फ़ोन की चार्जिंग, अब नो टेंशन 

लाइव सिटीज डेस्क : क्या आप बार-बार फोन चार्ज करने से परेशान हो चुके हैं? क्या आपके पास भी हमेशा एक पॉवर बैंक बैकअप के तौर पर तैयार रहता है? अगर आप स्मार्ट फोन इस्तेमाल करते होंगे तो इस परेशानी से भी आपको जूझना पड़ता होगा. लेकिन जल्द ही आपकी यह परेशानी दूर होने वाली है. आपके खुश हो जाने का वक्त बस आपके करीब ही है.

बाजार में ऐसे फ़ोन बस आने ही वाले हैं जो बिना बैटरी के भी चल सकती है. धकाधक. जी हां, अब आपको अपने फ़ोन के बैटरी की चिंता नहीं करनी पड़ेगी. बिना बैटरी के भी काम करने वाली फ़ोन बनायी जा चुकी है. आप सोच रहे होंगे कि यह जरूर ही कोई मजाक है. तो मैं आपको बता दूं कि यह कोई मजाक नहीं है. हकीकत यह है कि वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसा फ़ोन डिजाइन किया है जिसमें बैटरी है ही नहीं. जाहिर है अब आपके दिमाग में यह चल रहा होगा कि आखिर यह मोबाइल काम कैसे करेगा? या फिर इस मोबाइल के पॉवर का सोर्स क्या है? आइये आपको इसकी पूरी जानकारी विस्तार से बताते हैं.

सबसे पहले तो आपको बता दूं कि इस कमाल के मोबाइल को बनाया है यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन के शोधकर्ताओं ने. यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन में पॉल जी एलन स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर श्याम गोलाकोटा का कहना है, ‘हमने एक ऐसा फ़ोन बनाया है जो लगभग जीरो पॉवर उपयोग करता है. यह अपनी तरह का ऐसा पहला सेल फ़ोन होगा.’ आगे उन्होंने कहा कि इस फ़ोन में आवाज़ की क्वालिटी में अभी सुधार की ज़रूरत है और इस पर शोध जारी है. है न हैरत में डालने वाला फोन! आप कल्पना कीजिये कि आपके पास एक ऐसा फ़ोन है जो आपके आसपास के वातावरण से पॉवर जेनेरेट करता है और इसी पॉवर से लाइट और रेडियो वेव्स को बनाता है.

सोचकर कितना अच्छा लगता है! सोचिये जब यह फ़ोन आपके पास होगा तो कितना अच्छा लगेगा. आपकी परेशानी किस हद तक दूर हो जाएगी. आप मोबाइल को बार-बार चार्ज करने की झिकझिक से दूर रहेंगे और आपको किसी पॉवर बैंक को पास रखने और उसे चार्ज रखने की जरूरत नहीं होगी.

यह ख़बर पावर बैंक बनाने वाली कंपनियों के लिए थोड़ी चिंताजनक हो सकती है. इससे उनका धंधा मंदा पड़ सकता है. लेकिन इस फ़ोन को मार्केट में आने में अभी थोड़ा समय लग सकता है. इसके पीछे वजह यह है कि किसी भी मोबाइल फ़ोन में सबसे ज्यादा पॉवर उपयोग करने वाला प्रोसेस डिजिटल डेटा में एनालॉग ऑडियो संकेतों का रूपांतरण है. यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार इस प्रोसेस के कारण फ़ोन आसपास के पॉवर सोर्सेज के भरोसे नहीं चल सकता और इसी कमी को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने फोन के माइक्रोफोन और स्पीकर में इनकमिंग और आउटगोइंग संकेतों को इनकोड करने के लिए छोटे कंपन का उपयोग करने का एक तरीका तैयार किया है.

अफ़सोस की बात तो बस यह है कि यह फोन को एक साथ ऑडियो भेजने और रिसीव करने की अनुमति नहीं देता है. दोनों ही स्थिति में फोन के स्वामी को इसका इनकमिंग और आउटगोइंग बटन होल्ड रखना होगा. ऐसी स्थिति में यह वास्तविक सेल फोन की बजाय वॉकी-टॉकी के समान ज्यादा है.

फिलहाल, सेल फोन एक विशेष बेस स्टेशन और बोर्ड पर एक छोटे से सौर सेल द्वारा भेजे गए रेडियो संकेतों से अपनी ऊर्जा का उत्पादन करती है.

लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि सेल टावर और वाईफाई रूटर्स में उनके बेस स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं, ताकि हम अपने सामान्य, उबाऊ, बैटरी से चलने वाली सेल फोन की झिकझिक से छुटकारा पा सकें.