चुनाव के रिजल्ट को लेकर बढ़ीं नेताओं की धड़कनें, यही रात अंतिम, यही रात भारी

लाइव सिटीज, ज्ञान सिंह, पटना :  भगवान बुद्ध, महावीर, गुरु गोविंद सिंह की इस पावन धरती पर विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी धड़कनें तेज हो गई हैं. मंगलवार किन-किन के लिए मंगलकारी होगा, यह हर किसी के मन में यक्ष प्रश्न की तरह घूम रहा है. नीतीश कुमार की फिर से ताजपोशी होगी अथवा तेजस्वी यादव सत्तासीन होंगे, इसे लेकर नेताओं ही नहीं, लोगों के बीच खूब माथापच्ची हो रही है. सबों के लिए आज की रात भारी लग रही है. रवींद्र जैन का फेमस गीत ‘यही रात अंतिम यही रात भारी’ वाली कहावत नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं पर चरितार्थ हो रही है. 

दरअसल, चुनावी समर में पिछले एक माह से ताबड़तोड़ मेहनत करने वाले राजनेताओं के भाग्य का फैसला हो जाएगा. कल कहीं अबीर-गुलाल उड़ेंगे, जिसके रंग से होली की याद ताजा हो जाएगी, तो कहीं पर उदासी और खामोशी चुपके से घर कर जाएगी. कहीं चार दिन बाद वाली दीवाली कल ही आ जाएगी. इन राजनेताओं के लिए आज की यह एक रात कल की खुशी और गम के लिए काफी भारी गुजरने वाली है.



बिहार की 243 सीटों पर जनता ने अपना फैसला इवीएम में बंद कर दिया है. कल सभी इवीएम खुलनेवाली है. कुछ घंटे का इंतजार है. जब इवीएम का पिटारा खुलेगा, इसके बाद से ही दिन चढ़ने के साथ ही जश्न और गम का एक साथ संगम देखने को मिलेगा. महागठबंधन, एनडीए, पीडीए, जीडीएसएफ समेत तमाम छोटे-बड़े दलों के लोगों की निगाहें कल पर टिक गयी है.

नए दोस्त बने तो दोस्ती टूटी भी

लोगों की मानें तो 2020 का चुनाव कई मायने में अलग है. कई दोस्त अलग हुए तो कई पहली बार साथ मिलकर चुनाव लड़े हैं. आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआईएम और माले ने मिलकर महागठबंधन बनाया, तो बिना लोजपा के बीजेपी, जेडीयू, हम और वीआईपी ने मिलकर एनडीए का गठन कर दिया. वहीं पप्पू यादव की पार्टी जाप के नेतृत्व में ‘रावण’ की भीम आर्मी समेत कई अन्य दलों ने मिलकर पीडीए बना डाला. इसी तरह, उपेंद्र कुशवाहा ने सबसे ज्यादा दलों को मिलाकर जीडीएसएफ फ्रंट बना लिया. इसी में असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हो गए.

सीएम उम्मीदवारों की भीड़

सभी गठबंधन के अपने-अपने मुख्यमंत्री कैंडिडेट हैं. एनडीए की ओर नीतीश कुमार, महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी यादव, पीडीए से जाप सुप्रीमो पप्पू यादव और जीडीएसएफ से उपेंद्र कुशवाहा सीएम उम्मीदवार हैं. इसके अलावा प्लूरल्स पार्टी से पुष्पम प्रिया चौधरी भी सीएम उम्मीदवार ही हैं. वे तो दो जगह बिस्फी और बांकीपुर से चुनाव लड़ रही हैं. सभी ने अपने-अपने गठबंधन के प्रत्याशियों की जीत के लिए खूब पसीना बहाया. सबसे ज्यादा तेजस्वी ने एक-एक दिन में 16-17 चुनावी सभा कर जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिश की, तो नीतीश कुमार ने एक दिन में 5-6 सभा कर जनता को यह बताने का प्रयास किया कि हमने काम किया है.

मोदी व राहुल भी आए बिहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बिहार के चुनावी समर में अपने-अपने गठबंधन के पक्ष में चुनावी हवा करने के लिए कड़ी मशक्कत की. पीएम ने बिहार में 12 सभाएं कीं तो राहुल गांधी ने भी 8 सभा कर महागठबंधन के लिए वोट मांगा. एग्जिट पोल को लेकर भी सियासी पारा चढ़ा हुआ है. एग्जिट पोल कितना एग्जैक्ट पोल में तब्दील होगा, वह 10 नंवबर यानी कल मंगलवार की देर शाम तक पता चलेगा. हालांकि इसका रूझान दोपहर बाद से मिलने लगेगा.