बिहार कब हंसता है-कब रोता है, सबसे पहले बताते हैं पटना के ये 15 पत्रकार

पटना : आज बातें पटना के 15 पत्रकारों की. सभी के सभी हिंदी पत्रकारिता से. अंग्रेजी के पत्रकारों की चर्चा कभी और. बिहार के बिना देश की राजनीति की दशा-दिशा तय नहीं होती. सो, यह जानना जरुरी है कि बिहार को सबसे पहले पढ़ता कौन है. ख़ुशी के क्षण में भी और गम के पहर में भी. आज जिन पत्रकारों की बातें हो रही हैं, सभी कन्वेंशनल मीडिया के माध्यम से जुड़े हैं. मतलब प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दुनिया से.

अखबार के संपादकों की चर्चा आज नहीं है. विशुद्ध पत्रकारों की बात है, जो रोज लिखते-पढ़ते हैं. डिजिटल मीडिया के सबसे तेज पत्रकारों की चर्चा भी अभी नहीं की गई है. इस चर्चा से आज लाइव सिटीज मीडिया ने स्वयं को भी अलग रखा है.

सुरेन्द्र किशोर बिहार के वरिष्ठ पत्रकार हैं. आज, जनसत्ता, हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के साथ लंबे अरसे तक जुड़े रहे. अभी स्वतंत्र लेखन करते हैं. सुरेन्द्र किशोर के आलेख देश-दुनिया में छपते हैं. बिहार में कहा जाता है कि सुरेन्द्र किशोर के पास ख़बरों की कतरन का जितना बड़ा संसार है, वैसा किसी दूसरे के पास नहीं. इसलिए जो लिखते हैं, उसमें रेफरेंस तो दिखता ही है, तथ्यों प्रमाणिकता भी अकाट्य होती है.

सुरेन्द्र किशोर, वरिष्ठ पत्रकार

मनीष कुमार NDTV के बड़े रिपोर्टर हैं. फैमिली बैकग्राउंड भी शानदार जर्नलिज्म का है, सो बिहार की नब्ज को तेजी से टटोल लेते हैं. बिहार की कई बड़ी रिपोर्टिंग मनीष के नाम हैं. माना जाता है कि मनीष कुमार ने बोल दिया है, तो सच ही बोलेंगे. NDTV के नेचर के मुताबिक़ ख़बरों में झोल कम, सीधी बातें अधिक होती हैं.

मनीष कुमार, NDTV

सुजीत कुमार झा सबसे तेज माने जाने वाले चैनल ‘आज तक’ के रिपोर्टर हैं. सबसे पहले के साथ-साथ सभी तरीकों के खुलासे भी करते रहते हैं. जन्म के साथ मन से बिहारी हैं, इसलिए जब बिहार को कोई बात चुभती है, तो सुजीत सबसे आगे निकल रिपोर्टिंग करते दिखते हैं.

सुजीत कुमार झा, आज तक

अरुण अशेष संघर्ष से पैदा हुए पत्रकार हैं. जनशक्ति, आज, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर के साथ लंबी पारी खेली है. पोलिटिकल रिपोर्टिंग पर विशेष पकड़ है. अरुण अशेष के बारे में बताया जाता है कि जब वे मिथिला से पटना आये थे, तो पत्रकार बनने के पहले गांधी मैदान के बांकीपुर बस डिपो में सुबह अखबार बेचा करते थे.

अरुण अशेष, वरिष्ठ पत्रकार

प्रकाश कुमार टीवी की पत्रकारिता में बिहार के जाने-माने नाम हैं. ABP न्यूज़ से जुड़े हैं. प्रकाश की रिपोर्टिंग में सदैव जुझारूपन दिखा है. कई ऐसे मौके आये हैं, जब प्रकाश की ख़बरों ने बिहार की सत्ता में कोहराम मचा दिया है.

प्रकाश कुमार, ABP न्यूज़

विनोद बंधु बिहार के सबसे बड़े समाचार पत्र समूह ‘हिन्दुस्तान’ के राजनैतिक संपादक हैं. मधुबनी से आते हैं. लंबा अनुभव है. देश के कई प्रदेशों में काम कर चुके हैं. जाहिर तौर पर जब राजनैतिक संपादक हैं, तो बिहार की राजनीति के थर्मामीटर को तेजी से पढ़ लेते हैं.

विनोद बंधु, हिन्दुस्तान

प्रभाकर कुमार नेटवर्क 18 के साथ-साथ ETV बिहार-झारखंड के मुखिया हैं. ख़बरों की सबसे मजबूत नेटवर्किंग के लीडर भी. प्रभाकर ट्विटर पर भी खासे पॉपुलर हैं. बड़ी बात यह कि कुछ महीने पूर्व बिहार में ETV की नैया जब डगमगा रही थी, तो प्रभाकर ही थे, जिसने सबकुछ समय रहते संभाल लिया.

प्रभाकर कुमार, नेटवर्क 18

कुमार प्रबोध का मतलब ही खबर है. खबर भी कमजोरी से नहीं, बुलंदी के साथ. सामने वाला कठिन सवालों से हक्का-बक्का हो जाता है. प्रबोध ZEE टीवी बिहार-झारखंड के संपादक कुछ ही माह पहले बने हैं. फिर इसे उतना आगे ले गए कि अब सब चैनल को जानने और नोटिस करने लगे हैं.

कुमार प्रबोध, ZEE बिहार-झारखंड

कन्हैया भेलारी तो पहले अंग्रेजी के पत्रकार थे, लेकिन अब हिंदी में भी सबों को ठांसने लगे हैं. ठेठ बिहारी शब्दों का प्रयोग इनकी पहचान बनती जा रही है. पहले The Week के बिहार रिपोर्टर थे, पर अब कई हिंदी संस्थानों के लिए लगातार लिख रहे हैं. भोजपुरी मुहावरों का खुला प्रयोग करते हैं.

कन्हैया भेलारी, स्वतंत्र पत्रकार

अविनाश चन्द्र मिश्र कभी ‘आज’ अखबार के स्थानीय संपादक थे. बाद में अपनी पत्रिका ‘समकालीन तापमान’ का प्रकाशन शुरू किया. बिहार से प्रकाशित होने वाली पत्रिकाओं में ‘समकालीन तापमान’ ऐसी अकेली पत्रिका है, जिसकी गूंज बिहार में सुनी-सुनाई जाती है.

अविनाश चन्द्र मिश्र, समकालीन तापमान

अमिताभ ओझा ने शुरुआत अखबारों के लिए क्राइम रिपोर्टिंग से की थी, लेकिन बाद में न्यूज़ 24 के साथ जुड़ गए. अमिताभ ख़बरों को ब्रेक करना और तह तक जाने के लिए पहचाने जाते हैं. फेसबुक पर भी खूब एक्टिव रहते हैं.

अमिताभ ओझा, न्यूज़ 24

संतोष सिंह बिहार-झारखंड के चैनल कशिश न्यूज़ के रिपोर्टिंग हेड हैं. संतोष ने ब्लाक रिपोर्टिंग से शुरुआत कर कम समय में इतनी लंबी दूरी तय की है. ख़बरों की पड़ताल करते हैं और अंजाम तक पहुंचाते हैं.

संतोष सिंह, कशिश न्यूज़

मधुरेश ने पत्रकारिता की शुरुआत ‘आज’ से की थी. आगे दैनिक जागरण होते हुए अभी दैनिक भास्कर में हैं. मानवीय संवेदनाओं को ठीक से समझने वाले पत्रकार माने जाते हैं. मधुरेश के बारे में कहा जाता है कि लिखने बैठ गए, तो कंप्यूटर भी हांफने लगता है. फिर स्पेस के हिसाब से वे ख़बरों को संतुलित करते हैं.

मधुरेश, दैनिक भास्कर

अरुण कुमार पांडेय आज, हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर से होते हुए रिटायरमेंट के बाद संवाद एजेंसी ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से जुड़े हैं. न सिर्फ बिहार की राजनीतिक रिपोर्टिंग को धार देने वाले पुराने पत्रकार हैं, अपितु ट्रांसफर-पोस्टिंग की खबर को चलन में लाने वाले पहले रिपोर्टर भी माने जाते हैं.

अरुण कुमार पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार

भुवनेश्वर वात्स्यायन ‘दैनिक जागरण’ के सीनियर रिपोर्टर हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बीट को देखते हैं. जाहिर तौर पर, सरकार की खबर सबसे पहले पहुंचती है. ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पूरे बिहार को घूम चुके हैं. VVIP कवरेज का जिम्मा भी संभालते हैं.

भुवनेश्वर वात्स्यायन, दैनिक जागरण

 

About Anjani Pandey 690 Articles
I write on Politics, Crime and everything else.

4 Comments

  1. इन सभी पत्रकारों का आपके द्वारा किया गया विश्लेषण शत प्रतिशत सही है भैया लेकिन डीडी न्यूज़ या डीडी न्यूज़ के संवाददाताओं का भी एक नाम होता तो चार चांद लगता क्योंकि सभी पत्रकार सरकारी चैनल से ही संबंधित हैं। इसमें एक भो सरकारी संस्था दूरदर्शन से किन्हीं का नाम नहीं है भैया।

    • ये तो ऐसा लगता है कि या तो लेखक औरों को नहीं जानते या फिर इन्हें एक परिचित दायरे के भीतर निर्धारित व्यक्तित्व की ही स्तुति गाथा प्रस्तुत करनी रही होगी।

    • ये तो ऐसा लगता है कि या तो लेखक औरों को नहीं जानते या फिर इन्हें एक परिचित दायरे के भीतर निर्धारित व्यक्तित्व की ही स्तुति गाथा प्रस्तुत करनी रही होगी।

  2. आज बिहार में ऐसे भी अनेक पत्रकार हैं जो बिहारी पाठकों को सूबे की गतिविधियों से अन्यत्र बड़ी शिद्दत से नियमित रूबरू कराते हैं।पर लेखक शायद सीमित दायरे के अंदर ही पत्रकारों की स्तुति गाथा लिखने को बाध्य रहे होंगे

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