पटना में ‘विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस’ पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का हुआ आयोजन

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर पटना में मंगलवार को महिला विकास निगम और यूनिसेफ ने एक राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया. कार्यक्रम का उदघाटन महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने दीप जलाकर किया. इस मौके पर डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने कहा कि माहवारी सिर्फ महिलाओं का मुद्दा नहीं है बल्कि इसके बारे में जागरूकता फ़ैलाने के लिए पूरे समाज तथा पुरुषों को भी एक सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए. इसे एक जन भागीदारी का मुद्दा बनाना चाहिए. उन्होंने आगे बताया कि राज्य में लड़कियों के पक्ष में एक सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है. इसे हमें आगे लेकर जाने की जरुरत है. बिहार सरकार महिलाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम और और कन्या उत्थान योजना के अंतर्गत शिक्षा विभाग के द्वारा 2018-19 में कक्षा 7वीं से 12वीं के बीच की 17 लाख 37 हज़ार 973 बेटियों को सेनेटरी पैड खरीदने के लिए 300 रुपए की राशि दी गई है. इसमें शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है. वे अभिभावकों से पैसे का प्रयोग सेनेटरी पैड खरीदने के लिए प्रेरित करे. माहवारी के बारे में जागरूकता फैलाना और सेनेटरी पैड के लिए मांग को बढ़ने में शिक्षकों और जीविका के बड़े नेटवर्क की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. माहवारी प्रबंधन पर यूनिसेफ के सहयोग से राज्य कार्य योजना का निर्माण भी किया जा रहा है, जिसे सभी सम्बंधित विभागों के अनुमोदन के बाद लागू किया जाएगा.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉ. हुबे अली ने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वस्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-4) के आंकड़ों के अनुसार बिहार में 15 से 24 वर्ष की 31 फीसदी महिलाएं ही माहवारी के दौरान स्वच्छता पर ध्यान देती है. बिहार के शहरी क्षेत्रों में जहां 55.6 प्रतिशत महिलाएं माहवारी का प्रबंधन सुरक्षित और साफ़ तरीके से करती हैं. वही ग्रामीण इलाकों में ऐसी महिलाओं की संख्या केवल 27.3 प्रतिशत ही हैं. इस वर्ष भारत में यूनिसेफ का 70 वां साल है, साथ ही यह वर्ष संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते की 30 वी सालगिरह के रूप में मनाया जा रहा है. बाल अधिकार समझौते के तहत हर बच्चे को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पोषण और भागीदारी का अधिकार है.

यूनिसेफ दिल्ली की वाश विशेषज्ञ प्रतिभा सिंह ने कहा माहवारी के बेहतर प्रबंधन और इसमें सुधार के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पंच्याती राज, ग्रामीण विकास और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना जरुरी है. आन्ध्र प्रदेश महाराष्ट्र, गुजरात, छतीसगढ़ के सफल पहल का उदहारण दिया और छतीसगढ़ पहल के बारे में बताते हुए कहा कि वहां किशोर- किशोरियों की लाइफ स्किल एजुकेशन के साथ माहवारी प्रबंधन को भी सम्मिलित किया गया है जिसका काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.

वात्सल्य संस्था की मुख्य कार्यकारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम सिंह ने माहवारी के बारे में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया. इस दौरान डॉ. नीलम ने माहवारी के दौरान साफ, सूती कपडे के प्रयोग पर बल देते हुए कहा कि यह महिलाओं और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित है. जीविका के प्रशासनिक अधिकारी सह राज्य समन्वयक राजीव सिंह ने कहा कि लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत माहवारी प्रबंधन को मुख्य रूप से लिया गया है. साथ ही जीविका के 870000 समूहों में फ्लिप चार्ट की मदद से महिलाओं को माहवारी स्वछता के बारे में जागरूक किया जा रहा है.

सम्मेलन के दौरान रेड डॉट चैलेंज गतिविधि का भी आयोजन किया गया. इस गतिविधि में सभी प्रतिभागियों ने अपने हथेली पर लाल रंग का गोल निशान बना का माहवारी के बार में जागरूकता फ़ैलाने में अपना सहयोग दर्शाया. रेड डॉट चैलेंज कैंपेन के बारे में यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा की यह यूनिसेफ का सोशल मीडिया कैंपेन है जिसमें लोग अपने लाल रंग के निशान के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर MenstruationMatters #ItsTimeForAction और #RedDotChallenge के साथ डालते है.

सम्मेलन में महिला विकास निगम, समाज कल्याण विभाग, जीवीका के पदाधिकारियों के साथ ही विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ ही लगभग 100 लोगों ने भाग लिया. इस अवसर पर यूनिसेफ के वाश पदाधिकारी राजीव कुमार, महिला विकास निगम के कार्यक्रम निदेशक रूपेश सिन्हा, सुधाकर रेड्डी, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. वाई एन पाठक, जीविका के प्रशासनिक अधिकारी सह राज्य समन्वयक राजीव सिंह और व्यवहार परिवर्तन संचार पदाधिकारी सोनिया मेनन के साथ ही यूनिसेफ के सलाहकार भी उपस्थित रहें.

 

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