चारा घोटाला: ये सवाल जो लालू का पीछा कर रहे हैं…

लाइव सिटीज डेस्क : चारा घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद कल  सीबीआई कोर्ट में पेश होने रांची पहुंचे थे. सीबीआई कोर्ट में उनसे कई सवाल पूछे गए जिसका जवाब लालू प्रसाद ने दिया.  सीबीआइ के विशेष कोर्ट में लालू यादव से पूछे गए कुछ सवाल और उनके द्वारा दिए गए जवाब इस प्रकार रहे. 

सवाल: 1990 से 97 तक मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री थे?

जवाब : इस समय मैं मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री था. इस बीच राष्ट्रपति शासन भी लगा था. राष्ट्रपति शासन के दौरान पद पर नहीं था.

सवाल: कई राजनेताओं के समूह दबाव में काम कर रहे थे. भारतीय संविधान की प्रजातांत्रिक व्यवस्था में राजनेताओं के समूह दबाव में काम करते थे?

जवाब : लोकतंत्र में कोई दबाव नहीं होता। चुनकर लोग आते हैं. मेरे प्रति भी कोई राजनीतिक समूह का दबाव कार्य नहीं कर रहा था.

सवाल : 1992-93 की अवधि में आपने अन्य सहयोगी आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक षडयंत्र रचा और उन्हें फर्जी आवंटन के आधार पर 37 करोड़ 62 लाख 79 हजार 883 रुपये की अवैध निकासी करने का अवसर दिया?

जवाब : यह गलत है, बिलकुल बेबुनियाद है. मैं किसी षडयंत्र में नहीं था.

सवाल : ऐसा प्रतीत होता है कि आपने जान बूझकर अवैध निकासी होने दी. इसका संरक्षण दिया. ताकि राजनेताओं को सुविधा मुहैया कराई जाए और कुछ हिस्सा राजनेता, नौकरशाहों व पशुपालन के उच्च पदाधिकारियों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि घोटाले को बचाया जा सके?

जवाब : मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री के रूप में मुङो इसकी जानकारी नहीं थी कि जाली बिल बनाकर राशि की निकासी कर रहे हैं. पहली बार 31 जनवरी 1996 को वित्त सचिव वीएस दुबे ने संचिका के माध्यम से सूचित किया तब मैंने स्टेप लिया. वीएस दुबे सीबीआइ के गवाह भी हैं. मुङो षडयंत्र के तहत सीबीआइ द्वारा फंसाया गया.

सवाल : मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री पद पर रहते हुए आपके समक्ष कैग की रिपोर्ट सौंपी गई थी, लेकिन आपने षडयंत्र के तहत नजरअंदाज कर दिया जो आपूर्तिकर्ता, विपक्षी नेता, पशुपालन अधिकारी और पैक (पीएसी-) चेयरमैन को अभियुक्त बनाता है?

जवाब : पूरे देश में सिस्टम है. राज्यों में कैग का गठन होता है. कैग ने रिपोर्ट 1993 से भेजनी शुरू की. यह रिपोर्ट राज्यपाल (गर्वनर) को भेजी गई. वहां से मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजी गई. मुख्यमंत्री कैबिनेट को भेजता है. इसके बाद पैक को भेजा जाता है. उस रिपोर्ट में कहीं भी कपटपूर्ण निकासी की बात नहीं है. ज्यादा खर्च को समायोजित किया गया था.

सवाल : दयानंद कश्यप को विस बीस सूत्री कार्यक्रम का उपाध्यक्ष बनाया. उसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया और उनसे आपकी टेलीफोनिक बातें भी होती थीं?

जवाब: किसी दयानंद कश्यप को नहीं जानता. विस बीस सूत्री कार्यक्रम के चेयरमैन को राज्यमंत्री का दर्जा पहले से प्राप्त है. मैंने दीनदयाल कश्यप का नाम लिखा था. उसे काटकर संचिका में दयानंद कश्यप किया गया था. यह कार्य मुझपर आरोप लगाने वाले सीबीआइ ने किया होगा. दयानंद कश्यप या एसबी सिन्हा से बातें नहीं हुईं. बिहार के मुख्यमंत्री का सचिवालय था. फोन लगा था. कोई भी मुख्यमंत्री सचिवालय का फोन सीधे नहीं उठाता. निजी सचिव या पीए बात करता है. इसकी सूचना आती है. इनकमिंग कॉल आया, होगा तो मेरी जानकारी में नहीं है.

सवाल : वित्त मंत्री ने गैर योजना खर्च और पशुपालन के शीर्ष 2403 के संबंध में आंकड़ों का संकलन किया था, जो ज्यादा खर्च दर्शाता है. कैग रिपोर्ट फर्जी भुगतान को दर्शाती है और कार, स्कूटर, टैक्सी से माल ढोने की बात भी जाहिर होती है. लेकिन, आपने गलत करार देकर सुधार की बात कही?

जवाब : यह आरोप गलत है.

सवाल : तत्कालीन पशुपालन मंत्री रामजीवन सिंह ने सीबीआइ जांच की मांग की थी, लेकिन आपने आपराधिक षडयंत्र के तहत डॉ. जगन्नाथ मिश्र और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जांच को भटकाने की नीयत से जांच की जिम्मेदारी क्षेत्रीय विकास आयुक्त को दे दिया, जो डॉ. जगन्नाथ मिश्र के रिश्तेदार थे?

जवाब : मेसो एरिया का फंड भारत सरकार से आता था. वह सीधे डीडीसी को मिलता था. रामजीवन सिंह ने 1984-86 तक के कार्य की जांच सीबीआइ से कराने का प्रस्ताव दिया था. यह मेसो एरिया से संबंधित था. मैंने मुख्य सचिव से राय मांगी थी. उन्होंने परामर्श दिया कि वे सीबीआइ निदेशक से बात किए. सीबीआइ ने सलाह दी कि सीआइडी की टीम बनाकर जांच करा रहे हैं. तब मैंने 13 नवंबर 1990 को सीआइडी जांच का आदेश दिया था. इसकी संचिका भी न्यायालय में समर्पित है. 

सवाल : जब रामजीवन सिंह सीबीआइ जांच की मांग की, तब आपने उन्हें पद से हटा दिया और विद्यासागर निषाद, भोलाराम तूफानी, चंद्रदेव प्रसाद वर्मा आदि के साथ मिलकर 1990-93 की अवधि में षडयंत्र किया. लेकिन, अन्य विभागों में इतनी जल्दी तबादला नहीं होता?

जवाब : आरोप गलत है. यह मुख्यमंत्री का अधिकार है. मंत्रियों का विभाग बंटवारे व विभाग बदलने का. अच्छे काम करनेवाले मंत्री को प्रोत्साहित करे और जो काम नहीं कर रहे हैं, उन्हें बर्खास्त करने का भी अधिकार होता है. इसके बाद भी रामजीवन सिंह मंत्री बने रहे थे.

सवाल : आपकी पुत्री के नामांकन के लिए डॉ. आरके राणा ने 40,500 का बैंक ड्राफ्ट मायो कॉलेज के फेवर में बनवाया?

जवाब : हमारी पत्नी राबड़ी देवी ने 81 हजार रुपये बिहार भवन के ओएसडी कारू राम को बच्चियों के नामांकन के लिए दिए. 40,500 और 40,500 का दो बैंक ड्राफ्ट बनाया गया। एक व्यक्ति के नाम पर एक ही बैंक ड्राफ्ट बनवाया जा सकता था. ऐसे में एक बैंक ड्राफ्ट कारू राम ने बनवाया और दूसरा आरके राणा ने.

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