Big Breaking : सुशील मोदी की जगह कामेश्वर चौपाल हो सकते हैं बिहार का अगला डिप्टी सीएम ! …सियासी गलियारे में चर्चा तेज

सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बिहार में नई सरकार का गठन होना है. यह गठन 29 नवंबर के पहले होना तय है. एनडीए को बहुमत मिला है. मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार भी तय हो गए हैं. लेकिन सवाल उपमुख्यमंत्री को लेकर उठने लगा है. निवर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी हैं.

सुशील मोदी नीतीश कुमार के पहले कार्यकाल से लगातार डिप्टी सीएम पर बने हुए हैं. बीच में 2015 में महागठबंधन की सरकार आई तो वे नेता प्रतिपक्ष बने. लेकिन महागठबंधन की सरकार डेढ़ साल भी ठीक से नहीं चली. बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बन गई. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार आ गए, तो उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर फिर से सुशील मोदी काबिज हो गए.



लेकिन इसबार बिहार के सियासी गलियारे में सुशील मोदी की जगह कामेश्वर चौपाल का नाम तैरने लगा है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी उन्हें अहम जिम्मेवारी सौंपने वाली है. कहा तो यह भी जा रहा है कि बीजेपी उन्हें उपमुख्यमंत्री की कुर्सी देने वाली है. हालांकि इस पर अभी अधिकृत रूप से कोई भी नेता बयान देने को तैयार नहीं है. वहीं, कामेश्वर चौपाल का कहना है कि मैं पार्टी का सिपाही हूं. इस नाते मुझे जो भी जिम्‍मेदारी पार्टी देगी, उसका मैं समर्पित होकर निर्वाह करूंगा.

दरअसल, एनडीए में इस बार बीजेपी काफी मजबूत स्थिति में है. मतगणना के दौरान से ही वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में नजर आने लगी थी. हालांकि एक सीट से वह पिछड़ गई तथा पार्टी का कांटा 74 पर आकर रुक गया. सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आरजेडी बन गई. आरजेडी को 75 सीटें आईं. इधर, एनडीए में बीजेपी बड़ी पार्टी बनकर आने के बाद से ही चर्चा तेज है कि कैबिनेट में उसकी बड़ी हिस्सेदारी रहेगी. इसका संकेत भी मिलने लगा है. इसी कड़ी में कामेश्वर चौपाल का नाम अचानक से सुर्खियों में आ गया है.

बीजेपी का एक तीर से दो निशाना

सियासी पंडितों का मानना है कि कामेश्वर चौपाल को कैबिनेट में अहम पद देने से एक तीर से दो निशाना लगाने जैसा होगा. पहला, बिहार मत्रिमंडल में बड़ा पद देने से हिंदुत्व वोट बैंक मजबूत होगा. हिंदुत्व बीजेपी का शुरू से ऐजेंडा रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं की ओर से सीमांचल में किए गए चुनाव प्रचार में यह देखने को भी मिला.

सीमांचल में चुनाव प्रचार के दौरान राम मंदिर से लेकर पाकिस्तान का मुद्दा छाया रहा था. अंतिम चरण की वोटिंग में बीजेपी को फायदा भी मिला. दूसरा, कामेश्वर चौपाल बीजेपी का दलित चेहरा है तो इससे उस समुदाय के बीच पार्टी की पैठ भी बढ़ेगी.

सियासी पंडितों की मानें तो लोजपा प्रकरण सामने है. चिराग पर एनडीए क्या फैसला लेता है, इसका उत्तर भविष्य के गर्भ में छिपा है. लेकिन रामविलास पासवान की मौत से बीजेपी दलित चेहरे की कमी को महसूस कर रही है. चौपाल के कैबिनेट में अहम पद देने से दलित चेहरे की भरपाई की एक सार्थक कोशिश होगी.

कौन हैं कामेश्वर चौपाल

कामेश्वर चौपाल बीजेपी का दलित चेहरा माने जाते हैं. वे अयोध्या में बन रहे राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं. इसी साल फरवरी में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट में भी कामेश्वर चौपाल को शामिल किया गया था.

बता दें कि वे बीजेपी और हिंदू संगठन से शुरुआती दौर से ही जुड़े हुए हैं. कामेश्वर चौपाल ने ही 1989 के नवंबर माह में राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास कार्यक्रम में पहली ईंट रखी थी. उस शिलान्यास के बाद कामेश्वर चौपाल का नाम सुर्खियों में आ गया था. तब वे विश्‍व हिंदु परिषद में थे. इसी का लाभ उन्हें 1991 के लोकसभा चुनाव में मिला. वे रोसड़ा से सांसद बने.

हालांकि 1995 में बखरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए. इसके बाद 2002 से 2014 तक एमएलसी रहे. 2014 में फिर उन्हें बीजेपी ने एमपी का टिकट दिया, पर हार गए. इसके बाद वे राजनीति में थोड़ा शिथिल पड़ गए. लेकिन इस साल जब पार्टी ने राम मंदिर के ट्रस्ट में रखा तो वे अचानक से सुर्खियों में आ गए.