19502 शिक्षकों की बहाली का अभी और करना होगा इंतजार, जानिए क्यों

प्रतीकात्मक फोटो

लाइव सिटीज डेस्क : बिहार में शिक्षक बहाली का इंतजार कर रहे युवाओं को इस खबर से झटका लग सकता है. दरअसल, हाईस्कूल और प्लस टू स्कूलों में 19502 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर ग्रहण लग गया है . कारण भी शिक्षकों से ही जुड़ा है. नियोजित शिक्षकों के सामान काम सामान वेतन का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. जिस कारण 19502 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पा रही है.

नियुक्ति प्रक्रिया के दोबारा शुरू होने को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक अब 12 जुलाई तक का इंतजार बढ़ गया है. 12 जुलाई को सु्प्रीम कोर्ट में इस मामले पर फैसला आने के बाद ही नियुक्ति पर विचार हो सकेगा. पांच हजार से अधिक उत्क्रमित उच्च और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की काफी कमी है. जिसकी वजह से छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है. हाईस्कूलों में खास कर गणित, अंग्रेजी और विज्ञान के शिक्षकों की काफी कमी है.

पिछले वर्ष ही शिक्षा विभाग ने गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, संस्कृत व हिंदी सहित विभिन्न विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पदवर्ग समिति से स्वीकृति ले ली थी. पिछले वर्ष शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के बाद केंद्रीयकृत तरीके से बहाली की प्रक्रिया पूरी होनी है.

खुशखबरी : बिहार में 19502 शिक्षकों की बंपर बहाली

पहले बहाली नियोजन इकाई के माध्यम से होनी थी. विद्यालय शिक्षक चयन आयोग के माध्यम से विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जिस प्रकार विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन किया जा रहा है, उसी प्रकार विद्यालय शिक्षक चयन आयोग गठित करने की बात हो रही है.

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राज्य में 5391 माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल हैं. मध्य विद्यालयों को उत्क्रमित कर बने हाईस्कूलों में शिक्षकों की काफी कमी है. इन स्कूलों में मध्य विद्यालय के बीएससी और इससे अधिक डिग्रीधारी और योग्य शिक्षकों से पढ़ाई की व्यवस्था की गई है, लेकिन इनकी भी संख्या काफी कम है.

प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए हाल में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने टीईटी लेने के बाद रिजल्ट भी जारी कर दिया है, लेकिन हाईस्कूल और प्लस टू स्कूलों में बहाली के लिए एसटीईटी (सेकेंडरी शिक्षक पात्रता परीक्षा) नहीं ली गई है. बहाली में पारदर्शिता के लिए भी उपाय किए गए है.

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