टाटा मोटर्स का बड़ा फैसला : अब हर कर्मचारी एक समान, नहीं होगा कोई बॉस

लाइव सिटीज डेस्क : इन दिनों जहां किसी कंपनी में कर्मचारियों में इस बात की होड़ लगी रहती है कि जल्द से जल्द प्रमोशन लेकर उंचे ओहदे पर आसीन हो जाएं. वहीं देश की बड़ी कंपनी टाटा मोटर्स ने बड़ा फैसला लेते हुए कंपनी में से इस होड़ को ही खत्म कर दिया है. अब टाटा मोटर्स कंपनी में कोई बॉस नहीं होगा.  

टाटा मोटर्स की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह कदम कर्मचारियों के बीच रचनात्मक माहौल पैदा करने के लिए उठाया गया है. कंपनी ने लगभग सारे पद खत्म कर दिए हैं. गौर करने वाली बात है कि टाटा मोटर्स आय के मामले में देश की सबसे बड़ी वाहन कंपनी है, लेकिन कार और एसयूवी बाजार में उसकी हिस्सेदारी कम है.

इस बदलाव से टाटा मोटर्स के 10 हजार कर्मचारी प्रभावित होंगे. बहरहाल, टाटा मोटर्स ने कंपनी के अंदर रचनात्मक माहौल पैदा करने और टीम वर्क को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीति अपनाई है.

टाटा मोटर्स ने इस बड़े फैसले पर कहा कि इससे समानता को बढ़ावा मिलेगा. कंपनी की तरफ से खत्म किए गए ओहदों में जनरल मैनेजर, सीनियर जनरल मैनेजर, डिप्टी जनरल मैनेजर, उपाध्यक्ष और वरिष्ठ उपाध्यक्ष जैसे अहम पद शामिल हैं. 

बता दें कि एक सर्कुलर के जरिए कंपनी ने अपने कर्मचारियों को यह जानकारी दी थी. कर्मचारियों के लिए जारी सर्कुलर में टाटा मोटर्स ने कहा है कि उससे वे ओहदे और पदानुक्रम की मानसिकता से मुक्त हो सकेंगे.

अब नए सिस्टम में मैनेजर को ‘हेड’ का दर्जा दिया जाएगा. उनके नाम के बाद उनके विभाग का नाम दिया जाएगा यानी मैनेजर अब एक तरह से टीम हेड कहलाएंगे. इसके अलावा सबसे निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के नाम के साथ उनका विभाग जुड़ा होगा.

इस मामले में टाटा मोटर्स के एक स्पोक्स पर्सन ने कहा- हमने कंपनी में हेरार्की (पदानुक्रम) फ्री संस्कृति विकसित करने के लिए नो डेजिग्नेशन पॉलिसी अपनाई है. तगड़ी प्रतिस्पर्धा वाले मौजूदा बाजार में कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा करना जरूरी था.

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