15वें वित्त आयोग की टीम का बिहार दौरा रद्द, एनके सिंह के नेतृत्व में 10 जुलाई से था कार्यक्रम

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार को निराश करने वाली खबर मिल रही है. 15वें वित्त आयोग की 22 सदस्यीय टीम का बिहार दौरा रद्द हो गया है. यह टीम 10 जुलाई से बिहार विजिट करने आने वाली थी. लेकिन सूचना के मुताबिक यह दौरा अब कैंसिल कर दिया गया है. हालांकि दौरा रद्द होने की कोई स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है. लेकिन माना जा रहा है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार की लगातार विशेष राज्य के दर्जे की मांग भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है. दरअसल, उन्होंने हाल ही में वित्त आयोग की बैठक में अपनी मांग तो रखी ही थी. साथ ही 2 पन्नों में उचित कारण देते हुए भी बिहार को स्पेशल स्टेटस देने की मांग की थी. बता दें कि 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह हैं. अब यह टीम बिहार का दौरा कब करेगी इसकी जानकारी नहीं मिली है.

बता दें कि इस दौरे के क्रम में टीम सभी राजनीतिक दलों, पंचायती राज संस्थानों, नगर निकायों तथा व्यापार, वाणिज्य व उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने वाली थी. इस दौरान 12 जुलाई को बिहार सरकार द्वारा आयोग के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया जाना था तथा ज्ञापन भी सौंपा जाना था. बता दें कि यह टीम 10 जुलाई से 12 जुलाई तक का बिहार को विजिट करने वाली थी. लोक संवाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार , बिहार, पटना, जमीनी विवाद, किसान, फसल, बाढ़, स्वस्थ्य

 

वित्त आयोग के अध्यक्ष एऩ क़े सिंह के नेतृत्व में आ रही इस टीम में आयोग के सदस्य शशिकांत दास, डॉ़ अनूप सिंह, डॉ़ अशोक लाहिड़ी एवं डॉ़ रमेश चंद तथा अन्य पदाधिकारी शामिल हैं. वित्त आयोग की टीम के प्रस्तावित दौरे एवं उन्हें सौंपे जाने वाले ज्ञापन को लेकर राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने संबंधित पदाधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत विचार-विमर्श भी किया था.

वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर राज्यों को ‘डिवॉलूशन’ की राशि का आवंटन करने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बिहार को लाभ मिलेगा. इससे पूर्व राज्यों को वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर संसाधनों का वितरण किया जाता था. पूर्व IAS एनके सिंह संभालेंगे 15वें वित्त आयोग को, बनाया गया चेयरमैन

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सुशील मोदी ने कहा है कि राज्य सरकार 11वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप ही बिहार को राशि आवंटित करने की मांग करेगी. 14वें वित्त आयोग द्वारा राज्य आपदा प्रबंधन मद में बिहार को मात्र 2,591 करोड़ रुपये देने की अनुशंसा की गई, जबकि महाराष्ट्र को 8,195 करोड़ रुपये एवं राजस्थान को 6,094 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की गई. बिहार को प्रतिवर्ष बाढ़ एवं सुखाड़ का सामना करना पड़ता है. वर्ष 2017 में आई बाढ़ से निपटने के लिए 5000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े.

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उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा था कि राज्य सरकार इस मद में संपूर्ण राशि केंद्र सरकार द्वारा वहन करने की मांग करेगी. राज्य सरकार बिहार में कृषि रोड मैप एवं सात निश्चय के तहत विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, पुरातात्विक स्थलों के विकास, जलवायु परिवर्तन सहित अन्य विषयों के लिए भी राज्य केंद्रित विशेष अनुदान की मांग करेगी.