74 हजार बिहारियों की नागरिकता पर असम में मंडरा रहा संकट, नीतीश सरकार ने अब तक नहीं भेजी रिपोर्ट

लाइव सिटीज डेस्क : असम NRC ड्राफ्ट के आने के बाद 40 लाख लोगों को देश निकाले का डर बरक़रार है. हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ऐसे लोगों को घबराने को नहीं कहा है. उन्हें दोबारा से अप्लाई करने को कहा है. लेकिन इन 40 लाख लोगों में 74 हजार लोग बिहार से हैं. जो वर्षों पहले रोजी-रोटी की तलाश में वहां गए थे और वहीँ के हो गए. पर, NRC आने के बाद अब इनकी नागरिकता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. इस संबंध में असम सरकार ने कई महीने पहले ही बिहार सरकार से बातें भी की थी. असम सरकार ने बिहार सरकार से आग्रह किया था कि इन लोगों की नागरिकता प्रमाणित कर रिपोर्ट जल्द भेजा जाए. असम की सरकार ने कहा था कि इस रिपोर्ट के आधार पर ही उन सभी के नाम असम में तैयार हो रही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में दर्ज किया जाना हैं. लेकिन अभी तक  बिहार सरकार ने इन नागरिकों की कोई रिपोर्ट असम सरकार को नहीं भेजी है.

असम सरकार ने जिन 74 हजार आवेदकों की सूची भेजी है, उसमें सर्वाधिक आठ हजार सारण और फिर उसके बाद करीब साढ़े पांच हजार लोग पूर्वी चंपारण के हैं. पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, वैशाली और आरा के भी हजारों आवेदक हैं. जिन लोगों ने अपने आवेदन के साथ हाई स्कूल की परीक्षा पास करने के सर्टिफिकेट लगाए हैं, ऐसे चार हजार से अधिक आवेदनों को प्रमाणित करने की जिम्मेदारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भेजी गई है.

सूत्रों के मुताबिक असम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए दावे की दूसरी सूची जारी होने वाली है, लेकिन बिहार के किसी जिले से अभी तक नागरिकता को प्रमाणित कर असम सरकार को नहीं भेजा है. ऐसे में वहां से हजारों लोगों के फोन उनके परिजनों और सरकार के आला अफसरों के पास आने शुरू हो गए हैं.

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मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर असम सरकार मार्च 1971 के बाद असम में आकर बसे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार कर रही है. इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से वहां जाकर रह रहे लोगों की नागरिकता प्रमाणित करने के लिए संबंधित राज्यों को सूची भेजी है. कई राज्यों ने यह सूची प्रमाणित करके भेज भी दी है, लेकिन बिहार के जिलाधिकारियों ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.

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बताया जाता है कि असम से आई बिहारी लोगों की सूची को जमीन- जायदाद के दस्तावेजों की आवश्यकता होगी इसलिए सरकार ने यह जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को दी है. विभाग ने नागरिकता से जुड़े आवेदन विभिन्न जिलों और संबंधित संस्थाओं को भेज दिए हैं, लेकिन अभी तक कही से भी नागरिकता प्रमाणित कर रिपोर्ट नहीं भेजी गई है.

इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम नारायण मंडल ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सात अगस्त को समीक्षा के लिए बैठक बुलाई थी. समीक्षा के बाद प्रधान सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द आवेदकों की नागरिकता प्रमाणित कर सरकार उपलब्ध कराएं.

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