स्मार्ट हैं, स्टाइलिश हैं, रियल स्टार हैं बिहार की ये बेटियां…

लाइव सिटीज डेस्क : ये स्मार्ट और स्टाइलिश हैं. घर से बाहर निकल कर जॉब और पढ़ाई करती हैं. दोस्तों के साथ हैंगआउट कर खूब मस्ती भी करती हैं. भावुक होने पर रोती भी हैं. मेकअप और शौपिंग भी करती हैं. फर्राटा भर कर स्कूल और कार भी चलती हैं.

सोशल मीडिया पर हर दिन स्टेटस और सेल्फी भी पोस्ट करती हैं. लेकिन, इन सबके साथ ये अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाती हैं. ये हमारी शहर की बेटियां हैं, जो हर पल किसी भी मुश्किल हालात का भी सामना करने को तैयार रहती हैं.



आमतौर पर हमारे समाज में देखने को मिलता है कि जब भी कोई इमरजेंसी की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसमें पुरुषों को ही पहले याद किया जाता है. महिलाओं के बारे में सोचा जाता है कि वे घर के काम ही कर सकती हैं, बाहर की मुश्किल स्थिति का वो सामना नहीं कर पाएंगी.

खास जब हमारे आस-पास किसी को ब्लड की आवश्यकता पड़ जाए, तो सबसे पहले पुरुषों को ही मदद करने को कहा जाता है. लोग सोचते हैं कि महिलाएं कमजोर होती हैं, वो ब्लड डोनेट नहीं कर पाएंगी. लेकिन, इस मिथ को बेटियां तोड़ती नजर आ रही हैं.

अब वे भी खुल कर इमरजेंसी की स्थिति में अपने और अनजान हर किसी कि मदद के लिए ब्लड डोनेट करने पहुंच जाती हैं. आज हम आपको पटना में रहने वाली ऐसी ही कुछ बेटियों से मिलवाने जा रहे हैं, जो जात-पात, लिंग, धर्म, शहर सबसे उपर उठ कर जरूरत मदों को ब्लड डोनेट करती हैं.

6 दिन पहले पापा को खोया, 4 दिन बाद थी परीक्षा, फिर डोनेट किया ब्लड kritika-singh

निफ्ट पटना फैशन डिजाइनिंग की पढाई करने वाली कृतिका सिंह वैसे रहने वाली तो आगरा की हैं. लेकिन, फिलहाल वह पटना में रह कर निफ्ट से पढाई कर रही है. उनके पापा 6 दिन पहले दुनिया को अलविदा के कह कर चले गए.

इसी बीच मंगलवार को व्हाट्सअप के माध्यम से धनंजय के द्वारा कृतिका को सूचना मिली कि मोहम्मद शमशाद नामक किसी व्यक्ति को O+ ब्लड की आवश्यकता है. कृतिका की चार दिनों के बाद फर्स्ट इयर की परीक्षा थी, फिर भी उन्होंने शमशाद के लिए ब्लड डोनेट किया.

3 बार ब्लड डोनेट कर चुकी कृतिका बताती हैं कि भले ही वह शमशाद को नहीं जानती थी, लेकिन फिर भी उसने ब्लड डोनेट किया, क्योंकि वह स्वस्थ हो सके. मेरे पापा को ब्लड की जरूरत पड़ती थी, तब कुछ लोग मदद करते थे. अब तो पापा नहीं हैं, लेकिन वो कहा करते थे कि कभी किसी जरूरतमंद की मदद करने का मौका मिले तो जरूर उसकी मदद करना.

ब्लड डोनेशन के अलावा अगर मुझे और भी कोई सामजिक कार्य करने का अवसर मिलता है, तो मैं जरूर करना चाहूंगी. हम बेटियां किसी मामले में लड़कों से कम नहीं हैं. मैं दूसरे लोगों से भी कहना चाहूंगी कि अगर वो कभी किसी से ब्लड लेते हैं, तो उसे वे अपने किसी डायरी में लोन के रूप में नोट करें. ब्लड की कीमत रुपये देकर नहीं चुकायी जा सकती है, इसलिए जब भी मौका मिले खुद किसी को ब्लड डोनेट कर उनकी जान बचाएं.

मां बीमार रहती थी, खुद उठायी जिम्मेवारी, 11 बार डोनेट किया ब्लड

rupa-jhaमधुबनी जिले की रहनेवाली रूपा झा पटना में शिक्षिका हैं. वह बताती हैं कि मेरी मां बीमार रहती थीं, उन्हें ब्लड की जरूरत होती थी. कोई न कोई मदद करता था, तो ब्लड मिल जाता था, इसलिए मुझे जब भी मौका मिलता है तो मैं भी वह ऋण चुकाने में पीछे नहीं हटती हूं. अगर उस व्यक्ति को ब्लड न भी दे सकूं जिसने मेरी मां को ब्लड दिया था, तो किसी अनजान को ब्लड देकर ऋण जरूर उतरना चाहूंगी. रूपा ने अब तक 11 बार ब्लड डोनेट किया है.

15 बार ब्लड डोनेट कर चुकी हैं रश्मि, दिव्यांग बच्चों के लिए भी करती हैं काम 

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रश्मि भागलपुर जिले की रहने वाली हैं, लेकिन फिलहाल पटना के सीआरसी में जॉब करती हैं. वह दिव्यांग बच्चों को ट्रेनिंग देती हैं. रश्मि बताती हैं कि उनके एक दोस्त की दुर्घटना में मौत हो गयी थी.

उन्हें सही समय पर ब्लड नहीं मिल पाया था. कोई मदद कर देता था, तो जरूरत पूरी हो जाती. इसलिए मुझे जब भी मौका मिलता है किसी को ब्लड डोनेट करने का तो मैं जरूर करती हूं. कई बार हमें अनजान लोग ब्लड देते हैं तो हमारी जान बचती है. ऐसे में हमें भी अपना फर्ज जरूर निभाना चाहिए.

हालांकि पहली बार जब ब्लड डोनेट किया तो सबको हैरानी हुई कि मैं लड़की होकर कैसे ब्लड डोनेट कर रही हूं. लेकिन, मैंने सबको बताया कि हम बेटियां भी किसी से पीछे नहीं हैं. हर मुश्किल हालात के लिए हम भी तैयार रहते हैं. मैंने अब तक 15 बार ब्लड डोनेट किया है. 

बैंक में करती हैं नौकरी, मौका मिलते ही करती हूं ब्लड डोनेट 

pinkiपटना में बैंक ऑफ़ इंडिया में कार्यरत पिंकी बताती हैं कि किसी को ब्लड देकर जो ख़ुशी मिलती है, वह सच में लाजवाब होती है. मैंने जब पहली बार ब्लड डोनेट किया था, मुझे बहुत अच्छा लगा था.

अन्य लोगों से भी कहना चाहूंगी ब्लड डोनेट कर के देखिये अच्छा लगेगा. जॉब की वजह से टाइम थोडा कम मिलता है फिर भी जब अवसर मिलता है ब्लड डोनेट करने जरूर पहुंच जाती हूं.

राजेश्वरी ने ब्लड डोनेट कर सेलिब्रेट किया बर्थडे 

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भागलपुर की रहने वाली राजेश्वरी रॉय बीकॉम सेकंड इयर की स्टूडेंट हैं. जैसे ही उनकी उम्र 18 साल हुई, उन्होंने ब्लड डोनेट करने का सोचा. राजेश्वरी बताती हैं कि इसी साल जुलाई में अपने बर्थडे के अवसर पर मैंने ब्लड डोनेट करने का प्लान किया था, लेकिन उसके कुछ दिन पहले ही मुझे किसी जरूरतमंद को ब्लड डोनेट करने का अवसर मिला.

मैंने ब्लड डोनेट किया, सच कहती हूं बहुत अच्छा लगा. हम बेटियां भी कमजोर नहीं, मजबूत हैं और इमरजेंसी के हालात में भी हम परिस्थितियों को हैंडल करना जानते हैं.

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