पटना की HIV पीड़िता का गर्भपात संभव या नहीं, AIIMS की रिपोर्ट से होगा तय

लाइव सिटीज डेस्क : पटना की HIV पॉजिटिव गर्भवती का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुँच चुका है. 35 वर्षीय इस महिला का गर्भपात होना चाहिए या नहीं इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने महिला के गर्भपात करने को लेकर AIIMS के डॉक्टरों की एक मेडिकल टीम गठित करने के आदेश दिए हैं.  यह टीम इस बात की जांच करेगी कि क्या इस बेसहारा महिला का गर्भ वर्तमान समय में गर्भपात के लायक है या नहीं. 

दरअसल, पटना की सड़कों पर रह रही यह बेसहारा महिला HIV पॉजिटिव है. इसके साथ पटना की सड़कों पर किसी ने बलात्कार कर लिया. जिसके बाद आज यह महिला 26 सप्ताह की गर्भवती है.

सुप्रीम कोर्ट में दीपक मिश्रा की अगुवाली वाली बेंच ने कहा कि महिला पहले ही बहुत दर्द झेल चुकी है. अब उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं होना चाहिए. AIIMS टीम को यह निर्देश दिया गया है कि लेटेस्ट 6 मई तक महिला की मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे.  तब तक सामाजिक संस्था NGO कोशिश इनका ख्याल रखें. यह महिला रेप की शिकार होने के बाद पटना के शांति कुटीर में रहती है. इसके लिए सरकार की ओर से पेश अपर सोलिसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा और तुषार मेहता को निर्देश दिया कि इस पीड़िता को कोई दर्द नहीं होना चाहिए. इनका पूरा ख्याल रखा जाए. इनके ट्रेवल और खाने-पीने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.  

बता दें कि इससे पहले पीड़ित महिला के गर्भपात कराने को लेकर पटना हाई कोर्ट में भी याचिका डाली गई थी. जिस पर कोर्ट ने IGIMS की एक मेडिकल टीम गठित कर महिला के स्वास्थ्य की जांच करने का निर्देश दिया था. 17 मार्च को कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई कि अबोर्शन में सर्जिकल प्रोसेस से गुजरना होगा. इस दौरान महिला के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा. अत्यधिक खून का स्राव और बेहोशी जैसे हालात उत्पन्न हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में यह संभव नहीं है.

इसके बाद सामाजिक संगठन कोशिश ने महिला के गर्भपात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई. जिसके बाद कोर्ट ने AIIMS टीम को इसकी जिम्मेवारी सौंपी है.

यह भी पढ़ें- एक तो विक्षिप्त, उपर से एचआइवी ग्रस्त 21 हफ्ते की गर्भवती, चाहती है गर्भपात…