ही इसको औषधी के तौर पर यूज कर कई बीमारियों को भी ठीक किया जा सकता है. अभी भारत में गांजा गैर-कानूनी है. फिर भी इसका सेवन करने वाले लोगों की अच्छी तदाद है. लोग अवैध रूप से गांजा पीते और खरीदते हैं. जिसके लिए बड़ा दाम देते भी नहीं कतराते. इससे क्राइम में बढ़ोतरी होती है. इसलिए बेहतर होगा कि इसे मेडिकल पर्पस के लिए वैध कर दिया जाएं.

सोशल मीडिया पर जहां बालकृष्ण के इस बयान को समर्थन मिल रहा है. वहीं ज्यादातर लोग इस पर अपना विरोध भी जता रहे हैं. कई लोगों ने ट्वीट कर यह सवाल उठाया है कि आसानी से गांजा उपलब्ध कराने से नशेड़ी लोगों की लत और इसकी वजह से अपराध और ना बढ़ जाएं. बता दें कि इस समय दुनिया के करीब 20 देशों में कानूनी रूप से गांजा बेचा जा रहा है.

पढ़ें ट्विटर यूजर्स की प्रतिक्रिया

ऑनलाइन डीलिवरी की भी बात हो रही है

कुछ लोग बाबा को धन्यवाद भी दें रहे हैं

कई देशों में कानूनी रूप से वैध है गांजा

अमेरिका का कोलोराडो पहला प्रांत बन है, जहां गांजे को कानूनी रूप से बेचा जाता है. इसे देखते हुए बाकी कई देशों में भी गांजे को कानूनी रूप से उपलब्ध कराने की जा रही है. इसी साल अमेरिका का वॉशिंगटन भी इस श्रेणी में शामिल हो सकता है.

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हम हैं आदित्य. फैन हैं. किसी आम इंसान के नहीं. भगवान के. वो भी ऐसे-वैसे भगवान नहीं. देवों के देव महादेव के. उनके जो इस सृष्टि के संचालक हैं. हां हम धार्मिक आदमी हैं. भगवान को मानते हैं. बम भोले-बम भोले का जाप करते हैं. कर्मठ व्यक्ति हैं. श्रम का महत्व समझते हैं. इसलिए उसे बचाकर खर्च करते हैं. देखने में ठीक-ठाक है. पर फिर भी खराब दिखते है. ये सखी कहती है. बाकी हमारी जिंदगी का एक्कै मकसद है. उस चीज को पाना, जिसे पाना मुश्किल हो. कहने को लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट है. फेसबुक पर प्रेम और फूड पर बहुत लिखते हैं. मगर जब कोई इनबॉक्स में आकर कहता है, आप अच्छा लिखते हैं. तो शर्माकर नीले हो जाते हैं. क्योंकि शिव का रंग भी, तो नीला ही है. बाकी की जानकारी मुझसे मिलकर ही पता की जा सकती है. हां मुझे समझने में आपको परेशानी हो सकती है. लेकिन ये मेरी नहीं आपकी दिक्कत है.

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