क्या ठीक है, रवीश कुमार ने PU को वाहियात यूनिवर्सिटी कहा है!

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रवीश कुमार (फाइल फोटो)

लाइव सिटीज डेस्क : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को पटना में थे. पटना में उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने पर आयोजित शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया. कार्यक्रम में पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने की मांग को भाव न देने पर प्रधानमंत्री की आलोचना भी हो रही है. तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. इस बीच सोशल मीडिया स्पेस में पटना यूनिवर्सिटी के बारे में लिखी गई एक टिप्पणी ने सबका ध्यान खिंचा है. ये टिप्पणी की है बिहार में पले-बढ़े और अब देश के बड़े जर्नलिस्ट रवीश कुमार ने.

रवीश कुमार के ऑफिसियल फेसबुक पेज पर आज शनिवार की सुबह, जब प्रधानमंत्री पटना आये भी नहीं थे, एक पोस्ट हुई है. इस पोस्ट में उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी को ‘वाहियात’ बताया है. कार्यक्रम में खर्च राशि को फ़ालतू कहा है. इस बात के पीछे उन्होंने अपने तर्क भी दिए हैं. प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए बनाई गई एक तस्वीर भी पोस्ट की है, और पटना यूनिवर्सिटी पर तंज कसा है. रवीश के इस पोस्ट पर कई तरह के कमेंट आये हैं. अभी पहले पढ़ें रवीश की फेसबुक पोस्ट उन्हीं के शब्दों में –

‘जिस यूनिवर्सिटी ने हम जैसे लाखों नौजवानों को अगले तीस चालीस पचास साल के लिए दरबदर कर दिया, उस वाहियात पटना यूनिवर्सिटी का शताब्दी जश्न है. फालतू के कार्यक्रम पर पैसा फूँका गया है. अनावश्यक प्रवचन होगा. नैतिक शिक्षा होगी कि युवाओं का देश है. युवाओं को आगे ले जाना है. युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है. यूनिवर्सिटी ज्ञान का केंद्र है. ठीक से सोचेंगे तो मेरी बात समझ आएगी. कोई नोटिस नहीं कर रहा है. नोटिस करने के लिए ही प्रधानमंत्री को बुलाया गया है. पचास लाख शामियाना कुर्सी पर ही उड़ गया होगा.

पटना यूनिवर्सिटी ने इस मौके पर जो दीवार घड़ी बनाई है, वो किसी भी नज़र से देखने में ख़राब है. उसका सौंदर्य बोध बता रहा है कि अगले पचास साल में भी यह यूनिवर्सिटी नहीं सुधरेगी. लगता है किसी स्टोर से पुरस्कारों में दिए जाने वाले सस्ती ट्रॉफ़ी की नक़ल मार ली गई है. ठेकेदारों ने दिमाग़ लगाया होगा.’

रवीश की इस पोस्ट पर करीब 900 कमेंट्स हैं. ज्यादातर रवीश से हमेशा खुन्नस खाए रहने वाले लोगों के कमेंट्स हैं. उन कमेंट्स की भाषा की वजह से उन्हें पब्लिश करना संभव नहीं है. फिर भी जिन कुछ लोगों ने स्वस्थ आलोचना की है,  उनमें दीपक कुमार लिखते हैं – आपको दरबदर कर दिया इसलिये पटना university आपके लिये वाहियात हो गयी! अगर यही आपको vip treatment देती तो वो आपके लिये world क्लास हो जाती !आपने अपने आपको इतना संकुचित कर दिया है की आपको ravish की report से जानने वाले मेरे जैसे हजारो लोग यही सोचते है की क्या ये वही ravish कुमार है !

राज विवेक ने लिखा है – जिस यूनिवर्सिटी ने हम जैसे लाखों नौजवानों को अगले तीस चालीस पचास साल के लिए दरबदर कर दिया, उस वाहियात पटना यूनिवर्सिटी का शताब्दी जश्न है। Ye lines digest ni ho rhi. Bahot successful log bhi nikle yha se. PU me admission hona hi apne me mayne rakhta tha mere time or sayad abhi bhi. #ravishji, m not getting u.

प्रशांत कुमार ने लिखा – इस यूनिवर्सिटी से कई IAS, IPS or IFS निकले हैं. इस तरह से वाहियात शब्द का इस्तेमाल आपको नहीं करना चाहिए. पिछले 27 साल से ये लालू, नीतीश , सुशील मोदी जी जैसे नेताओं की छत्रछाया में है, जिन्होंने अपने नीतिगत विषय मे इस विश्वविद्यालय ओर बिहार के पूरे शिक्षा तंत्र को सबसे निचले पायदान पे रखा है. वाहियात वे लोग हैं जो प्रोफेसरों की भर्ती नहीं कर पा रहे , वाहियात वो लोग हैं किसी भी भर्ती परीक्षा का फल 3-4-5 साल तक मे भी नहीं निकाल पाते. इस सब के बावजूद वर्तमान और पूर्व छात्रों की भावनायें इस विश्विद्यालय से जुड़ी हुई हैं इसीलिए वाहियात शब्द का इस्तेमाल आप मत किजिये. आप तो वैसे भी बातों को बहुत साफ साफ ओर कट टू कट से रख पाते हैं फिर ये असहनशीलता कैसे.

चंद्र जायसवाल लिखते हैं – Lalu ke time mei yehi celebration hota to Ravish ji kaseede padh rahe hote. Koi nahi kuch to log kahenge, logo ka dhanda hai kehna. अंशुल कृष्णा ने लिखा –  जहां शिक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता ,वहां बड़े लोग बुलाये जाते हैं प्रवचन देने के लिए ,और वे बड़े लोग अपनी स्पीच किसी से लिखवा कर लाते हैं बाकी एक्टर तो वो ढंग के होते ही हैं सो परफॉरमेंस दमदार हो।जाती है और तालियां भी बज जाती हैं और उन तालियों के शोर में बेचारा ज्ञान किसी कोने में बैठा सुबकता रहता है ,उसके आंसू किसी को नहीं दिखते ,उसकी चीखें किसी को सुनाई नहीं देती.

प्रदीप गुप्ता ने कहा – रविश जी क्या बात है कुछ दिनों से आपको पटना यूनिवर्सिटी की बुराई की ही न्यूज़ याद आ रही है. ऐसा तो नही मोदी जी वहाँ पर बतौर मेहमान बुलाये गए इसलिये सिर्फ खामियां दिख रही है. पहले तो आपने कभी ऐसा नही लिखा. आप एक सोच के तहत सब लिखते है और फिर आप अपने आपको न्यूट्रल कैसे कह सकते है. क्या देश मे पटना यूनिवर्सिटी का ही हाल खराब है. सर जी कृपया कांग्रेस को वापस लाने के चक्कर मे आप अपनी क्रेडिबिलिटी मत खोइए.

अमित राज लिखते हैं – रविश सर अभी तो और भी बुरा हाल है मै अभी मजूदा पटना कॉलेज हिंदी विभाग का विद्यार्थी हूँ. ठीक 2 दिन पहले सड़के सड़के मरम्मत की गयी है.. सबसे ज्यादा परेशानी यहा के उन तथाकथित विद्यार्थियों से होती है जिनको नेताओं द्वारा संरक्षण मिला हुआ है.. हॉस्टल तो है पर उन पर उन्ही का कब्जा है.. जाति और पार्टी के हिसाब से हॉस्टल बिका हुआ है.. लेकिन एक चीज़ है मेरे प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार जी ने बहुत कुछ सिखाया है ज़िन्दगी भर उनका अभारी रहूँगा…

सत्येन्द्र सिंह ने लिखा – Mr. Ravish Kumar I am not trying to troll .. seriously you need medication .. You have stooped to all time low this time, why is so much negativity man, is it just because they have invited our PM.. the University which have given a student like you, has all right to celebrate it’s century.. we need journalists like you who constantly criticize govt, this is vital in democracy for this to function properly. But nowadays you are deviating from your path and have started focusing on trivial things like celebration in a University. Save your energy and time and devote it for the betterment of country, if it comes from criticizing ruling govt, so let it be.

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