आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए कितना तैयार है भारत?

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लाइव सिटीज डेस्क : मई में इसी साल हुए रैनसमवेयर साईबर हमलों की वजह से करीब 150 से ज्यादा देश सकते में आ गये थे. ठीक इसके डेढ़ महीने बाद पैटया नाम के साइबर हमले से दुनिया भर में हड़कंप मच गया. हालांकि इस हमले के बाद बताया गया कि भारत पर इस अटैक का ज्यादा असर नहीं हुआ. लेकिन आज तेजी से डिजिटल हो रहे भारत के सामने यह सवाल सर उठाये खड़ा है कि इन हमलों के बीच भारत कहां खड़ा है?
हाल ही के हमलों के पीछे रहा पैटया नाम के वायरस से भारत में भी कंप्यूटर प्रभावित हुए. जानकार ये भी मानते हैं कि यह रैनसमवेयर नामक वायरस हमले से ये ज्यादा खतरनाक है. लगातार हो चुके इस तरह के हमले आने वाले खतरों से सावधान रहने की चेतावनी भी दे रहे हैं. साइबर एक्सपर्ट की राय है कि देश की साइबर सुरक्षा पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘कैशलेस इकॉनमी’ जैसे अभियानों के भविष्य पर रैनसमवेयर और ‘वानाक्राई’ जैसे हमले सवाल खड़ा कर देंगे.
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सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर कानून के जानकार पवन दुग्गल ने मीडिया को इस बारे में बताया है कि ‘देश को साइबर सुरक्षा पर बहुत अधिक काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के बगैर सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘कैशलेस इकॉनमी’ जैसे महत्वाकांक्षी अभियानों पर हमेशा साइबर हमले का खतरा बना रहेगा.’
इस बारे में पवन दुग्गल आगे बताते हैं, ‘आधार कार्ड पहचान के लिए लोगों की करीब-करीब सारी जानकारियां कंप्यूटर पर सुरक्षित हैं. इस पर हमला होने से बहुत मुश्किल खड़ी हो सकती है. ये बहुत संवेदनशील मामला है.’ दुग्गल कहते हैं, ‘देश में साइबर सुरक्षा से जुड़े कानून ही नहीं हैं. अभी तक आईटी कानून- 2013 को भी अमल में नहीं लाया गया है. भारत सरकार को शीघ्र विश्व के अन्य देशों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा से संबंधित कानून का मसौदा तैयार करना चाहिए. आधार पहचान के लिए लोगों की करीब-करीब सारी जानकारियां कंप्यूटर पर सुरक्षित हैं. अगर आधार पर हमला होने से बहुत मुश्किल खड़ी हो सकती है. ये बहुत संवेदनशील मामला है.’
पवन दुग्गल जैसे जानकार बताते हैं कि, ‘हमारे देश में साइबर हमले के बारे में रिपोर्ट करने का रिवाज ही नहीं है. सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक समेत ज्यादातर कारोबारी और वित्तीय संस्थान अपने यहां हुए साइबर हमले की रिपोर्ट नहीं करते हैं, जबकि आईटी कानून- 2013 के तहत बैंकों और कंपनियों को अपने यहां हुए किसी भी साइबर हमले की रिपोर्ट करना अनिवार्य है.’
बता दें कि कंप्यूटरों को अपने नियंत्रण में लेने के बाद यह वायरस फाइलों को खोलने के बदले में यूजर्स से 300 से 600 बिटकॉइन भुगतान करने की मांग करता है. इस बारे में जानकारों का कहना है कि भारत में आईटी एक्ट काफी कमजोर हैं. हैकर्स आसानी से भारतीय साइबर कानून को टेक्नोलॉजी से मात दे देते हैं. साइबर अटैकर्स के लिए भारत सबसे सुरक्षित जगह बनता जा रहा है.
सरकार को कई ठोस कदम उठाने की जरूरत है. यहां यह जान लेना जरूरी है कि भारत में इस समय साइबर सुरक्षा से जुड़ा कोई मजबूत कानून नहीं है. ऐसे में साइबर हमला होने पर हम हैकर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकते. साइबर हमलावर के लिए एक दंडनीय अपराध घोषित करने की जरूरत है. आज भारत में साइबर अपराध करने वालों के लिए सजा का प्रावधान नहीं है. धाराएं जमानती है. साइबर अपराध के लिए कम से 7 से 10 साल का सजा का प्रावधान होना चाहिए.
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