‘PM के ‘न्यू इंडिया’ ने ‘महान भारत’ की आस्था, मूल्यों और प्राथमिकताओं को गंभीर संकट में डाल दिया है’

लाइव सिटीज डेस्क : राजद अध्यक्ष लालू यादव के बेटे और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आज रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के बाद अपनी ‘दिल की बात’ की. उन्होंने अपने दिल की बात का शीर्षक रखा – मोदी सरकार के कारनामे और विपक्ष.

अपनी इस साप्ताहिक ‘दिल की बात’ में तेजस्वी ने बीजेपी और आरएसएस को ठग कहते हुए उन पर हमला बोला कि ये लोग सरकारी मशीनरी की आड़ में बिना डर-भय के कानून से खिलवाड़ कर रहे हैं. तेजस्वी ने कहा कि आज की तारीख में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक मशीनरी बीजेपी और संघ की गुलाम होकर रह गई है. तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के प्रायोजित गुंडे गाय, धर्म और राष्ट्रीयता के नाम पर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं. आगे आप तेजस्वी के ही शब्दों में पढ़ें –

‘मोदी सरकार के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोग भी इस बात को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं कि लगभग हर क्षेत्र और सरोकार में हताशा और निराशा की डरावनी छवियों का विश्लेषण कैसे करें? प्रधानमंत्री के तमाशे वाली ‘न्यू इंडिया’ ने ‘महान भारत’ की आस्था, मूल्यों और प्राथमिकताओं को गंभीर संकट में डाल दिया है. केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा नफरत, घृणा और भेदभाव/उत्पीड़न की विचारधारा के समर्थकों को हर प्रकार की मदद प्रदान कर प्रोत्साहित किया जा रहा है.

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उनके द्वारा प्रायोजित गुंडे गाय, धर्म, राष्ट्रवाद और आस्था-विश्वास के नाम पर निर्दोष लोगों का क़त्ल कर रहे हैं। केंद्रीय हुकूमत द्वारा पोषित ये हिंसक भीड़ निडर होकर ‘कानून के राज’ का गला घोंट रही हैं. संघ और भाजपा के द्वारा प्रोत्साहित भीड़ ने पूरे देश को डर के गणतंत्र में तब्दील कर दिया है. हर कोई यह डरावना संयोग देख सकता है कि ऐसे सभी घृणित कृत्य बीजेपी शासित राज्यों में हो रहे हैं. भोजन की विविधता, भिन्न पोशाक और अलग पूजा पद्धति/प्रतीकों की उपासना के नाम पर लोगों की हत्या हो रही है.

असहमति और विरोध के स्वर चाहे विपक्ष के हों या मिडिया के छोटे से समूह से दिल्ली की सत्ता पर बैठे लोगों को यह नागवार गुजरता है. कुल मिलाकर पुरे देश में एक भयावह अराजक माहौल है, मंदसौर और सहारनपुर जैसी दिल दहला देने वाली घटनाएँ हो रही है और प्रधान मंत्री और उनके मंत्रिमंडल के मंत्रीगण योग के तमाशे में व्यस्त हैं और मोदी फेस्ट के नाम पर तीन वर्षों के असफल कार्यकाल को अरबों रूपये के ‘ऑप्टिकल भ्रम’ से ढंकने का उत्सव मना रहे हैं.

मुझे पता है मौजूदा हालात में देश में विपक्ष भी भ्रम की स्थिति में है और भ्रामक व्यवहार, सरकारी तंत्र के डर और गलत प्राथमिकताओं के कारण विपक्ष बिखरा सा हुआ है. यह समय है जब सभी विपक्षी दलों को एक दुसरे का हाथ पकड़ कर हताशा और संकट से जूझ रहे लोगों और समुदायों के साथ खड़ा होना जरूरी है. विपक्षी पार्टियों को यह भी महसूस करना होगा कि राजनीति एक अंशकालिक उद्यम नहीं हो सकती. आप शाम में दो घंटे खेलें और बाकी समय विश्राम करें. इस तरह की राजनीती नहीं कर सकते और अगर आप ऐसा सोचते हैं तो यह लोकोन्मुख और प्रगतिशील तेवर वाली सामाजिक न्याय की राजनीती नहीं हो सकती.

ये वक्त विपक्ष के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण है लेकिन हर चुनौती का दौर अवसर भी देता है. हम सभी को हमारे महान देश और इसके संवैधानिक मूल्य, समतावादी सोच और धर्मनिरपेक्ष स्वरुप को बचाने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी.

हममे से अधिकांश दलों को यह सोचना होगा कि अवसरवादी व्यवहार या राजनीतिक जोड़तोड़ के साथ हम कुछ तात्कालिक लक्ष्य हासिल सकते हैं, सरकार बना या बिगाड़ सकते हैं लेकिन लोकोन्मुख राजनीती की चादर बड़ी होनी चाहिए. इतिहास हर पहलू को संजीदगी से देखता है उसकी समग्रता में व्याख्या करता है और कुछ समकालीन टेलीविजन एंकरों की तरह फौरी उपसंहार नहीं लिखता है.

अगर हम ऐसा करने में असफल होते हैं तो इतिहास इस बात का साक्षी होगा कि जब लोगों को प्रगतिशील और सामाजिक न्याय की धारा के इर्दगिर्द मजबूत करने की जरूरत थी तो हम शुतुरमुर्ग हो गए। जिंदा और गतिमान राजनीतिक दलों के रूप में, हम छद्म राष्ट्रवाद के आकर्षक शोर से अवरुद्ध होने वाले बारहमासी संकट में निर्दोष लोगों के दुःखों और उनकी हताशा की गुहार को अनदेखा नहीं कर सकते.

मोदी उत्सव और समर्थित मीडिया में प्रायोजित एजेंडे के इस शोर में क्या यह उचित समय नहीं है कि हम सामूहिक रूप से खड़े हों, आवाज उठाएं, संविधान की रक्षा करें और लोकतंत्र को बचाएं? अगर हम इस वक़्त क्रियाशील नहीं होंगे तो आने वाला वक्त हमें माफ़ नहीं करेगा और सिवाय अफ़सोस के अफसानों के हमारे पास कुछ नहीं बचेगा.’

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