दादा साहब फाल्के का नकली अवार्ड पाकर खेसारी लाल लूट रहे वाहवाही

लाइव सिटीज डेस्क : भोजपुरी एक्टर और गायक खेसारी लाल यादव अचानक से चर्चा में आ गए हैं. वजह है उन्हें दादा साहब फाल्के अवार्ड का मिलना. चौंकिए मत. ये सही है. खेसारी लाल को दादा साहब फाल्के अवार्ड तो मिला है. लेकिन फ़िल्मी एक्टर की कहानी में ऐसा ही फ़िल्मी ट्विस्ट भी है. खेसारी को जो दादा साहब फाल्के अवार्ड दिया गया है, वो वह अवार्ड नहीं है जिसे हम सब जानते हैं. खेसारी लाल को मिले अवार्ड का पूरा नाम ‘दादा साहब फाल्के अकादेमी अवार्ड’ है.

खेसारी लाल यादव को यह अवार्ड 1 जून को मुंबई में दिया गया. उनके साथ ही यह अवार्ड प्रियंका चोपड़ा, रवीना टंडन, कॉमेडियन कपिल शर्मा को भी दिया गया है. खेसारी लाल यादव को यह अवार्ड भोजपुरी सिनेमा में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. उन्हें यह अवार्ड हिंदी फिल्‍मों के चर्चित अभिनेता विवेक ओबेराय ने दिया. इस मौके पर कई बॉलीवुड हस्तियों को भी सम्मानित किया गया.

पहले जानिये क्या है इस अवार्ड का झोल?

देश के सबसे प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार केंद्र सरकार द्वारा भारतीय सिनेमा की तरक्की और विकास में शानदार योगदान देने वाले कलाकारों को दिया जाता है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिए जानेवाले इस पुरस्कार में एक स्वर्ण कमल (सोने का कमल), 10 लाख की नकद राशि और एक शॉल दिया जाता है. इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1969 में भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जानेवाले दादा साहब फाल्के की सौंवीं जयंती के अवसर पर की गई थी. साल 2016 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार तेलुगु फिल्म अभिनेता कसीनथुनी विश्वनाथ को बीते महीने दिया गया था.

अब जानिये क्या है दादा साहब फाल्के अकादेमी अवार्ड?

दादा साहब फाल्के अकादेमी अवार्ड इसी नाम वाली एक निजी ट्रस्ट द्वारा दिया जाता है. इस ट्रस्ट से फिल्म अभिनेता जानी लीवर, निर्माता-निर्देशक पहलाज निहलानी और मिथुन चक्रवर्ती जैसे लोग जुड़े हैं. यह ट्रस्ट साल 2000 से हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के कलाकारों को सम्मानित करती आ रही है. महत्वपूर्ण बात यह है कि दादा साहब फाल्के के नाती चंद्रशेखर पुसलकर खुद भी इस अवार्ड का समर्थन करते हैं. उनकी शिकायत है कि केंद्र सरकार दादा साहब फाल्के के नामपर हर साल पुरस्कार तो देती है लेकिन उसने कभी दादा साहब के परिजनों की सुध नहीं ली.

खेसारी लाल को इस साल मिला अकादेमी अवार्ड

अब ये बात तो साफ़ हो गई है कि भोजपुरी कलाकार खेसारी लाल यादव को जो अवार्ड दिया गया है उसकी अहमियत क्या है. बताया जाता है कि मुंबई में दादा साहब फाल्के के नामपर कई अवार्ड दिये जाते हैं. कई फिल्म समीक्षक की राय यह भी है कि दादा साहब फाल्के के नाम पर दिए जा रहे इन अवार्ड्स पर केंद्र सरकार को कार्रवाई करनी चाहिये जिससे प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की विश्वसनीयता बची रह सके.

अवार्ड के बाद खुश हैं खेसारी लाल

भारतीय सिनेमा जगत के सबसे बड़े अवार्ड से सम्‍मानित होने के बाद खेसारीलाल ने अपनी खुश जाहिर करते हुए कहा, ‘मुझे बेहद ख़ुशी है कि मुझे इस अवार्ड के काबिल समझा गया और मुझे यह अवार्ड दिया गया. मुझे अपनी भाषा भोजपुरी पर बेहद गर्व है.’ गौरतलब है कि खेसारीलाल यादव ने पांच साल पहले भोजपुरी सिनेमा में ‘साजन चले ससुराल’ से अपने करियर का आगात किया था. वे अब तक 48 भोजपुरी फिल्मों में काम करे चुके हैं. वे आज भोजपुरिया बॉक्‍स ऑफिस पर दर्शकों के बीच सबसे ज्‍यादा डिमांडिंग स्‍टार हैं.

अश्लीलता फैलाने का भी लगता रहा है आरोप

अपने शुरूआती दिनों में स्टेज शो और फिर धीरे-धीरे भोजपुरी प्रेमियों के बीच अपनी पहचान बनाने वाले खेसारी लाल पर अश्लील फ़िल्मी गाने गाने का भी आरोप लगता रहा है. हालांकि बाद में उन्होंने अश्लील फ़िल्मी गानों से तौबा कर ली और साथ ही यह भी ऐलान किया कि अब से किसी ऐसी फिल्म में काम नहीं करेंगे जिसमें कोई भी अश्लील या अभद्र गानों का इस्तेमाल किया जाए.

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