भोजपुर के शहीद अभय मिश्रा के पिता का दर्द, मेरे बेटे को ‘अपनों’ ने ही मारा

 

आराः मुझे दुख है कि मेरे अपनों ने ही मेरे बेटे के सीने में खंजर भोंकने का काम किया. मुझे दुख इस बात का है कि अंग्रेजों एवं विदेशियों ने नहीं अपने (नक्सलियों) घर के लोगों ने मारा. यह उस पिता के भीतर का दर्द है जिसका जवान बड़ा बेटा छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ले लड़ते-लड़ते शहीद हो गया.

जगदीशपुर थाना क्षेत्र के तुलसी गांव के रहने वाले सीआरपीएफ बटालियन के GD अभय मिश्रा के गांव में मातम पसरा हुआ है. गलियां सुनी हैं. CRPF बटालियन के शहीद जवान अभय मिश्रा के पिता किसान गजेंद्र मिश्रा की आंखें पथरा गई है. लेकिन उन पथरीले आंखों से भी आंसू रुक नहीं रहे थे. वे भी कलेजे के टुकड़े के लिये जार जार से रोये जा रहे थे.

एक जवान बेटा एक मां की आंखों के सामने से गायब हो जाए तो सोचिए उस मां के कलेजे पर क्या असर करता होगा. न सुध था और ना होश बस वह बेहोश हुए जा रही थीं. होश आता तो उनके मुंह से यही निकलता कैसे करेजवा फाड़ के गईल रे बबुआ…तोरा से पहले ही चल जईती रे बबुआ… यह मां माधुरी देवी थी जो अपने कलेजे के टुकड़े को हमेशा के लिए दूर चला गया जान चुकी थी. बेहोश मां को उठाने में घरवालो जुटे थे.

छोटा बेटा BSc पार्ट टू के छात्र अमित मिश्रा आरा जैन कॉलेज के स्टूडेंट हैं. उन्हें आशा थी कि उनका भाई 10 दिन बाद आएगा और उसके साथ मिलकर फिर मस्तियां करेगा. मगर उसका अरमान उसकी हसरत और भाई से मिलने की तमन्ना चकनाचूर हो गयी.

अमित को है सरकार से नाराजगी
अमित मिश्रा महज 3 साल अपने बड़े भाई शहीद अभय मिश्रा से छोटा है. पर सरकार से उसकी नाराजगी साफ तौर पर है वह भी यह कह रहा है कि मेरे भाई को अपनों ने ही मार दिया. यदि सरकार ही अच्छी रहती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता.

आज ही शव के आने की उम्मीद
छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों की गोलियों से शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान अभय मिश्रा का पार्थिव शरीर आज दोपहर उनके पैतृक गांव पहुंचेने की उम्मीद है. गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है.