योगी बोले- ताजमहल हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं, सोशल मीडिया पर भड़के लोग

लाइव सिटीज डेस्क : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों बिहार के दरभंगा में हुई एक रैली में ताजमहल को भारतीय संस्कृति का हिस्सा मानने से इनकार किया है. अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि जब किसी दूसरे देश का अतिथि भारत आता है या फिर भारत से कोई पदाधिकारी आधिकारिक यात्रा पर विदेश जाता है तो भारतीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में ताजमहल या किसी मीनार की आकृति भेंट स्वरूप दी जाती थी. पर जब से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है, तब से ताजमहल या किसी भी मीनार की आकृति भेंट स्वरूप देना बंद कर दिया गया है, क्योंकि इनका भारतीय संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है.

उन्होंने आगे बताया, ‘केंद्र में भाजपा जबसे सत्ता में आई है, तब से भेंट स्वरूप ‘भागवद्गीता’ दी जाती है, जो सही मायनों में भारतीय संस्कृति का प्रतीक है.’

मीडिया में यह खबर आने के बाद उनके इस बयान से सोशल मीडिया पर भूचाल आ गया और सभी योगी आदित्यनाथ के इस बयान की आलोचना करने लगे.

yogi-adityanath

rofl marwadi किसान ट्विटर हैंडल से लिखा है-

ताजमहल को मन्दिर मानने वाले भगतो का अब क्या होगा उनको तो दुब कर मर जाना चाही है #TajMahal

इमरोज़ आलम फेसबुक पर लिखते हैं-

”अजी जनाब,
ताजमहल से आने वाली कमाई उनको क्यों नहीं दे देते जिनकी संस्कृति है?
जब ताजमहल आपकी संस्कृति है ही नहीं तो फिर काहे का “दल्ले” की तरह बीच की कमाई खा रहे हैं?
दलाली मुंह लग गई है क्या?”

#दबी_ज़ुबान
इमरोज़

 

आगाज़ सिद्दीकी लिखते हैं –

#ताजमहल मोहब्बत की राह में बढ़ाया गया पहला कदम है और #खजुराहो उसकी आखिरी मंज़िल..

अजय पाण्डेय लिखते हैं –

विदेशी मेहमानों को #ताजमहल की कृति उपहार स्वरूप नही देनी चाहिए – गोरखपुर वाले साधु बाबा..

कोई नही सालों #खजुराहो की कलाकृति गिफ्ट कर दिया करो..

ई साधु बाबा भी #मोहनजोदड़ो_हड़प्पा की खुदाई में मिला था…

नैना नकवी लिखती हैं –

#ताजमहल हमारी #संस्कृति का हिस्सा नही है।
-तो #लालकिला तुम्हारे पापा का है क्या? ??

साध्वी मीनू जैन लिखती है

योगी जी, आपकी ‘ बिरादरी ‘ के इतिहासकारों ने ही बताया था कि यह तेजो महालय (शिव मंदिर ) है , ताज महल नहीं .
इसका निर्माण जयपुर के राजा मानसिंह प्रथम ने करवाया था .
आप ही बताओ किसकी बात मानें हम !

गुलज़ार हुस्सैन लिखते हैं

यदि ये कट्टर ग्रुप ताजमहल से इतनी नफरत करता है, तो इस ग्रुप के सभी लोगों का ताजमहल में प्रवेश प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.

क्या पता ये जेब में हथौड़े छुपा के अंदर ले जाएं और प्रहार करके ताज की दीवारों को जख्मी कर दें.

उज्वला तप्सुंद्रे लिखती हैं

ताजमहल एक औरत के सम्मान का भी प्रतीक है….जो विवाह में विश्वास् नहीं रखते वो इस भावना को ख़ाक समझेंगे….?????

हालांकि, इतिहासकार योगी आदित्यनाथ की व्याख्या से असहमत हैं. ‘द टेलीग्राफ’ से बातचीत में पटना यूनिवर्सिटी की इतिहास की प्रोफेसर डेजी नारायण ने कहा कि मध्यकालीन और पूर्व आधुनिक काल यानी 1206 से लेकर 1760 तक के कालखंड को कुछ लोग भारतीय इतिहास का इस्लामिक युग मानते हैं. और यही वजह है कि एक खास तरह की राजनीतिक सोच रखने वाले लोग इस कालखंड में बने ताजमहल को भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं मानते हैं.

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उन्होंने कहा कि यह तथ्य चौंकाने वाला है, जबकि पूरी दुनिया में ताजमहल को भारतीय धरोहर के रूप में ख्याति मिली हुई है. नारायण ने कहा कि कुछ लोग भारतीय इतिहास को पुनर्परिभाषित करना चाहते हैं और तथ्यों के साथ खिलवाड़ करना चाहते हैं.