Big Breaking: बिहार में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म, काम पर लौटने का जेडीए ने कर दिया ऐलान

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क:  जूनियर डॉक्टरों काम पर लौट गए हैं. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से वार्ता के बाद सहमति बनी. प्रधान सचिव से वार्ता के बाद जूनियर डॉक्टरों की टीम स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से मुलाकात की. मंत्री से भी उनकी मांग को मान लिए जाने के आश्वासन मिलने के बाद जेडीयू ने हड़ताल से लौटने का ऐलान कर दिया. पिछले 8 दिनों से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर बिहार के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर थे.

डॉक्टरों की हड़ताल का बुरा असर बिहार की स्वास्थ्य सेवा पर पड़ा.पटना के पीएमसीएच से आधे से ज्यादा मरीज पलायन कर गए. जबकि  भर्ती मरीजों का भगवान भरोसे इलाज चल रहा है. हड़ताल के कारण  पीएमसीएच में अभी तक  100 से ज्यादा ऑपरेशन टल चुके हैं. ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक के मरीज परेशान रहें. लोग इलाज के लिए इधर उधर भटकते दिखे. इन 8 दिनों में करीब 12 से ज्यादा मरीजों की मौत हो गयी. राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के करीब 1600 जूनियर डॉक्टरों ने कोरोना यूनिट की ड्यूटी को छोड़कर सभी कार्यों का बहिष्कार कर दिया था.



हड़ताली डॉक्टरों की माने तो 2017 में जूनियर डॉक्टर्स की छात्रवृत्ति प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष के लिए क्रमश: 50 हजार, 55 हजार व 60 हजार रुपए मासिक निर्धारित हुई थी. तब प्रत्येक तीन वर्ष पर छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी किए जाने का आश्वासन स्वास्थ्य विभाग ने दिया था. इसके अनुसार, जनवरी, 2020 में छात्रों की छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी की जानी थी लेकिन उसे अबतक नहीं किया गया है.जबकि वर्तमान में एम्स, पटना और आईजीआईएमएस, पटना के जूनियर डॉक्टरों को 90 हजार रुपए छात्रवृत्ति के रूप में भुगतान किया जा रहा है.

जूनियर डॉक्टरों को काम पर लौटने के लिए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने अपील किया था. लेकिन इन सभी की अपील को दरकिनार कर जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों पर अड़े रहे. यहां तक की आईएमए ने भी काम पर लौटने की अपील की, उसे भी नजरअंजाद कर दिया गया.