गरीबों का इलाज नहीं किया तो इन अस्पतालों पर लगा 47 करोड़ का जुर्माना

लाइव सिटीज डेस्क : अक्सर गरीब बेहतर इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं. एक तो सरकारी अस्पताल की व्यवस्था लचर दूसरी ओर निजी अस्पताल की महंगी फीस के बीच हर गरीब पिस जाते हैं. लेकिन दो बड़े निजी अस्पतालों को गरीबों का इलाज नहीं करना काफी महंगा पड़ा. आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का मुफ्त इलाज नहीं करने पर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय ने दो निजी अस्पतालों पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीएसआरआइ) व शांति मुकुंद अस्पताल पर 46,91,19,921 रुपये का जुर्माना ठोका है.

महानिदेशालय ने दोनों अस्पतालों को पिछले सप्ताह नोटिस भेजकर जुर्माना भरने का निर्देश दिया है. इसके अलावा निजी क्षेत्र के दो अन्य बड़े अस्पतालों को भी नोटिस जारी करने की तैयारी है.

महानिदेशालय का कहना है कि सरकार ने निजी अस्पतालों को रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराई गई है उन्हें ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे के तहत गरीब मरीजों के इलाज के लिए 10 फीसद बेड आरक्षित रखने व ओपीडी में 25 फीसद मरीजों का मुफ्त इलाज करने का प्रावधान है, लेकिन निजी अस्पताल इसका पालन नहीं करते.

महानिदेशालय द्वारा शांति मुकुंद अस्पताल को जारी नोटिस में कहा गया है कि जमीन आवंटन की शर्त में यह स्पष्ट जिक्र है कि इस अस्पताल में मुफ्त इलाज के लिए 25 फीसद बेड आरक्षित रहेगा। इस अस्पताल पर करीब 56.10 करोड़ और पीएसआरआइ पर 26.97 करोड़ जुर्माना तय किया गया था.

बाद में अस्पतालों के आग्रह पर कोर्ट द्वारा गठित विशेष कमेटी ने जुर्माना राशि की समीक्षा की। इस तरह महानिदेशालय ने शांति मुकुंद अस्पताल को 36,30,58,938 रुपये व पीएसआरआइ को 10,60,80,983 रुपये जुर्माना भरने का निर्देश दिया है.

स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय के महानिदेशक डॉ. कीर्ति भूषण ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा 2007 में दिए गए आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई है. इन दोनों अस्पतालों में सिर्फ दो-तीन फीसद मरीजों का ही मुफ्त इलाज हुआ है.

एक महीना पहले भी उन्हें नोटिस दिया गया था. उस नोटिस पर अस्पतालों ने कोई जवाब नहीं दिया. इसलिए उन्हें दोबारा नोटिस भेजा गया है. बहरहाल बताया जा रहा है कि इस नोटिस के बाद अस्पताल प्रबंधनों ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर राहत देने की मांग की है.