बागी हुए शरद यादव, कहा- महागठबंधन तोड़ना नीतीश का दुर्भाग्यपूर्ण फैसला

लाइव सिटीज डेस्क : नीतीश कुमार के एनडीए में जाने के फैसले पर काफी दिनों से खामोश चल रहे  जदयू के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद शरद यादव ने चुप्पी तोड़ दी है. उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार का महागठबंधन तोड़ने का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं.  उन्होंने नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने पर दुख जताते हुए कहा कि जनता ने हमें इस चीज़ के लिए बहुमत नहीं दिया था.  उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे नीतीश कुमार के फैसले से सहमत नहीं हैं.  

बता दें कि बिहार में एनडीए सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू में अंदरूनी कलह शुरू हो गई है. बीजेपी से हाथ मिलाने को लेकर कई शीर्ष नेताओं में नाराजगी है. वे नीतीश कुमार के फैसले से खुश नहीं हैं. गौरतलब है कि जैसे ही महागठबंधन टूटा और सीएम नीतीश ने 4 साल बाद फिर से भाजपा का दामन थामा वैसे ही शरद यादव दुखी हो गए थे. उन्होंने मीडिया से बात करना बंद कर दिया था. कहा गया कि नीतीश कुमार ने उनसे इस मामले में कोई राय-मशवरा नहीं किया था. 

वहीं दो राज्य सभा सांसदों अली अनवर और वीरेंद्र कुमार पहले ही नीतीश के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं. बता दें कि अभी राज्यसभा में जदयू के कुल 10 सांसद हैं.  अब खबर तो यहां तक है कि शरद यादव अब लग रास्ता अपना सकते हैं. चर्चा है कि वे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और कांग्रेस के भी संपर्क में हैं.

साथ ही शरद यादव के अलावा देश के कई हिस्सों में जदयू नेताओं के बीच  नीतीश कुमार का भाजपा से हाथ मिलाने को लेकर नाराजगी है. नाराजगी इस कदर है कि अब 20 राज्यों के जदयू नेता नीतीश कुमार को बीजेपी से मेल करने के खिलाफ चिट्ठी लिखने जा रहे हैं. वे सभी चिट्ठी लिख कर नीतीश कुमार के इस फैसले का विरोध करेंगे.

वहीं एनडीए के सहयोगी दल हम और रालोसपा को बिहार कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाने से जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे हैं साथ ही बगावती तेवर भी दिखा रहे हैं. जीतन राम मांझी तो खुल कर मीडिया में रामविलास पासवान पर हमला बोल रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोजपा का पहले से केंद्र में मंत्री  और सांसद है. फिर भी बिहार सरकार में उनकी पार्टी के नेता को मंत्री पद दिया गया है.

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