निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई, एरिया भुगतान के लिए शिक्षक से घूस लेते BEO को रंगे हाथों दबोचा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: बिहार के समस्तीपुर में निगरानी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. यहां निगरानी विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए BEO को गिरफ्तार कर लिया है. बता दें की बिथान प्रखंड के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सजंय कुमार को  निगरानी की टीम ने बीआरसी भवन से 10 हजार रुपए घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. विजिलेंस की टीम सजंय कुमार से पूछताछ कर आगे की कार्रवाई कर रही है.

मिली जानकारी के मुताबिक उत्क्रमित मध्य विद्यालय केलवारी के शिक्षक विकास कुमार की बकाया राशि के भुगतान के एवज में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने 20 हजार रुपये की मांग की थी. जिसको लेकर शिक्षक विकास कुमार ने निगरानी में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी. जिसके बाद निगरानी की टीम ने BEO को रंगे हाथ पकड़ने के लिए प्लान बनाया गया. और जैसे ही वह घूस ले रहा था तभी निगरानी टीम ने छापेमारी कर रुपया बरामद किया. वहीं, BEO को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई. अब पूरे मामले में जांच की जा रही है और पूछताछ किया जा रहा है. निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है.

पटना निगरानी द्वारा की गई इस कार्रवाई पर बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव सह जिला अध्यक्ष रामचंद्र राय ने कहा- शिक्षकों का दोहन शोषण करने वाले ऐसे भ्रष्ट पदाधिकारियों की ऐसी ही दुर्गति होनी चाहिए. ऐसे व्यक्तित्व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व शिक्षकों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए एक कलंक है जिसे संगठन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न करता आया है और ना करेगा. पटना निगरानी की टीम के द्वारा की गई इस बड़ी कार्यवाही के बाद पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा है. निगरानी की टीम कार्रवाई के बाद आरोपी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को अपने साथ लेकर पटना रवाना हो गई.

मालूम हो की मंगलवार को नवादा जिला के संयुक्त औषधालय के प्रधान लिपिक रमेश चौधरी को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. घूसखोर कर्मी की गिरफ्तारी नवादा स्थित उसके कार्यालय कक्ष से हुई थी. बता दें की मामले से परिवादी डॉक्टर नित्यानंद प्रसाद ने 12 मार्च 2021 को निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी. जिसमें प्रधान लिपिक रमेश चौधरी पर एसीपी का भुगतान करने के लिए 35 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था. सत्यापन में मामला सही पाया गया था. पहले किस्त के रूप में 15 हजार रिश्वत लेते प्रधान लिपिक को गिरफ्तार किया गया है.