निराश पटना : बोली पब्लिक – ए मोदी जी, न कुच्छो देना था त एतना हाँके के का जरुरत था

लाइव सिटीज डेस्क : पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में शामिल होने को आये देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनिवर्सिटी के बारे में चाहे जितनी बड़ी घोषणाएं की हों, सेंट्रल यूनिवर्सिटी की मांग को नहीं स्वीकार कर पटना और बिहार को निराश कर दिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुली मांग की, फिर भी प्रधानमंत्री ने नहीं कबूल की. परिणाम सोशल मीडिया पर गुस्से का इजहार चल रहा है. आगे पढ़ें कुछ टिप्पणियां, जिनसे जानेंगे, क्या कह रहा है बिहार…

अस्कृत कुमार श्रीवास्तव लिखते हैं – मांगा तोहफा..मिला बाबाजी का ठुल्लू. फेसबुक पर बेहद सक्रिय रहने वाले मुकुटधारी अग्रवाल कहते हैं कि PM ने मांग बहुत चतुराई से टाल दी. आये भी, गए भी..बस एक फ़साना छोड़ गए. नवभारत टाइम्स, दिल्ली के सीनियर जर्नलिस्ट नरेन्द्र नाथ ने लिखा – लगता है, नीतीश और मोदी में बड़ा कम्युनिकेशन गैप हो गया है. अगर पटना यूनिवर्सिटी को इस तरह सेंट्रल का दर्जा नहीं देना था, तो इस तरह आग्रह नहीं करवाना था. नीतीश लगभग गिडगिडाने, मेहरबानी अंदाज में आग्रह करते रहे. ऐसा पब्लिक स्टेज पर तभी होता है जब पहले से इस तरह के निर्णय का आभास हो जाता है.

प्रभात खबर के पत्रकार पुष्य मित्र लिखते हैं – मेरे ख्याल से आज सुशासन बाबू को अपनी राजनैतिक हैसियत का अंदाजा हो गया होगा. सोशल मीडिया एक्सपर्ट अतुल रंजन ने लिखा – पीठ छुड़ाकर कैसे भागा जाता है, ये आज पटना यूनिवर्सिटी में देखने को मिला. जनाबे आली कभी थाली पीट रहे थे, दे दो विशेष राज्य का दर्जा. मिला तो नहीं. जिनसे मांगा उसने कुछ दिन बाद विशेष पैकेज के नाम पर बोली लगा दी. आज मांगा सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा, तो पड़ गया बाजीगरी का पाला.

सजाय वर्मा कहते हैं – भाषण खूब दिया मोदी ने. पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा नहीं दिया. सुभाष रॉय लिखते हैं – हालत ये हो गई है कि भाजपाई नीतीश जी को लात भी मारेंगे तो नीतीश जी कहेंगे…थैंकयू माई-बाप. अभिषेक कुमार ने स्टेटस डाला – PU को झटका, नहीं मिला केंद्रीय विवि का दर्जा. अनुराग शुक्ला की टिप्पणी है – गोल-गोल-गोल मोदी जी, गोल…सब गोल है! चिरंजीव पांडेय और आगे लिख गए – भक्तों, अगर मोदी जी पर विश्वास हो तो मुझे 3 लाख रूपये उधार दो. वो जैसे ही मुझे 15 लाख देंगे. मैं आपको लौटा दूंगा. इंजिनियर अजय यादव कहते हैं – बाबजी का ठुल्लू दिया सेंट्रल यूनिवर्सिटी की जगह.

अभिषेक कुमार कहते हैं – मुख्यमंत्री के भाषण को प्रधानमंत्री ने हल्के में लिया. अभय कुमार सिंह का स्टेटस वार्तालाप की तरह है. जिसमें नीतीश जी कह रहे हैं – हुजूर केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दे दो. मोदी जी बोल रहे हैं – काहे ला? उससे भी एक कदम आगे लेकर जाऊंगा. सुजीत कुमार ने लिखा – लोलीपॉप ही थमाना था, तो इतना तामझाम क्यों? वीडियो कांफ्रेंसिंग कर लेते. लगता है कि आपको घूम-घूम कर फेंकने की लत लग गई है. बिजनेसमैन देव प्रकाश सिंह ने लिखा- दिल के अरमां आंसुओं में बह गए. निलय सिंह ने लिखा – एक जुमला और शुभकामनाएं देकर निकल लिए नरेंद्र मोदी.

पत्रकार डॉ. रंजीत कुमार लिखते हैं – वाह प्रधानमंत्री जी. आपको लोलीपॉप थमाने में महारत हासिल है. लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि आपने पटना विश्वविद्यालय को क्या दिया. रश्मि कांत ने लिखा- मुर्ख बना दिया मोदी ने, पटना विश्वविद्यालय को. कुणाल दत्त बोले – मोदी बिहार को फिर गोली देकर निकल लिए. कृनेश कुमार ने कहा – एक बार फिर नीतीश कुमार को औकात बताया गया. पत्रकार विमलेन्दु सिंह लिखते हैं – ए मोदी जी, न कुच्छो देना था त एतना हाँके के का जरुरत था. ठेंगा पकड़ा कर चल दिए मोकामा. नीरज प्रियदर्शी ने नीतीश कुमार पर तंज करते हुए लिखा – खुद को महान बताकर सामने वाले से भीख नहीं ले सकते. सामने वाला इंटरनेशनल भिखारी है. न्यूज़ 24 के बिहार एडिटर अमिताभ ओझा ने लिखा – नो उल्लू बनाविंग.

सभी फोटो : सचिन

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